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Anode or cathode Kya Hai In hindi 

Anode or cathode Kya Hai In hindi 

Anode or cathode Kya Hai दोस्तों आज हम फिर से आपके लिए एक और नयी जानकारी लेकर आये है जोकि इलेक्ट्रॉनिक से रिलेटेड है और यह जानकारी को हमने काफी सरल तरीके से आपको बताया है Anode or cathode Kya Hai  और इनमे क्या अंतर है  यह जानेगे और तो अब हम शुरू करते है यह है क्या ?

Anode Kya Hai 

किसी भी बैटरी के किनारों में दो टर्मिनल होते हैं जिसमे एक एनोड होता है और दूसरा कैथोड. जब कभी भी बैटरी या सर्किट में करंट फ्लो होती है तो वो एनोड और कैथोड जैसे दो टर्मिनल के द्वारा होता है।Anode or cathode Kya Hai  जिसमे एक पॉजिटिव और दूसरा नेगेटिव चार्ज होता है। जब करंट फ्लो होती है किसी भी सर्किट में तो उसमे एक पॉजिटिव टर्मिनल होता है जिसे हम कैथोड कहते हैं और एक नेगेटिव टर्मिनल होता है जिसे हम एनोड कहते हैं। लेकिन जब बैटरी को चार्ज करना होता है तो एनोड और कैथोड के चार्ज बदल जाते हैं और एनोड पॉजिटिव हो जाता है और कैथोड नेगेटिव हो जाता है.

सरल रूप से यदि बात की जाये तो एनोड का चार्ज करंट फ्लो होने के समय नेगेटिव होता है और बैटरी को चार्ज करने के समय पॉजिटिव हो जाता है.Anode or cathode Kya Hai  एनोड और कैथोड एक प्रकार के इलेक्ट्रोड होते हैं। जिनका चार्ज कार्य के अनुसार बदल जाता है. एनोड पे इलेक्ट्रान डिवाइस के द्वारा पहुंचते हैं और फिर करंट फ्लो होती है.

कैथोड भी एक प्रकार के इलेक्ट्रोड है जिसका कार्य एनोड के साथ मिल के करंट को फ्लो करना होता है. जब कभी भी सर्किट में करंट फ्लो की जाती है। कैथोड पॉजिटिव होता है और जब भी बैटरी को चार्ज किया जाता है तो कैथोड नेगेटिव होता है और साथ ही एनोड पॉजिटिव हो जाता है। कैथोड में इलेक्ट्रॉन बाहर से बहते हैं।

कैथोड क्या है –

कैथोड वह टर्मिनल है जहां पारंपरिक प्रवाह वर्तमान device में बहता है। अगर दूसरेन शब्दों में कहे तो इलेक्ट्रान इस टर्मिनल  में बहार से बहते है .

कैथोड किरणों की खोज किसने की थी –

CRT (Cathode Ray Tube) की earliest version को “Braun tube” भी कहा जाता है , इनको एक जर्मन वैज्ञानिक जिनका नाम Ferdinand Braun ने 1897 में किया था Anode or cathode Kya Hai   यह एक cold-cathode diode था, जो की एक modification था Crookes tube की जिसमें एक phosphor-coated screen का इस्तमाल किया गया था.

इलेक्ट्रोलाइटिक एनोड

ऑक्सीकरण होता है और एक में सकारात्मक polarity संपर्क है विद्युत् अपघटनी सेल  एनोड पर, आयनों (नकारात्मक आयनों) को विद्युत क्षमता द्वारा रासायनिक रूप से प्रतिक्रिया करने और इलेक्ट्रॉनों (ऑक्सीकरण) को छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है जो तब ऊपर और ड्राइविंग सर्किट में प्रवाहित होते हैं। निमोनिक्स : LEO रेड कैट (इलेक्ट्रॉनों का नुकसान ऑक्सीकरण है, कैथोड में कमी होती है), या एनोक्स रेड कैट (एनोड ऑक्सीकरण, कमी कैथोड), या ओआईएल आरआईजी (ऑक्सीकरण हानि है, कमी इलेक्ट्रॉनों का लाभ है), Anode or cathode Kya Hai  या रोमन कैथोलिक और रूढ़िवादी (कमी – कैथोड, एनोड – ऑक्सीकरण), या LEO शेर कहते हैं GER (इलेक्ट्रॉनों को खोना ऑक्सीकरण है, इलेक्ट्रॉनों को प्राप्त करना कमी है। इस प्रक्रिया का व्यापक रूप से धातु शोधन में इस्तेमाल किया जाता है। उदाहरण के लिए, कॉपर रिफाइनिंग में, कॉपर एनोड, भट्टियों से एक मध्यवर्ती उत्पाद, उच्च शुद्धता (99.99%) कैथोड प्राप्त करने के लिए एक उपयुक्त समाधान (जैसे सल्फ्यूरिक एसिड ) में इलेक्ट्रोलाइज किया जाता है । इस विधि का उपयोग करके उत्पादित कॉपर कैथोड को इलेक्ट्रोलाइटिक कॉपर के रूप में भी वर्णित किया जाता है ।

Current का Flow क्या होता है?

Anode और Cathode को Current के Flow से define किया जा सकता है. आमतोर से बात करें तब, current का अर्थ होता है electrical charge का movement. वो movement चाहे किसी भी direction में हो ये Current  कहते है Current की Direction Positive Charge के movement के ऊपर निर्भर करती है Anode or cathode Kya Hai  इसका एक और अर्थ भी है की Curent की movement हमेशा Electon के movement के अलग होती है।

Current उसी direction में flow करता है जिस direction में positive charge carriers move करती है. वहीँ हम इसे ऐसे भी सोच सकते हैं की Current हमेशा negative charge carriers के movement के विपरीत move करती है

Cathode की Characteristics

  • कैथोड एक negatively charged electrode होती है .
  • cations या positive charge को cathode attracts करती है .
  • कैथोड electrons का  एक source  होता है इसे हम एक electron donor भी कहते है .ये एक positive को attracts करती है .
  • कैथोड इलेक्ट्रान generate करती है ये typically electrical species होते है , हम ये कह सकते है की cathode से anode तक ,   कैथोड charge generate करती है current को move करती है . ये थोडा confusing लग सकता है, क्यूंकि Current का direction निर्भर करता है Anode Kya Hai  positive charge किस direction में move कर रही हैं, बस यहाँ एक चेज ध्यान रखने वाली ये है की charged particles की कोई भी movement को current कहते है।

Anode की Characteristics –

  • Anode एक  positively charged electrode होता है .
  • एनोड  electrons या anions को attracts करती है .
  • positive charge या एक electron acceptor का  anode एक source होता है

एनोड और कैथोड में अंतर –

  • charge किसी भी  direction में flow कर सकता है .  चाहे वो positive से negative हो या negative से positive , और इसी कारण से  anode positively charged हो सकता है या negatively ये  situation पर निर्भर करता है , यही चीज कैथोड पर भी लागू होती है .
  • एनोड और कैथोड का प्रयोग एक Polarised Electrical Device के terminals को refer करने के लिए किया जाता है.
  • इन दोनों में मुख्य अंतर ये है की anode एक ऐसा terminal होता है Anode Kya Hai जहाँ की (conventional) current device के भीतर flows करता है बाहर से, वहीँ cathode एक ऐसा terminal होता है जहाँ की (conventional) current flows device से बाहर जाता है

तो , दोस्तों आपको हमने इसकी अच्छे से पूरी जानकारी दी है आपको अच्छे से समझ आ चूका होगा की और आपको यह आर्टिकल पसंद आया है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताये। और दोस्तों आप अपने दोस्तों तक यह आर्टिकल जरूर पहुचाये और ऐसे ही हम आपके लिए नयी जानकारी जरूर लेकर आएंगे अभी तक के लिए

धन्यवाद


Q. Cathode किरणों की खोज किसने की थी?

CRT (Cathode Ray Tube) की earliest version को “Braun tube” भी कहा जाता है, और इसे एक German physicist Ferdinand Braun ने सन 1897 में खोज की थी. यह एक cold-cathode diode था, जो की एक modification था Crookes tube की जिसमें एक phosphor-coated screen का इस्तमाल किया गया था.

Q. Anode Rays (किरणों) की खोज किसने की थी?

Anode rays की खोज Eugen Goldstein ने सन 1886 में की थी. एक anode ray (जिसे की positive ray या canal ray भी कहा जाता है) ऐसा positive ions का beam होता है जिसे की कुछ specific types के gas-discharge tubes से create किया जाता है. उन्हें सबसे पहले observe किया गया था Crookes tubes में experiment करने के दौरान. ये Experiments एक German scientist Eugen Goldstein के द्वारा सन 1886 में किया गया था.

 

 

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