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GST kya hai or registration kaise kare 

GST kya hai दोस्तों आज हम आपको GST क्या है और कैसे रजिस्ट्रेशन कैसे करे आपको इस पोस्ट के माध्यम से आपको बतायेगे और दोस्तों हमने यह पोस्ट काफी सरल भाषा में लिखा है और साथ ही आपको यह पोस्ट आसानी से समझ आ जाएगी। चलिए शुरू करते है अब जानेगे की GST क्या है और रजिस्ट्रेशन कैसे करे और आज हम आपको इससे जुडी जानकारी आपको देंगे।

GST kya hai or registration kaise kare 

GST kya hai आज के समय में देशभर में एकसमान टैक्स के लिए GST लागू हुए करीब 4 साल होने को हैं। लेकिन अभी भी कई ऐसे मामले सामने आ रहे है जिनमे GST के नाम पर ग्राहकों को नकली बिल दिया जा रहा है। कई मामलों मे यह भी सामने आया है कि कुछ दुकानदार GSTIN यानी जीएसटी आईडेंटिफिकेशन नंबर की जगह अपने बिल पर VAT/TIN और सेंट्रल सेल्स टैक्स नंबर्स दिखा रहे हैं और सेंट्रल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (CGST) और स्टेट गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (SGST) चार्ज कर रहे हैं। किसी भी बिजनेस में ग्राहकों को दिए गए बिल पर GSTIN दिखाना अनिवार्य है। वे बिल पर VAT, TIN या सर्विस टैक्स रजिस्ट्रेशन नंबर दिखाकर GST नहीं वसूल सकते। आपको बता दें की सभी दुकानदारों और व्यवसायों के लिए अभी जरूरी नहीं है कि वो GST के लिए रजिस्टर्ड हों और GSTIN नंबर प्राप्त करें।GST kya hai

छोटा बिजनेस जिनका सलाना टर्नओवर 20 लाख रुपए से कम है, उन्हें जीएसटी के लिए रजिस्टर्ड नहीं करना होगा। वहीं, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और नॉर्थ-ईस्ट के सभी राज्यों में यह सीमा 10 लाख रुपये है। लेकिन जिस बिल में GST लगेगा उसके लिए दुकानदारों और व्यवसायियों को सामान पर लगने वाले टैक्स को सेंट्रल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (CGST) और स्टेट गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (SGST) में बांटकर बिल में दिखाना होगा।

GST kya hai 

जीएसटी का Full Form होता है- Goods And Services Tax । हिन्दी में इसका अर्थ होता है- माल एवं सेवा कर। इसे, वस्तुओं की खरीदारी करने पर या सेवाओं का इस्तेमाल करने पर चुकाना पड़ता है। GST kya hai पहले मौजूद कई तरह के टैक्सों (Excise Duty, VAT, Entry Tax, Service Tax वगैरह ) को हटाकर, उनकी जगह पर एक टैक्स GST लाया गया है। भारत में इसे 1 जुलाई 2017 से लागू किया गया है।

जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कैसे कराएं

जीएसटी का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए आप Goods and Services Tax Network (GSTN) की ओर से शुरू किए कए GST Portal की सहयता ले सकते हैं। इसके लिए www.gst.gov.in के वेब एड्रेस पर क्लिक करें इसमें Registration के लिए मांगी गई जानकारियों को भर दें। इसे आपके Email या SMS से कन्फर्मेंशन किया जाएगा। इसके बाद आपके पास एक Acknowledgement Number भेज दिया जाएगा। GST kya hai जैसे ही आपका अप्लाई कन्फर्म होता है GSTIN जेनरेट करके भेज दिया जाता है। साथ में provisional Login ID and password भी जिनका प्रयोग करके आप जीएसटी पोर्टल में Log In कर सकते हैं।

किसे रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य

अगर आपकी कुल Taxable, NonTaxableऔर Exempted  Income कुल मिलाकर 50 लाख रुपए सालाना से अधिक बैठती है तो GSTN में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है। पूर्वोत्तर भारत के राज्यों के व्यापारियों के लिए Income की यह सीमा 20 लाख रुपए है। हालांकि इस सीमा को बढाने की छूट भी राज्य सरकारों के पास है।GST kya hai

जीएसटी लागू करने की जरूरत क्यों पड़ी?

भारतीय संविधान में Tax संबंधी जो पुराने नियम थे, उनमें वस्तुओं के उत्पादन (Production/Manufacturing) और सेवाओं पर टैक्स लगाने का अधिकार केंद्र सरकार (Central Government) के पास था। जबकि,वस्तुओं की बिक्री (Sale) पर टैक्स लगाने का अधिकार राज्य सरकारों (State Government) को दिया गया था। GST kya hai

सबने अपने-अपने हिसाब से Tax बनाए और Categories तय कर दीं। इसी चक्कर में एक-एक सामान पर कई-कई Tax लद गए। कभी-कभी तो टैक्स के उपर Tax के हालात भी बन गए। छोटे व्यापारियों और कंपनियाें के लिए, इनके  नियम-कानूनों से निपटना काफी कठिन काम था।

इन संगतियों को दूर करने के लिए GST को ऐसे एक कानून के रूप में लाया गया है, ​जो माल एवं सेवा दोनों पर लग सके। और, जिसे Production से लेकर Sale तक लगाया जा सके।

सामान्य लोगों के लिए फायदे

वस्तुओं पर तरह-तरह के Tax से छुटकारा मिल गया है। टैक्स के उपर Tax खत्म होने से वस्तुओं की लागत में बढ़ोतरी नहीं हो पाती। इससे सामान्य उपभोक्ता के यह फायदे की स्थिति है।

जीवन के लिए  काफी ज्यादा जरूरी चीजों पर Tax के Rate कम रखे गए हैं। इससे सामान्य लोगों के ज्यादा काम आने वाली चीजें सस्ते में मिल सकेंगी। गरीब और कम आमदनी वाले लोगों को चैन मिलेगा।

कारोबार का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा GST के दायरे में आ जाने से सरकार की आमदनी बढ़ेगी। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन जैसी आम लोगों की सुविधाओं में सुधार के लिए उपयोग  किया जा सकेगा।

व्यवसायियों के लिए फायदे

हर राज्य में Taxes का अलग-अलग  होने से, सामान कारोबारियों के लिए, उसे समझना सरल नहीं था। तरह-तरह की चुं​गियां अलग से बोझ को बढ़ाती थी। टैक्स अधिकारी और कर्मचारी भी नियमों की का गलत फायदा उठाते थे। अब कारोबारियों को इन मुश्किलों से नहीं गुजरना पड़ेगा। कारोबार आसान और तेज गति से होगा। GST kya hai इससे आखिरकार, फायदे की मात्रा भी बढ़ेगी। GST सिस्टम में कारोबार संबंधी सारे Documents ऑनलाइन होते हैं। इससे, तथ्यों को तोड़-मरोड़कर सामने लाया जा सकता है  किसी तरह की गलती होने पर या Document खो जाने पर उसे Online  ही सुधारने की सुविधा होगी। कारोबारियों के बिना वजह , दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

लघु उद्योगों और उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए, केंद्र व राज्य सरकारें रियायत देती हैं। इसका फायदा उठाने के लिए बड़े कारोबारी भी अपने बड़े उद्यम को ही कई छोटे-छोटे हिस्सों में करके दिखाते थे। GST सिस्टम में, इसकी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। कंपनियां ज्यादा सस्ता और प्रतियोगी माल बना सकेंगी। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में टक्कर देने लायक माल बनाया जा सकेगा।

चार नामों से वसूला जाता है जीएसटी |

जीएसटी वैसे तो एक ही टैक्स होता है, लेकिन, इसे चार अलग-अलग नामों से लिया जाता है-

 (CGST)| Central Goods and Service Tax

अगर कोई सौदा (लेन-देन) एक ही राज्य के दो पक्षों (कारोबारियों) के बीच हो रहा हो तो केंद्र सरकार के हिस्से के रूप में CGST को चुकाना पड़ता है।

 (SGST)| State Goods and Service Tax

अगर कोई आदान प्रदान एक ही राज्य के दो पक्षों (कारोबारियों) के बीच हो रहा हो तो, उस राज्य सरकार के हिस्से के रूप में SGST चुकाना पड़ता है।

यूनियन टेरेटरी गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (UTGST/UGST)| Union Territory Goods and Service Tax

अगर कोई आदान प्रदान किसी केंद्र शासित राज्य (UT) के दो पक्षों (कारोबारियों) के बीच हो रहा हो तो, उस केंद्र शासित राज्य के हिस्से के रूप में UTGST चुकाना पड़ता है। इसी को UTGST भी कहते हैं।

 (IGST)| Integrated Goods and Service Tax

दो अलग-अलग राज्यों के कारोबारियों के बीच हो रहा हो तो, केंद्र सरकार और राज्य सरकार, दोनों का हिस्सा, एकसाथ IGST के रूप में चुकाना पड़ता है। इसे अकेले केंद्र सरकार के पास जमा किया जाता है। बाद में केंद्र सरकार की ओर से, राज्य सरकार के हिस्से का टैक्स भेज दिया जाता है। IGST में हिस्सा उस राज्य को मिलता है, GST kya hai

CGST क्या है

केंद्रीय वस्तु और सेवा कर वस्तुओं और सेवाओं की इंट्रास्टेट (राज्य के भीतर) सप्लाई पर लागू होता है। केंद्र सरकार इस पर टैक्स लगाती है। CGST अधिनियम इस प्रकार के GST को नियंत्रित करता है। यहाँ CGST से उत्पन्न राजस्व को SGST के साथ एकत्र किया जाता है और इसे केंद्र और राज्य सरकार के बीच बांटा जाता है  उदाहरण के लिए, जब कोई व्यापारी राज्य के भीतर लेनदेन करता है, तो माल पर SGST और CGST के साथ कर लगता है। GST की दर SGST और CGST के बीच समान रूप से विभाजित है, जबकि CGST के तहत एकत्रित किया गया राजस्व केंद्र सरकार का है।

CGST की दरें

माल                                                                                  CGST

आम खाद्य सामान जैसे चाय, नमक, मसाले, चीनी, आदि।        2.5%

प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ                                                               6%

इलेक्ट्रॉनिक सामान                                                              9%

कैपिटल गुड्ज़, प्रसाधन सामग्री, आदि।                                14%

IGST क्या है

इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स एक प्रकार का GST है, जहाँ टैक्स माल और सेवाओं की इन्टरस्टेट सप्लाई पर लागू होता है। यह GST आयात और निर्यात की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं पर भी लगाया जाता है। IGST अधिनियम इसे नियंत्रित करता है, और केंद्र सरकार IGST के संग्रह के लिए जिम्मेदार है। GST kya hai

एक IGST को समान रूप से केंद्र और राज्य सरकार के भागों में विभाजित किया जाता है। IGST का राज्य भाग उस राज्य को दिया जाता है GST kya hai जहाँ माल और सेवाएँ प्राप्त होती हैं और बचा हुआ IGST केंद्र सरकार के पास जाता है।

उदाहरण के लिए, जब व्यापारी दो राज्यों के बीच सप्लाई करता है, तो इस मामले में IGST लगेगा।

IGST की दरें

माल                                                                                IGST

आम खाद्य सामान जैसे चाय, नमक, मसाले, चीनी, आदि।       5%

प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ                                                           12%

इलेक्ट्रॉनिक सामान                                                          18%

कैपिटल गुड्ज़, प्रसाधन सामग्री, आदि।                              28%

UGST क्या है

केंद्र शासित प्रदेश माल और सेवा कर केंद्र शासित प्रदेशों में वस्तुओं और सेवाओं पर लगाया जाने वाला एक प्रकार का GST है। GST kya hai यह SGST के समान है लेकिन केवल केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू होता है।

UGST दादर, नगर हवेली, चंडीगढ़, अंडमान और निकोबार के साथ-साथ पुडुचेरी और दिल्ली में लागू है। यहाँ सरकार जरिये एकत्रित किया गया राजस्व केंद्र शासित प्रदेश सरकार का है। चूंकि UGST एसजीएसटी के लिए एक प्रतिस्थापन (रिप्लेसमेंट) है, इसलिए उन्हें CGST के साथ एकत्र किया जाता है।

जीएसटी की प्रमुख विशेषताएं

देश में मौजूद पुराने टैक्स सिस्टम की खामियां दुर करने के लिए, ही सरकार ने GST लागू किया। जुलाई 2017 से लागू इस नए टैक्स सिस्टम की प्रमुख मुख्यता इस प्रकार हैं—

उत्पादन की बजाय उपभोग पर टैक्स |

GST सिस्टम में, टैक्स की वसूली तब लेते है, जब कोई सामान  (goods) या सेवा (service) को बेचा जाता है। वस्तु या सेवा की अंतिम कीमत में उस पर निर्धारित GST टैक्स भी शामिल होता है। वस्तु या सेवा की सप्लाई देने वाला (seller), इसे सप्लाई लेने वाले (Consumer) से वसूलता है। बाद में इसे सरकार के खाते मे जमा कर देता है। GST kya hai मतलब यह कि, GST की वसूली की जिम्मेदारी सामान या service देने वाले पर होती है। किसी वस्तु या सेवा के साथ, जितनी बार खरीद-बिक्री की प्रक्रिया होगी, हर बार GST चुकाना होता है।

इनपुट क्रेडिट सिस्टम से टैक्स वापसी 

किसी वस्तु के उत्पादन से लेकर, अंतिम ग्राहक के हाथ पहुंचने तक कई बार खरीदे-बेचे जाने की प्रक्रिया होती है। अब चूंकि, GST  सिस्टम में, हर खरीद-बिक्री पर टैक्स चुकाना पड़ता है। ऐसे में, वस्तु, अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचने तक बहुत महंगी हो जानी चाहिए। लेकिन ऐसा होता नहीं है। क्योंकि इसमें Input Credit System लागू होता है। इस सिस्टम में, आ​खिरी स्टेज पर टैक्स लगने से पहले जहां-जहां Tax जमा किया गया है,उसको वापस पाने की भी व्यवस्था है। अगर आप अंतिम या वास्त​विक ग्राहक नहीं हैं और पहले के किसी Stage में आपने GST जीएसटी जमा किया है तो उसके बदले आपको Credits मिलते हैं। इन Credits का इस्तेमाल आप, सरकार को GST भुगतान के लिए कर सकते हैं। हर महीने GST रिटर्न भरने के दौरान आप Tax Credit System के माध्यम से अपना GST एडजस्ट करा सकते हैं। GST kya hai ये Tax Credit System क्या है, इसको अलग से हमने Example के साथ नीचे समझाया है।

Production और Sale का अलग-अलग पेंच खत्म करने के ​लिए GST का सिर्फ एक आधार तय कर दिया गया, Supply। इसके लिए बाकायदा Tax कानूनों में बदलाव किया गया  और संसद में  संविधान संशोधन (Constitution (Amendment) की प्रक्रिया अपनाई गई।

टैक्स पर टैक्स नहीं चढ़ेगा |

GST के पहले जो टैक्स व्यवस्था लागू थी, उसमें न सिर्फ एक वस्तु पर, कई अलग-अलग Tax लगते थे, बल्कि कई मामलों में, टैक्स के ऊपर Tax  भी लग जाते थे। ऐसा इसलिए होता था, क्योंकि बहुत सी वस्तुएं दो या दो से अधिक तरह की  Categories में आ जाती थीं। अब ये दिक्कत खत्म हो गई है। क्योंकि अब GST अंतिम रूप से Consumer को ही अदा करना है। बीच में अगर किसी को GST चुकाना पड़ा है तो, उसका पैसा टैक्स क्रेडिट सिस्टम से Adjust हो जाता है।

पूरी तरह ऑनलाइन सिस्टम | पकड़ में आएगी गड़बड़ी

GST सिस्टम में सारे सौदों की जानकारी Online अपडेट रखनी है। हर सौदे की रसीद, सप्लाई लेने वाले और सप्लाई देने वाले, दोनों के पास रहेगी। दोनों  अपनी-अपनी रसीदों की मदद से Tax Credit पा सकेंगे। सौदों का ​मिलान न हुआ तो Online ही गडबड़ी पकड़ में आ जाएगी। हर स्टेज पर  GST जमा होने की ​जिम्मेदारी  उपर वाले कारोबारी की होने से Tax भुगतान की चेन नहीं टूटेगी। क्योंकि कोई भी कारोबारी अपने Credit का नुकसान नहीं करना चाहेगा।

टैक्स रेट पर मनमानी नहीं |

पहले के टैक्स सिस्टम में. राज्य सरकारें अपने यहां ​बिकने वाले सामान पर अपनी मर्जी से Tax लगा देती थीं। इसका Rate भी अपने-अपने हिसाब से तय करती थीं। अब ऐसा नहीं होगा। GST के रेट में किसी तरह के बदलाव के लिए जीएसटी परिषद (GST Council) बनाई गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री (Central Finance Minister) इस परिषद के अध्यक्ष होंगे। सभी राज्यों के वित्त मंत्री भी इसके सदस्य होंगे। जीएसटी काउंसिल के किसी किसी फैसले पर, केंद्र के पास एक तिहाई शक्ति Vote की शक्ति होगी, और दो-तिहाई शक्ति राज्य सरकारों के पास होगी। हर राज्य की Voting Power बराबर होगी। परिषद के किसी भी फैसले को मंजूरी मिलने के लिए उसे Council के तीन चौथाई Votes की जरूरत होगी। GST kya hai

पहले के टैक्स सिस्टम में क्या थी खामी

जुलाई 2017 के पहले, देश और राज्यों में जो टैक्स सिस्टम लागू था, उसमें कारोबारियों को कई तरह के टैक्सों से गुजरना पड़ता था। उदाहरण के लिए जैसे ही माल Factory से निकलता था, सबसे पहले उस पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) चुकाना पड़ता था। कई सामानों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Additional Excise Duty), अलग से लगता था। वही माल अगर एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजा जा रहा है तो राज्य में घुसते ही Entry Tax लगता था। इसके बाद जगह-जगह चुंगियां अलग से। माल बेचते समय, Sales Tax या VAT चुकाना पड़ता था। कई मामलों में Purchase Tax भी लगता था। अगर कोई सामान विलासिता (Luxury) की श्रेणी में आता  है तो Luxury Tax  अलग से चुकाना पड़ता था। वह सामान अगर किसी होटल या रेस्टोरेंट आदि में उपलब्ध कराया जा रहा हो तो Service Tax अलग से देना पड़ता था। इस प्रकार हम देखते हैं कि, फैक्टरी से लेकर उपभोक्ता (Consumer) के हाथों में पहुंचने तक किसी सामान या सेवा को कई तरह की Duties या Taxes से गुजरना पड़ता था।GST kya hai GST लागू करके कारोबारियों को Taxes के इस मकड़जाल से बचाने की कोशिश की गई है।


दोस्तों उम्मीद है आपको यह हमारी पोस्ट पसंद आयी होगी और आपको हमने इससे जुडी पूरी जानकरी आपको दी है यकीन है आपको सब अच्छी तरह समझ आ चूका होगा और दोस्तों अपने यह हमारी यह पोस्ट को पूरा पढ़ा तो यह जानकारी अपने दोस्तों तक जरूर पहुचाये और ऐसे हम फिर मिलते है एक और नयी जानकारी के साथ।

धन्यवाद


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