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Holi puja vidhi -2022

Holi puja vidhi दोस्तों, आपका हमारी jugadme.in की वेबसाइट स्वागत है।  हम आपके लिए महत्वपूर्ण आर्टिकल लेकर आये है आपको यह जानना चाहते है तो आप सही वेबसाइट पर आये है तो आपको हम बतायेगे की होली पूजा विधि काफी लोगो को यह पूजा करने नहीं आती होगी तो आपको हम आज बतायेगे और आप ध्यानपूर्वक पढ़े और दोस्तों यह त्यौहार भारतीय हिन्दुओ के साथ साथ कुछ ऐसे  देश है Holi puja vidhi जिसमे होली का त्यौहार काफी जोर -शोर से खेली जाती है जैसे ऑस्टेलिया , स्पेन , इटली ,रोम जैसे जगहों में यह पर्व मनाया जाता है और होली 17 या 18 मार्च 2022 में होली आने वाली है तो दोस्तों हम आपको बतायेगे होली पूजा कैसे करनी है तो बिना वक़्त गुजारे शुरू करते है।

Holi puja vidhi -2022

Holi puja vidhi  होली  2022: होली हिन्दुओ का धर्म का  प्रमुख त्योहारों में से एक है. यह त्योहार फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के अगले दिन अच्छे से मानाया जाता है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होली का दहन मानाया जाता है।Holi puja vidhi इसे बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक माना जाता है।  होली का दहन इस बार 17 मार्च को मनाया जाएगा और होली 18 मार्च को मनाई जाएगी। होली से 8 दिन पहले यानि 10 मार्च से होलाष्टक लग जाएगा. होलाष्टक के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। साल 2022 में होली कब है और होलिका दहन का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि बता रहे है।

होली का पहला दिन

पहले दिन को छोटी होली कहा जाता है।  जिस दिन होलिका दहन (Holi 2022 Date) होता है। इस दिन लोग होली की पूजा-अर्चना करते हैं और उसे आग में भस्म कर देते हैं.

होली का दूसरा दिन

दूसरे दिन को रंग वाली होली कहा जाता है. इस दिन सूखे गुलाल और पानी के रंगों से होली खेली जाती है. इसके अलावा होली से 8 दिन पहले होलाष्टक लग जाता है। ऐसे में 10 मार्च से होलाष्टक लगेगा। इस दौरान कोई भी मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन, सगाई, गृह प्रवेश आदि नहीं किए जाते हैं. कहा जाता है Holi puja vidhi कि फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक शुरू होता है। होली के पहले दिन, सूर्यास्त के पश्चात, होलिका की पूजा कर जलाया जाता है. मान्यता है कि होलिका पूजा का मुहूर्त महत्वपूर्ण होता है।

होली का दहन का शुभ मुहूर्त

होली का दहन 17 मार्च, गुरुवार के दिन मनाई जाएगी।  पंचांग के अनुसार होली का दहन के लिए शुभ मुहूर्त रात 9 बजकर 20 मिनट से लेकर रात 10 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। होली का दहन के लिए कुल 1 घंटा 10 मिनट का समय मिलेगा।

होलिका दहन पूजा सामग्री
  1. अक्षत
  2. अगरबत्ती और धूप
  3. फूल
  4. कच्चा सूती धागा
  5. हल्दी  के टुकड़े
  6. मूंग की अखंड दाल
  7. बताशा
  8. गुलाल पाउडर
  9. नारियल
  10. नया अनाज जैसे गेहूं
  11.  एक कटोरी पानी
  12. गाय के गोबर से बनी माला
  13.  रोली

Holi puja vidhi 2022 होलिका पूजा-विधि 

शास्त्रों में होली का दहन से पहले पूजा का विधान बता रहे है। Holi puja vidhi आप ध्यानपूर्वक पढ़े।  इसके लिए शौच आदि से निवृत होकर स्नान करे लें। इसके बाद होली की पूजा वाले स्थान पर पूरब या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाएं. फिर पूजन में गाय के गोबर से होलिका और प्रह्लाद की प्रतिमाएं बनाएं। पूजन सामग्री के लिए फूलों की माला, रोली, गंध, पुष्प, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल, पांच या सात प्रकार के अनाज, नई गेहूं और अन्य फसलों की बालियां और साथ में एक लोटा जल इत्यादि की व्यवस्था कर लें।  इसके बाद इन पूजन सामग्रियों से होली का  दहन की पूजा करें। फिर बड़ी-फूलौरी, मीठे पकवान, मिठाईयां, फल आदि भी अर्पित करें। साथ ही भगवान नरसिंह की भी पूजा करें।  होलिका  के चारों ओर सात परिक्रमा करें। Holi puja vidhi 

होली मनाने के पीछे की पौराणिक कथा

होली मनाने के पीछे शास्त्रों में कई पौराणिक कथा दी गई है। लेकिन इन सबमें सबसे ज्यादा भक्त प्रहलाद और हिरण्यकश्यप की कहानी प्रचलित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा को बुराई पर अच्छाई की जीत को याद करते हुए होलिका दहन किया जाता है।

कथा के अनुसार, असुर हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था, लेकिन यह बात हिरण्यकश्यप को बिल्कुल अच्छी नहीं लगती थी। बालक प्रह्लाद को भगवान की भक्ति से विमुख करने का कार्य उसने अपनी बहन होलिका को सौंपा जिसके पास वरदान था कि अग्नि उसके शरीर को जला नहीं सकती। Holi puja vidhi भक्तराज प्रह्लाद को मारने के उद्देश्य से होलिका उन्हें अपनी गोद में लेकर अग्नि में प्रविष्ट हो गयी, लेकिन प्रह्लाद की भक्ति के प्रताप और भगवान की कृपा के फलस्वरूप खुद होलिका ही आग में जल गई। अग्नि में प्रह्लाद के शरीर को कोई नुकसान नहीं हुआ। इस प्रकार होली का यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है।

गोबर के कंडों की होलिका श्रेष्ठ

होलिका दहन के लिए गोबर के कंडों की होलिका श्रेष्ठ रहती है। Holi puja vidhi डामर वाली सड़क पर सीधे होलिका दहन अनुचित है। कच्ची जमीन या चौराहों पर ईंट बिछाकर होलिका दहन करना चाहिए। इससे डामरीकृत सड़क होलिका की गर्मी से खराब नहीं होगी।

दोस्तों , हमने आपको अपनी वेबसाइट के माध्यम से बताया है उम्मीद है आपको अच्छे से समझ आ चूका होगा की यह होली की पूजा विधि आपको अच्छे से समझ आ गयी होगी तो आप हमें कमेंट बॉक्स में बताये और साथ आपको और नयी जानकारी चाहिए तो आप हमें कमेंट में बताये और दोस्तों आप यह हमारी पोस्ट को अपने दोस्तों तक जरूर पहुचाये। और ऐसे ही हम आपके लिए नयी नयी महत्वपूर्ण जानकारी लेकर आएंगे

धन्यवाद


 

Q. होलिका कौन थी

सतयुग में महर्षि कश्यप की कई पत्नियाँ थी जिनमें से एक दिति भी थी। दिति के गर्भ से ही जन्में बच्चों को दैत्यों की संज्ञा दी गयी थी। उसकी कोख से मुख्यतया दो बालक व एक बालिका का जन्म हुआ था जिनके नाम  हिरण्यकश्यप हिरण्याक्ष व होलिका था।

 Q. होलिका की मृत्यु कैसे हुई?

उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान हरि का भक्त था और उसी को मारने के लिए हिरण्यकश्‍यप ने अपनी बहन होलिका को उसकी गोद में अग्नि कुंड में बैठाया था। होलिका को वरदान था कि आग से वह नहीं जलेंगी। होलिका भक्त प्रह्लाद को अग्निकुंड में लेकर बैठ गई। जिसमें होलिका आग में भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद को भगवान विष्णु ने बचा लिया।

Q. होलिका क्यों जल गई?

उनमें बताया गया है कि होलिका को वरदान था कि जब वह अकेली आग में बैठेगी तभी वह नहीं जलेगी और अगर किसी और के साथ बैठी तो वरदान निष्फल हो जाएगा। उस दिन वह प्रह्लाद के साथ बैठी थी इसलिए वह जल गई। यही वजह रही कि आग में बैठने वाले प्रह्लाद को तो भगवान विष्णु ने बचा लिया लेकिन होलिका जलकर खाख हो गई।

Q. त्यौहार होली के पीछे की कहानी किससे संबंधित है?
A. राधा और कृष्ण
B. शिव और पार्वती
C. होलिका और प्रहलाद
D. उपरोक्त में से कोई नहीं

Ans : होलिका का प्रहलाद  


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