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Eid Al-Adha Bakrid Kyu Manayi Jati Hai

 

Eid Al-Adha Bakrid Kyu Manayi Jati Hai दोस्तों स्वागत है आपका मेरी वेबसाइट पर को बताने वाली हूं बकरा ईद क्यों मनाते हैं और मुसलमानों की बकरा ईद क्यों मनाई जाती है दोस्तों से शुरू की गई है इसके बारे में आज मैं आपको विस्तार से बताने वाली हूं की इस्लाम धर्म के अनुसार हजरत खुदा के बंदे थे और हजरत इब्राहिम जाफर यकीन करते हैं और पैगंबर हजरत इब्राहिम से ही कुर्बानी देने की प्रथा की गई कहा जाता है कि खुदा ने खुदा ने एक बार पैगंबर इब्राहिम से कहा था कि अपने प्यार विश्वास को साबित करने के लिए सबसे प्यारी चीज को क्या होगा जिस कारण बकरा ईद मनाई मनाई जाती है दोस्तों मैं आज आपको विस्तार से इस आर्टिकल में बताने वाली हूं बकरा ईद कब है और बकरा ईद से जुड़ी जानकारी आज मैं आपको इस आर्टिकल देने वाली हूं तो आप इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें तो दोस्तों अब मैं शुरू करती हूं Eid Al-Adha Bakrid Kyu Manayi Jati Hai

Eid Al-Adha Bakrid Kyu Manayi Jati Hai

Eid Al-Adha Bakrid Kyu Manayi Jati Hai जैसे दोस्तों ईद का चांद निकलने के बाद ही मनाई जाती है दोस्तों इस साल बकरा ईद 9 /10 तारीख माह जुलाई  को मनाई जाएगी दोस्तों बकरा ईद उल अजहा और ईद उल जुहा भी कहा जाता है दोस्तों मीठी ईद के  कुछ महीने बाद  बकरा ईद इस्लाम  धर्म के मुख्य तोहार बनाए जाते हैं Eid Al-Adha Bakrid Kyu Manayi Jati Hai और आज  त्योहार बकरा ईद में  मुख्य रूप से कुर्बानी के रूप में मनाया जाता है ईद उल फितर  जैसे ही दोस्तों मैंने आपको बताया था कि मीठी ईद के कुछ महीने बाद बकरा ईद मनाई जाती है दोस्तों इस देश मुसलमानों की लंबी कतार मैं बकरे की कुर्बानी देते हैं दोस्तों आप लोग सोच रहे होगे आखिरकार की कुर्बानी क्यों दी जाती है और केवल बकरे की ही कुर्बानी क्यों ? और आप सोच रहे होगे कि क्या अलावा अन्य जानवरों की   भी कुर्बानी दे सकते हैं क्या तो दोस्तों  बकरे की कुर्बानी देने के पीछे राज है Eid Al-Adha Bakrid Kyu Manayi Jati Hai तो दोस्तों अब जान लेते हैं बकरे की कुर्बानी के पीछे का राज और की कुर्बानी का महत्व क्यों

कुर्बानी का महत्व क्यों ?

इस्लाम के मान्यताओं के द्वारा हजरत इब्राहिम को खुदा का पैगंबर बताया गया है ताउम्र दुनिया की सबसे भलाई करने के लिए सहायता करते हैं ऑल जीवन सेवा से लेकर समाज सेवा में ही व्यतीत हुआ है परंतु दोस्तों 90 साल की उम्र तक उनकी कोई संतान नहीं हुई उन्होंने अल्लाह की इबादत की और चांद सा बेटा इस्माइल मिला  दोस्तों हजरत इब्राहिम अल्लाह से बात करा करते थे  हजरत इब्राहिम खुश होने के पश्चात एक ऐसा सपना आया इसके बारे में निम्न में समझने वाले हैं Eid Al-Adha Bakrid Kyu Manayi Jati Hai

कुछ समय के बाद हजरत इब्राहिम को सपना आया

हजरत इब्राहिम सपने में अल्लाह का यह आदेश आया  क्यों न खुदा की राह में कुर्बानी देनी है  तो दोस्तों हजरत इब्राहिम ने  सबसे पहले ऊंट की कुर्बानी दी  और इसके बाद  हजरत इब्राहिम को एक और सपना आया अपनी सबसे प्यारी चीज को कुर्बान करना था  इब्राहिम ने सभी जानवरों की  कुर्बान कर दिए लेकिन वही सपना मैं उन्हें सबसे प्यारी चीज को कुर्बान करने का आदेश हुआ  फिर  हजरत इब्राहिम ने अपने बेटे जोकि अपने सभी प्रिय जानवरों करने के बाद अल्लाह पर भरोसा रखते हुए  हजरत इब्राहिम ने अपने बेटे की स्माइल   को कुर्बान करने का निर्णय ले लिया  हजरत इब्राहिम ने अपनी पत्नी  से  अपने बेटे को  नहला कर तैयार करने को कहा हजरत इब्राहिम की पत्नी ने ऐसा ही किया इसके बाद हजरत इब्राहिम अपने बेटे को लेकर कुर्बानी के लिए चले गए और दोस्तों यह केवल अल्लाह ने अब्राहिम का इम्तिहान लेने के लिए क्या था तो दोस्तों अल्लाह ने देखा कि हजरत इब्राहिम की प्रशंसा को देखते हुए उनके बेटे के बजाय की कुर्बानी में बदल दिया  तो दोस्तों इब्राहिम के बेटे की कुर्बानी हो रही थी Eid Al-Adha Bakrid Kyu Manayi Jati Hai तब अपनी आंखों पर काली पट्टी को बांध दिया था तुरंत कुर्बानी देने के बाद  हजरत इब्राहिम ने अपनी आंखों से पट्टी को उतारा तो  इस्माइल को खेलते हुए देखा स्माइल की जगह पर बकरे की कुर्बानी हो चुकी थी तो दोस्तों तभी से ही बकरा ईद पर बकरे की कुर्बानी की परंपरा चलती आ रही है और फिर किस भरोसे और कुर्बानी से खुश होकर खुदा ने उन्हें  पैगंबर मोहम्मद बना दिया  तो दोस्तों इस्लामिक की इतिहास के अनुसार बकरे की कुर्बानी की परंपरा चली आ रही है  दोस्तों बकरे की कुर्बानी के बाद  के गोश्त को तीन भागों में बाटा जाता है दोस्तों यह मालूम चला है कि यह सलाह  शरीयत मैं दी गई थी  गोश्त एक हिस्सा गरीबों में  बाटा जाता है  गोश्त का  दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों के लिए तीसरा अपने घर के लिए रखा जाता है Eid Al-Adha Bakrid Kyu Manayi Jati Hai

क्या किया जाता है बकरा ईद के दिन

इस दिन मुस्लिम लोग कपड़े पहन कर व महिलाएं अलग-अलग प्रकार के खाने के व्यंजन बनाती है और  सुबह सवेरे उठकर नहा धोकर नए कपड़े पहना करती है  ईदगाह में ईद की नमाज को लोग जाकर अदा करते हैं  नमाज के बाद दूसरे से गले मिलकर ईद की एक दूसरे को मुबारकबाद  देते हैं उसके बाद जानवरों की कुर्बानी देना शुरू करते हैं Eid Al-Adha Bakrid Kyu Manayi Jati Hai

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रमजान क्यों मनाये जाते हैं

दोस्तों इस्लाम धर्म में रमजान के महीने में अध्यात्मिक  और शारीरिक रूप से साफ होने का महीना  माना जाता है  और दोस्तों इस रमजान के महीने में खुद  अनुशासन की सीखते हैं और इस्लाम के महीने का नौवां महीना है इसका नाम भी इस्लामिक कैलेंडर में नौवें महीने से  बना होता है जिसे अरबी भाषा में रमादान भी कहा जाता है Eid Al-Adha Bakrid Kyu Manayi Jati Hai यह महीना इस्लाम  का पाक महीना होता है  दोस्तों रमजान के महीने को भी तीन हिस्सों में बांटा गया है Eid Al-Adha Bakrid Kyu Manayi Jati Hai और कुरान  के दूसरे पारे के आयात  183 में  मुसलमानों के लिए आवश्यक जरूरी बताया गया है

रोजा क्यों रखते हैं

रमजान के महीने में रोजे को अरबी शब्द में सोम भी कहा जाता है  जिसका मतलब है रुकना   और दोस्तों रोजा रखने का मतलब है कि मन में बुराइयों को पूरी तरीके से दूर कर देना  और दोस्तों रोजे में भूखा प्यासा रहा जाता है वह दोस्तों ऐसा माना गया है कि जो व्यक्ति बुराई कर रहा है जो व्यक्ति रोजेदार  व्यक्ति के साथ खड़ा होना भी मना है तुम मुसलमान हो जाते हैं जब कोई व्यक्ति तो उनके दिल में क्यों के लिए हमदर्दी पैदा हो जाती है  जो व्यक्ति  गरीबी की वजह से समय पर खाना नहीं मिल पाता उनके लिए रोजेदारों के दिल में काफी हमदर्दी पैदा हो जाती है  रोजा रखने से रोजेदारों को काफी दबाव पहुंचता है और दोस्तों जो जकात भी इस महीने में अदा की जाती है  रोजा रखने पर हमें  काफी सारी प्रेरणा मिलती है जैसे झूठ बोलना व  बुराई , गलत कामों से बचने की प्रेरणा देता है  यह रोजे पूरे महीने चलते हैं  रमजान के महीने में मैंने यह बताया है Eid Al-Adha Bakrid Kyu Manayi Jati Hai कि  रमजान के महीने में  अल्लाह ने यह बताया है कि  रोजेदारों को  बुराइयों से बचे रहे  वह दोस्तों कुरान में अल्लाह ताला ने यह फरमाया है कि  तुम्हें रोजा इसलिए रखने को कहा गया है इसलिए की आप लोग खुदा से डरो इसका मतलब यह है कि  आपके मन में इंसानियत  कोमलता पैदा करें

रोजे रखने के कुछ जरूरी नियम

1 मोदी लगा दो देखने का मतलब यह नहीं है कि आप खाए तो कुछ ना खाए खाने के बारे में सोचते रहते के दौरान अब खाने के बारे में सोच भी नहीं सकते और खाने के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए

2 रमजान के महीने में घर में काफी बरकत होती है जिसे मौसम ए बहार (बसंत)  कहा जाता है इस महीने में अल्लाह की इबादत  करनी चाहिए

3  और कुरान पढ़ना चाहिए ओ साथी दान धर्म खाना चाहिए

4 इस्लाम के अनुसार पांच बातें के कारण रोजा टूटा हुआ माना जा सकता है जैसे बदनामी  करना या  अपने मन में लालच पैदा करना  और दूसरों की पीठ पीछे और झूठी कसम खाना   और जब आप रोजा रखते हैं  तो  यह सभी चीजें  करने पर जिससे रोजा टूटा हुआ माना जा सकता है

5 दोस्तों जब आप अल्लाह के नाम से किसी बंदे को कैसे देते हैं तो कभी कंजूसी नहीं करना चाहिए  और जो अल्लाह के नाम से पैसे दिए जाते हैं एक प्रकार से अफजल है दोस्तों  अल्लाह के नाम से किसी भी धर्म के व्यक्ति को मदद करते हैं  तो यह किसी भी प्रकार से  गलत नहीं है  और दोस्तों सहायता करना भी इबादत करना है

6  दोस्तों रोजा रखने का  मुख्य नियम है वाला मुस्लिम  व्यक्ति सूर्य उदय होने  से लेकर  सूर्यास्त तक के दौरान  कुछ ना खाए

7 जरूरतमंदों की सहायता करना

8  रोजे के वक्त महिलाओं के मन में बुरे विचार व शारीरिक संबंध  के बारे में सोचने पर पाबंदी है

9  दोस्तों सहरी  रोजे का  जरूरी हिस्सा है शहरी का मतलब यह है इफ्तार  सहरी के बाद सूर्यास्त के समय तक कुछ भी खाने पीने को मना है सूरज  डूब जाने के बाद  रोजा खोला जाता है जिसे दोस्तों इफ्तार  कहा जाता है

10  अपनी जरूरतों को कम करना दूसरों की जरूरत को गुनाह  कम करना  अच्छे काम  अवश्य करें

11  रमजान के दौरान मन को साफ रखना किसी के लिए भी अपने मन में बुरे खयालात  न लाना  और पांच वक्त की नमाज को अदा करना  कुरान को अवश्य पढ़ें

12  मोहम्मद सल्लल्लाहो वसल्लम ने फरमाया है जो व्यक्ति रोजा  खोलता  है तो उन्हें  सबके साथ मिलकर खोलना चाहिए और  आस-पड़ोस के घर मे  रोजा खोलने के लिए इफ्तार नहीं होती  है उनके घर रोजा खोलने  के लिए इफ्तारी भेजना चाहिए

रमजान  के पांच स्तंभ

दोस्तों इस्लाम के दौरान रमजान में 5 स्तंभ होते हैं  जिसमें  लोगों के लिए दान करना व  पुण्य कमाना और sबाब  कमाना  और दोस्तों इस्लाम में पांच अन्य  स्तंभ शामिल है  जैसे नमाज अदा करना और अल्लाह पर विश्वास रखना दूसरों की सहायता करना , हज करना यह सभी चीजें शामिल ह और  दोस्तों अब यह जान लेते कि शिया और सुन्नी रोजा कैसे खोला करते हैं जो कि मैंने आपको निम्न में बताया है

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शिया और सुन्नी रोजा कैसे खोलते हैं

दोस्तों शिया और सुन्नी कि रोजा खोलने के तरीके जैसे  है इसमें किसी भी प्रकार  का फर्क नहीं है  जैसे कि सुननी अपना रोजा  पर खोलते हैं यानी कि उस वक्त सूरज पूरी तरीके से जाता है और वही सिया लोग आकाश में पूरी तरीके से अंधेरा होने के बाद अपना रोजा इफ्तार करते हैं Eid Al-Adha Bakrid Kyu Manayi Jati Hai

रोजे की परंपराएं

पश्चिमी एशिया में जान के महीने मैं चौथा दिन को के तरीके पर मनाया जाता है और इसी हर बच्चा पारंपरिक  वस्त्र  को धारण करता है   आसपास के घरों में जाकर गारांगाओ गीत गाया करते हैं और साथ ही खजूर इसकी जैसी चीजें अपने पास जमा करते थे

रमजान के महीने में  जरूरतमंदों की सहायता करना

दोस्तों रमजान का महीना काफी अध्यात्मिक और  पवित्र के रूप में  देखा जाता है इसी दौरान अनुशासित व्यवहार करने के लिए  प्रोत्साहित क्या जाता है रोजे रखने का यही मकसद है कि हर मुस्लिम लोगों को यह है याद दिलाना कि गरीबों और जरूरतमंदों के प्रति अपने मन में अच्छा स्वभाव रखना

रमजान के महीने में लोगों को रोजे की मिलती है छूट

इस्लाम के महीने 5 फर्ज  जरूरी माना गया है  हर मुस्लिम  व्यक्ति को  ईमान  रखना होगा और दोस्तों उन लोगों के लिए रोजा रखने पर छूट मिली है जो व्यक्ति बीमार है यात्री करता है वह महिला जो अपने शिशु को दूध पिलाती है  इन लोगों को छूट मिली हुई है परंतु  यह ध्यान रखें की  उन्हें  साल के आने वाले महीनों में उसकी कजा जरूरी मानी गई है  इसके बाद दोस्तों वे लोग  अपना रोजा रख सकते हैं Eid Al-Adha Bakrid Kyu Manayi Jati Hai

आखिरी शब्द

दोस्तों आज हमने सीखा बकरा ईद क्यों मनाई जाती है बकरा ईद का इतिहास और बकरा ईद से जुड़े तथ्यों के बारे में हमने समझा दोस्तों उम्मीद करती हूं आपको यह लेख अच्छे से समझ आ चुका होगा और दोस्तों आपको यह लेख पसंद आया है अपने रिश्तेदारों और दोस्तों तक जरूर शेयर करें और मेरी वेबसाइट का नाम ना भूले jugadme इस वेबसाइट के जरिए मैं आपको टॉपिक के बारे में बताती रहूंगी  और दोस्तों ऐसे ही सपोर्ट करते रहे  और मैं आपके लिए ऐसे ही नई जानकारियां अवश्य लाऊंगी

धन्यवाद

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Mahima singh
Mahima singh
2 months ago

Best mam

Shehnaaz
Shehnaaz
2 months ago

Gud knowledge

Hamzaali
Hamzaali
2 months ago

Mashallah dear