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Lahore Adhiveshan In Hindi 

Lahore Adhiveshan Kya Hai हेल्लो दोस्तों welcome back to my website आज हम आपको mostly important information लेकर आये है दोस्तों  जोकि आज का topic है Lahore Adhiveshan Kya Hai लाहौर अधिवेशन कब हुआ ,1929 का कांग्रेस अधिवेशन कहां हुआ ,कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की? , लाहौर अधिवेशन में किस की मांग की गई ,1929 लाहौर अधिवेशन में भारतीय तिरंगा का विरोध करने वाले लोग कौन थे , स्वराज की मांग कब की गई ,कांग्रेस के किस अधिवेशन में पूर्ण स्वराज की मांग की गई थी ,स्वराज की मांग किसने की थी दोस्तों ज्यादातर लोग पुरातत्व की चीजे और पुराने लोग तथा इतिहास की बाते जानने के लिए काफी उत्सुक होते है। इसी कारण में आपको लाहौर अधिवेशन जोकि कांग्रेस द्वारा 31 दिसंबर 1929 पूर्ण स्वराज की मांग के लिए यह अधिवेशन चलाया गया था। दोस्तों आपको इसके विस्तार से all information आपको  देंगे आप end तक इस आर्टिकल को पढ़े।





Lahore Adhiveshan In Hindi 

31 दिसम्बर 1929 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन तत्कालीन पंजाब प्रांत की राजधानी लाहौर में हुआ। और  इस ऐतिहासिक अधिवेशन में कांग्रेस के ‘पूर्ण स्वराज’ का घोषणा-पत्र तैयार किया गया था।  तथा ‘पूर्ण स्वराज’ को कांग्रेस का मुख्य लक्ष्य घोषित किया। जवाहरलाल नेहरू, इस अधिवेशन के अध्यक्ष चुने गये।

Lahore Adhiveshan Kya Hai

अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू ने अपने प्रेरक अध्यक्षीय भाषण में कहा की विदेशी शासन से अपने देश को मुक्त कराने के लिये अब हमें खुला विद्रोह करना है, और सहयोगी आप लोग और राष्ट्र के सभी नागरिक इसमें हाथ बढ़ाने के लिए आमंत्रित है। Lahore Adhiveshan Kya Hai नेहरू ने यह बात भी स्पष्ट कर दी कि मुक्ति का तात्पर्य सिर्फ विदेशी शासन को उखाड़ फेंकना भर नहीं है। Lahore Adhiveshan Kya Hai  उन्होंने कहा “मुझे स्पष्ट स्वीकार कर लेना चाहिए कि मैं एक समाजवादी और रिपब्लिकन हूं। मेरा राजाओं और महाराजाओं में विश्वास नहीं है, न ही मैं उस उद्योग में विश्वास रखता हूं जो राजे-महाराजे पैदा करते हैं, और जो पुराने राजों-महाराजों से अधिक जनता की जिन्दगी और भाग्य को नियंत्रित करते हैं और जो पुराने राजों-महाराजों और सामंतों के लूटपाट और शोषण का तरीका अधिकार करते हैं

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लाहौर अधिवेशन में पास किये गये प्रस्ताव की प्रमुख मांगें इस प्रकार थीं-

  • गोलमेज सम्मेलन का बहिष्कार किया जायेगा।
  • पूर्ण स्वराज्य को कांग्रेस ने अपना मुख्य लक्ष्य घोषित किया।
  • कांग्रेस कार्यसमिति को सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ करने का पूर्ण उत्तरदायित्व सौंपा गया, जिनमे करो (टेक्स ) का भुगतान नहीं करने जैसे कार्यक्रम सम्मिलित थे।
  • सभी कांग्रेस सदस्यों को भविष्य में परिषद् के चुनावों में भाग न लेने तथा परिषद् के  मौजूदा सदस्यों को अपने पदों से त्यागपत्र देने का आदेश दिया गया।
  • 26 जनवरी 1930 का दिन पूरे राष्ट्र में प्रथम स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने का निश्चय किया गया।
  • 31 दिसम्बर 1929 की अर्द्धरात्रि को ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारों के बीच रावी नदी के तट पर भारतीय स्वतंत्रता का प्रतीक तिरंगा झंडा फहराया गया। इसके बाद 26 जनवरी 1930 को पूरे राष्ट्र में जगह-जगह सभाओं का आयोजन किया गया, जिनमें सभी लोगों ने सामूहिक रूप से स्वतंत्रता प्राप्त करने की शपथ ली। इस कार्यक्रम को अभूतपूर्व सफलता मिली। गांवों तथा कस्बों में सभाए आयोजित किरी गयी। जहां स्वतंत्रता की शपथ को स्थानीय भाषा में पढ़ा गया तथा तिरंगा झंडा फहराया गया।

कांग्रेस का कलकत्ता अधिवेशन, 1928

1928 में कांग्रेस का अधिवेशन कलकत्ता में मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में हुआ। कलकत्ता अधिवेशन में नेहरु रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया गया, लेकिन कांग्रेस के युवा नेतृत्व (जवाहरलाल नेहरु, सुभाष चन्द्र बोस एवं सत्यमूर्ति) ने डोमिनियन स्टेट्स (औपनिवेशिक स्वराज्य) को कांग्रेस द्वारा अपना मुख्य लक्ष्य घोषित किये जाने पर असंतोष व्यक्त किया। डोमिनियन स्टेट्स (औपनिवेशिक स्वराज्य) के स्थान पर उन्होंने मांग की कि ‘पूर्ण स्वराज्य’ या ‘पूर्ण स्वतंत्रता’ को कांग्रेस अपना लक्ष्य घोषित करें। इस दौरान इस अवसर पर महात्मा गांधी तथा मोतीलाल नेहरू जैसे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता का मत था कि डोमीनियन स्टेट्स की मांग को इतनी जल्दबाजी में अस्वीकार नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि इस पर आम सहमति बड़ी मुश्किल से बन सकी है। उन्होंने सुझाव दिया कि डोमिनियन स्टेट्स (औपनिवेशिक स्वराज्य)  की मांग को मानने के लिये सरकार को 2 वर्ष  का समय दिया जाना चाहिए। बाद में युवा नेताओं के दबाव के कारण मोहलत की अवधि 2 वर्ष से घटाकर 1 वर्ष कर दी गयी।  Lahore Adhiveshan Kya Hai  कांग्रेस ने कलकत्ता अधिवेशन,1928 में यह प्रतिबद्धता जाहिर की कि डोमिनियन स्टेट्स पर आधारित संविधान को सरकार ने अगर 1 वर्ष के अंदर पेश नहीं किया तो कांग्रेस ‘पूर्ण स्वराज्य’ को अपना लक्ष्य घोषित करेगी और  साथ ही इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु वह सविनय अवज्ञा आंदोलन भी प्रारंभ करेगी।

1929 की राजनीतिक घटनायें

जनता को प्रत्यक्ष राजनीतिक संघर्ष के लिये तैयार करने हेतु वर्ष 1929 में गांधीजी ने पूरे देश का दौरा किया। गांधीजी ने विभिन्न स्थानों पर सभाओं को संबोधित किया तथा युवाओं से नये राजनीतिक संघर्ष हेतु प्रत्यक्ष रूप से तैयार रहने का अनुरोध किया। Lahore Adhiveshan Kya Hai 1929 से पहले गांधीजी का मुख्य जोर रचनात्मक कार्यों पर होता था, उसकी जगह पर अब उन्होंने जनता को प्रत्यक्ष राजनीतिक कार्रवाई के लिये तैयार करना प्रारंभ कर दिया।

कांग्रेस की कार्यकारिणी समिति ने आम जनता द्वारा बहिष्कार का आक्रामक कार्यक्रम अपनाने तथा विदेशी वस्त्रों की सार्वजानिक होली जलाने के लिए ‘विदेशी कपड़ा बहिष्कार समिति’ का गठन किया। Lahore Adhiveshan Kya Hai इस अभियान को गांधीजी ने पूर्ण समर्थन प्रदान कर लोगों को सक्रियता से भाग लेने के लिये प्रोत्साहित किया। लेकिन मार्च 1929 में गांधीजी को कलकत्ता में गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी गिरफ्तारी से पूरे देश में उत्तेजना Excitement फैल गयी तथा लोगों ने खुलेआम विदेशी कपड़ो की होली जलाई।

वर्ष 1929 की ही कुछ अन्य घटनाओं से स्थिति और विस्फोटक हो गयी तथा पूरे राष्ट्र के लोगों में अंग्रेज विरोधी भावनायें जागृत हो उठीं। इन घटनाओं में मेरठ षड़यंत्र केस (मार्च 1929), भगत सिंह एवं बटुकेश्वर दत्त द्वारा केंद्रीय विधान सभा में बम विस्फोट (8 अप्रैल, 1929) तथा मई 1929 में इंग्लैण्ड में रैमजे मैक्डोनाल्ड की लेबर पार्टी का सत्ता में आना प्रमुख थीं।

लार्ड इरविन की घोषणा (31 अक्टूबर 1929)

“महारानी की ओर से मुझे स्पष्ट रूप से यह कहने का आदेश हुआ है कि सरकार के निर्णय में 1917 की घोषणा में यह बात निहित है कि भारत के विकास के स्वाभाविक मुद्दे उसमें दिये गये हैं,  Lahore Adhiveshan Kya Hai उनमें डोमीनियन स्टेट्स (अधिशासित स्वराज्य) की प्राप्ति जुड़ी हुई है’। लार्ड इरविन ने यह वादा भी किया कि जैसे ही साइमन कमीशन (Simon Commission) अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर देगा, एक गोलमेज सम्मेलन (Golmej Sammelan) बुलाया जायेगा।

दिल्ली घोषणा-पत्र (2 नवंबर 1929)

देश के प्रमुख नेताओं का एक सम्मलेन 2 नवंबर 1929 को दिल्ली में बुलाया गया और एक घोषणा पत्र जारी किया गया, जिसे दिल्ली घोषणा-पत्र के नाम से जाना जाता है। इसमें मांग रखी गयी थी जोकि आपको निम्न है।

  1. यह बात स्पष्ट हो जानी चाहिए गोलमेज सम्मेलन का उद्देश्य इस बात पर विचार-विमर्श करना नहीं होगा कि किस समय डोमिनयन स्टेट्स (औपनिवेशिक स्वराज्य) दिया जाये बल्कि इस बैठक में इसे लागू करने की योजना बनायी जानी चाहिए।
  2. इस बैठक (गोलमेज सम्मेलन) में कांग्रेस का बहुमत में प्रतिनिधित्व होना चाहिए।
  3. राजनीतिक अपराधियों को क्षमादान दिया जाये तथा सहमति की एक सामान्य नीति तय की जाये।

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वायसराय इरविन  ने 23 दिसम्बर  1929 को इन मांगों को अस्वीकार कर दिया। दिसंबर 1929 में किसकी अध्यक्षता में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज की मांग की थी Lahore Adhiveshan Kya Hai दिसंबर 1929 में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज की मांग की थी। Lahore Adhiveshan Kya Hai 

दोस्तों आज हमने सीखा की लाहौर अधिवेशन क्या है  और इस अधिवेशन से जुडी सभी जानकारी आपको दी है लाहौर अधिवेशन कब हुआ ,1929 का कांग्रेस अधिवेशन कहां हुआ ,कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की? , लाहौर अधिवेशन में किस की मांग की गई ,1929 लाहौर अधिवेशन में भारतीय तिरंगा का विरोध करने वाले लोग कौन थे , स्वराज की मांग कब की गई ,कांग्रेस के किस अधिवेशन में पूर्ण स्वराज की मांग की गई थी ,स्वराज की मांग किसने की थी उम्मीद है आपको यह जानकारी आपको पसंद आयी होगी और ऐसे ही और नयी जानकारी आपको चाहिए तो आप है हमें कमेंट में जरूर बताये।

धन्यवाद।

FQA : Frequently Questioned Answers

 


Q. पूर्ण स्वराज दिवस कब घोषित किया गया?

26 जनवरी की तारीख कांग्रेस ने को पूर्ण स्वराज दिवस घोषित किया था।

Q. पूर्ण स्वराज का उद्घोष कब और किस अधिवेशन में किया गया था?/ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने कब पूर्ण स्वराज की घोषणा की?/ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने कब पूर्ण स्वराज्य की घोषणा की?

पूर्ण स्वराज का उद्घोष कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में 31 दिसम्बर, 1929 को किया गया था।

Q. 1906 में स्वराज शब्द का प्रयोग करने वाला प्रथम भारतीय कौन था?

1906 में स्वराज शब्द का प्रयोग करने वाला प्रथम भारतीय दादा भाई नौरोजी थे। लेकिन स्वराज शब्द का पहला प्रयोग स्वामी दयानंद सरस्वती के द्वारा किया गया था।

Q. पहली बार गुलाम भारत में कब स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था?/ प्रथम बार स्वाधीनता दिवस कब मनाया गया?

पहली बार गुलाम भारत में 26 जनवरी, 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था।

Q. प्रथम गणतंत्र दिवस के समय भारत के राष्ट्रपति कौन थे?

प्रथम गणतंत्र दिवस के समय भारत के राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद थे।

Q.पहली बार 26 जनवरी 1950 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि कौन थे?/1950 में भारत की पहली गणतंत्र दिवस परेड के प्रथम मुख्य अतिथि कौन थे?

पहली बार 26 जनवरी 1950 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णी थे ।

Q.भारतीय संविधान 26 जनवरी 1950 को क्यों लागू हुआ?

कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन 1929 के अनुसार 26 जनवरी, 1930 को पहला स्वतंत्रता दिवस मनाने का निश्चय किया। 26 जनवरी, 1930 के बाद यह दिवस हर साल मनाया जाने लगा। जब स्वतंत्र भारत का नया संविधान तैयार हो गया तो उसे 26 जनवरी को ही लागू किया गया था। इसी कारण से 26 जनवरी को प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस के रुप में मनाया जाता है।






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