You are currently viewing Alternator Kya hai 2022

Alternator Kya hai 2022

Alternator Kya hai दोस्तों स्वागत है आपका हमारी इस वेबसाइट में जिसमे हमको बताने वाले है की अलटरनेटर क्या है और इससे जुडी हम आपको जानकारी देंगे और दोस्तों आपको यह जानकारी काफी सरल भाषा में आपको समझायेंगे की यह है Alternator Kya hai  क्या और इसका कार्य क्या है और दोस्तों उम्मीद है आपको हमारा यह आर्टिकल काफी पसंद आएगा तो चलिए शुरू करते है





Alternator Kya hai 2022

यांत्रिक ऊर्जा को प्रत्यावर्ती विद्युत धारा में परिवर्तित करने वाले यंत्र को प्रत्यावर्तक ( अल्टरनेटर ) कहते हैं ।यह AC जनरेटर होता है, इसके द्वारा प्रत्यावर्ती धारा उत्पन्न की जाती है। अल्टरनेटर से उच्च वोल्टेज 11kv से 33kv तक की प्रत्यावर्ती विद्युत ऊर्जा का उत्पादन किया जा सकता है ।

Mechanical Energy और Electrical Energy

Mechanical Energy उस प्रकार के energy को कहा जाता है जो की एक object के पास होता है उसके movement या उसके position के कारण. आपकी car की engine काफी सारे parts से बनी होती है, जिसमें एक चीज़ ऐसा भी होता है जिसे की crankshaft कहते हैं. यही crankshaft rotate करती है जब engine run कर रही होती है. ये rotation से एक प्रकार की energy पैदा होती है जिसे की mechanical energy कहते हैं, और इसे ही alternator को pass किया जाता है फिर ये alternator इसी mechanical energy को लेकर उसे electrical energy में तब्दील करती है, ये वही energy होती है जो की electric charge से आती है. Specifically, alternator alternating current, या AC पैदा करता है. जैसे की नाम से पता चलता है की ये electrical current alternate करता है या direction switch करता रहता है. इसके ठीक विपरीत ही direct current, या DC, होता है जहाँ की electrical current एक ही direction में flow करती है. आपके घर, office, और outlets में जो currenct का उपयोग होता है वो AC current हो होता है। इसे एक जगह से दुसरे जगह में ले जाना आसान होता है Alternator Kya hai  और ये ज्यादा voltage भी प्रदान करता है। हमारे कुछ उपकरण जैसे की cellphone, items जो की batteries का उपयोग करते हैं, और flat-screen TVs DC का उपयोग करते हैं। इन उपकरणों को DC कैसे दिया जाता है । उपयोग AC outlets में कर सकते हैं लेकिन इसके लिए आपको AC adapter या एक USB cable का उपयोग करना होगा.

अल्टरनेटर का इतिहास

Hippolyte Pixxi और Michale Faraday ने सबसे पहले alternator का concept लाया था. उन्होंने एक rectangular rotating conductor design किया था एक magnetic field के पास ताकि वो alternating current पैदा कर सके outer static circuit के लिए. J.E.H. Gordon ने सन 1886 में, एक ऐसे ही model को design और produce किया था जो की इसका पहला prototype था. एक model जो की था 100 से 300 Hz synchronous generator का उसे Kelvin और Sebastin Ferranti ने design किया था. वहीँ सन 1891 में, Nikola Tesla ने एक commercially useful 15 Khz generator बनाया था. Poly Phase alternators उसके कुछ वर्षों के बाद commercialize हो गया जो की multiple phase currents प्रदान करने की क्षमता रखता है.

Alternator के Main Components क्या है?

Alternator किसी भी गाड़ी का एक काफी ही important part होता है. जो की car की battery को maintain करता है, lights को power प्रदान करता है, साथ में heater और दुसरे accessories के लिए भी कार्य करता है. ये Generator के जैसे ही काम करता है और electricity पैदा करता है turbine system के जैसे. Car की 12-volt battery के पास इतनी charge तो होती ही है जिससे car को start किया जा सकता है. वहीँ बिना alternator के, battery को आसानी से recharge नहीं किया जा सकता है बल्कि इसके बिना उसे manually हर समय charge करना होगा जब आप car को restart करें तब. देखा जाये तो alternator के बहुत से मुख्य components होते हैं जो की अपना अपना कार्य करते हैं।

Electromagnets

Alternators electromagnets का उपयोग करते हैं magnetic field create करने के लिए. Electromagnets उपयोग करते हैं wire जिन्हें की metal piece के चारों तरफ wrap किया जाता है. जब एक electrical current उस wire के through जाता है, तब वह metal का piece magnetized हो जाता है.

 कुछ words के बारे में जो की magnets से associated हैं. Magnetic field उस field को कहा जाता है जो की magnetic substances के चारों तरफ create होता है. एक magnetic substance एक प्रकार का material होता है जिसमें की electrons को कुछ इसप्रकार से orient किया जाता है जिससे ये ये दुसरे metals को attract कर सके  tiny particles से बने हुए होते हैं जिन्हें की atoms कहा जाता है. Atoms में electrons nucleus के बाहर spin कर रहे होते हैं. Electrons tiny magnets के तरह होते हैं. ये electrons हमेशा एक ही direction में spin करते हैं Alternator Kya hai वो भी एक ही एक ही certain way में. Actually ये सभी अलग अलग spin कर रहे होते हैं, लेकिन तब से substance magnetic नहीं होते हैं. और जब ये एक ही direction में orient होते हैं तब ये magnet के तरह behave करते हैं Electromagnet में, जब electrical current wire के through pass करता है, तब ये metal के electrons को एक ही समान direction में orient करते हैं, और आपको एक magnet प्राप्त होता है।

Stator

आपने अभी एक rotor के rotation, या spins के बारे में जाना. ये actually stator के अन्दर ही spin कर रही होती है, जो की एक iron core होता है जिसे तीन coils surround करती है. इन दोनों को एक दुसरे से differentiate करना आसान है जहाँ rotor rotate करता है वहीँ stator stationary होते हैं. ये crankshaft drive belt को rotate करने में आसानी प्रदान करती है, जिससे stator के अन्दर स्तिथ rotor turn on हो जाता है. इसी mechanical energy के बारे में मैंने lesson के प्रारंभ में बात की थी.

Alternator Rotor

Rotor, ये बना हुआ है iron core से जिसके चारों तरफ copper wire की winding होती है. जब एक electrical charge को wire में introduce किया जाता है, तब ये उस iron core को magnetizes कर देती है (Electromagnet). ये electrical current brushes से आते हैं जो की metal rings के contact में आती है. Specifically बोलें तो, इन metal rings को slip rings कहा जाता है, और ये usually copper से बने हुए होते हैं. जैसे की rotor spin करता है (सोचिये rotor = rotation), तब ये slip rings brushes के contact में आता है जो की carbon के बने हुए होते हैं. ये contact एक electrical charge create करती है, Alternator Kya hai और charge travels करती है winding copper wire के through, और ये एक electromagnet create करती हैं.

Rotor और Stator

ये rotor और stator किसी alternator के belt-driven group of magnets होते हैं जो की copper wiring के भीतर होती हैं और ये एक magnetic field create करती हैं. ये belt को drive किया जाता है pulley के द्वारा जो की engine से connect हुआ होता है, और जो की allow करता है rotor को high-speed में spin करने के लिए, जिससे एक magnetic field create होती है. फिर stator voltage और electricity पैदा करती है जो की flow होती है diode assembly में. इसमें जो electricity बनती है वो होती है Alternator Kya hai  alternate current, या AC.

Diode Assembly

एक alternator की diode assembly convert करती हैं AC electricity को direct current, या DC में, जो की वो current type होती है जिसे की car batteries में इस्तमाल किया जाता है. Alternator Kya hai ये diode assembly, एक two-terminal system होता है, जो की work करता है केवल electricity में जो की stator में पैदा होता है और इसे केवल एक ही dirction में flow होने के लिए.

Voltage Regulator

ये voltage regulator alternator का surge protector होता है. Modern voltage regulators, जो की internal systems होते हैं, वो monitor करते हैं दोनों alternator और battery voltage को, जिसके लिए ये केवल जरुरत के अनुसार ही current को adjust करती हैं. Older voltage regulators को externally mount किया जाता है.

Alternator Motor के Parts

Diode Rectifier

इस diode rectifier, को rectifier bridge भी कहा जाता है, और ये responsible होता है alternating current को direct currenct में convert करने के लिए Alternator के मदद से. ज्यादातर automobile alternators में six diodes होते हैं. ये part एक translator के जैसे होता है rotor, stator और battery के बिच.

Rotor Assembly

एक rotor assembly बहुत सारे parts से बने हुए होते हैं. इसका main part एक iron core होता है, जिसके चारों तरफ wires (field windings) को wound किया गया होता है. Core और windings के चारों तरफ finger poles होते हैं, जिन्हें की placed किया जाता है alternating north और south charges के साथ. जैसे ही rotor spin करता है, तब alternating finger poles एक magnetic field create करती हैं iron core के चारों तरफ core, windings, और poles बहुत ही crucial parts होते हैं rotor assembly के, वहीँ rotor assembly में और भी चीजें होती है जैसे की एक cooling fan, slip rings, brushes, और bearings. ये ही responsible होते हैं current को winding के तरफ direct करने के लिए, जिससे ये alternator को overheating से बचाती हैं, और main assembly parts की proper movement में मदद करती है.Alternator Kya hai 

Stator

ये stator एक प्रकार का circular unit होता है जो की rotor को surround करता है. ये iron housing के चारों तरफ wire coils के लिपटे होने से बनता है. जब rotor spin करता है और current produce करता है, तब current directly stator mein transfer होती है. ये stator में तीन leads होती हैं जो की diode rectifier से connect होती है.

Rectifier

ये diode rectifier जो की connected होता है stator के साथ वो convert करता है alternating current को direct current में जिसे की battery में इस्तमाल किया जा सकता है. ये alternator system का translator होता है. ज्यादातर automobile alternators में six diodes होते हैं diode rectifier बनाने के लिए.

Terminals

एक standard alternator में five separate terminals होते हैं जिन्हें की electrical circuit से connect किया जाता है. ये terminals battery के voltage को sense कर लेते हैं, उसके बाद alternator के voltage regulator को turn on भी कर देते हैं, फिर current को battery में distribute भी करते हैं, उसके बाद warning lamp circuit को बंद कर देती है और regulator को bypass कर देती है.

Voltage Regulator

ये voltage regulator, जैसे की नाम से पता चलता है की इनका इस्तमाल alternator के voltages को regulate करने के लिए होता है. ये responsible होता है distributing करने के लिए जो power produce होता है battery के लिए. अगर voltage regulator काम नहीं करता है, तब battery receive कर सकता है too much या too little power, जिससे charging problems या battery overload जैसे समस्याएं उत्पन्न होती है

AC Generator कैसे काम करता है?

एक Atlernator या AC generator का basic working principle समान होता है एक DC generator के जैसे ही. Faraday’s law of electromagnetic induction, के हिसाब से जब भी कोई conductor एक magnetic field में move करता है तब EMF induced होता है across the conductor. अगर close path provide किया जाये conductor को, तब ये induced emf बाध्य करता है current को circuit में flow होने के लिए उदाहरण के लिए जब एक conductor coil ABCD को place किया जाये एक magnetic field में. तब magnetic flux का direction होगा N pole से S pole. तब coil connect होगा slip rings से, और load connected होगा brushes से जो की slip rings में rest करेगा अगर coil clockwise rotate करेगा, तब इस case में induced current का direction होगा Fleming के right-hand rule के हिसाब से, और वो होगा along A-B-C-D

  • coil rotate कर रहा है clockwise, इसलिए half of the time period के बाद, coil का position कुछ अलग होगा. इस case में, induced current का direction Fleming’s right-hand rule के हिसाब से होगा along D-C-B-A. इससे ये पता चलता है की current का direction change होता है halftime period के बाद, जिसका मतलब है हमें एक alternating current प्राप्त होता है.
  • Armature की Winding Stationary होती है Alternator में
  • High voltages में, stationary armature winding को insulate करना आसान होता है, जो की ज्यादा से ज्यादा 30 kV ये उससे ज्यादा भी हो सकता है.
  • ये high voltage output को आसानी से directly बाहर ले जाया जा सकता है stationary armature से. वहीँ एक rotary armature, ये इतना आसान नहीं है क्यूंकि इसमें large brush contact drop होता है higher voltages में, साथ ही brush surface में sparking होती रहती है.
  • Field exciter winding को rotor में place किया जाता है और low dc voltage को आसानी से और safely transfer किया जा सकता है.
  • इसमें armature winding को अच्छे से braced किया जाता है, जिससे ये high centrifugal force से होने वाले deformation को prevent कर सके
  • अल्टरनेटर का कार्य सिद्धांत
  • अल्टरनेटर के विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के सिद्धांत पर काम करता है ।
  • अल्टरनेटर के मुख्य भाग स्टेटर, रोटर, एक्साइटर, आदि हैं ।
  • अल्टरनेटर के प्रकार
  • अल्टरनेटर विभिन्न प्रकार का होता है –
  • जल टर्बाइन आल्टरनेटर
  • जल स्त्रोत जैसे बांध आदि के जल को टर्बाइन के ब्लेड पर ऊंचाई से गिराया जाता है जिससे टर्बाइन घूमने लगती है । घूमती हुई टर्बाइन की सहायता से आल्टरनेटर के रोटर को घुमाया जाता है ।
  • बाष्प टर्बाइन आल्टरनेटर
  • इसमे टर्बाइन को घुमाने के लिए बाष्प का इस्तेमाल किया जाता है, बाष्प को कोयला आदि से उत्पन्न किया जाता है
  • डीजल इंजन आल्टरनेटर
  • इसमे ऑयल चालित इंजन के जरिये रोटर को घुमाया जाता है ।

अल्टरनेटर का निम्न प्रकार वर्गीकरण किया गया है

  • सिंगल फेज अल्टरनेटर
  • तीन फेज अल्टरनेटर

रोटेटिंग पार्ट के आधार पर

  • रोटेटिंग फील्ड
  • रोटेटिंग आर्मेचर
अल्टरनेटर का उपयोग
  • अल्टरनेटर का उपयोग प्रत्यावर्ती विद्युत ऊर्जा उत्पादन मे किया जाता है ।

अल्टरनेटर की कार्यप्रणाली

जब रोटर को स्टेटर के बीच घुमाया जाता है तो तो रोटर से उत्पन्न होने वाली चुम्बकीय बल रेखाएं स्टेटर के चालक का छेदन करती है ।जिससे फैराडे के विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के नियम के अनुसार स्टेटर वाइण्डिंग मे विद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है ।

तो दोस्तों , आपको हमने इससे जुडी सभी जानकारी दी है यकीन है आपको पसंद आया होगा और दोस्तों आपको यह हमारा यह आर्टिकल पसंद आया है तो आप कमेंट बॉक्स में जरूर बताये और ऐसे हम आपके लिए और नयी जानकारी लेकर आएंगे और आपको दोस्तों और नयी जानकारी जानना चाहते है तो , आप हमें बता सकते है। जिससे हम आपके लिए आर्टिकल जरूर प्रस्तुत करेंगे।

धन्यवाद


प्रश्न- ऑल्टरनेटर में आर्मेचर कोर कहां होती है?

(A) स्टेटर पर

(B) रोटर पर

(C) बॉडी या फ्रेम पर

(D) ऑर्मेचर पर

उत्तर-(A)

प्रश्न-यान्त्रिक ऊर्जा को ए.सी. प्रकार की वैद्युतिक ऊर्जा में परिवर्तित करने वाली मशीन होती है

(A) स्लिप रिंग मोटर

(B) ऑल्टरनेटर

(C) स्क्विरल केज

(D) स्टेपर मोटर

उत्तर-(B)

प्रश्न-ऑल्रनेटर में चुम्बकीय क्षेत्र स्थापित करने वाला भाग कहलाता है

(A) स्टेटर

(B) रोटर

(C) बॉडी या फ्रेम

(D) ऑर्मेचर

उत्तर-(B)

प्रश्न-सेलिएण्ट पोल रोटर की गति होती है

(A) 375 से 1000 RPM

(B) 500 से 1000 RPM

(C) 345 से 1000 RPM

(D) 325 से 1000 RPM

उत्तर-(A)


Related Link:







 

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments