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Mars Orbiter Mission In Hindi Full Information, भारत के मंगल मिशन की सफलता

Mars Orbiter Mission In Hindi Full Information ; हेलो दोस्तों स्वागत है आपका हमारी वेबसाइट पर आज हम आपके लिए महत्वपूर्ण जानकारी लेकर आये है जिसका नाम है Mars Orbiter Mission In Hindi, (मंगल कक्षित्र मिशन क्या है ) इस मिशन में आखिरकार क्या है आज हम आपको इससे जुडी पूर्ण जानकारी देने वाले है।  तो दोस्तों आप इस आर्टिकल को अंत तक पढ़े। Mars Orbiter Mission In Hindi





यह मंगल ग्रह क्या है।(What Is This Planet Mars)

मंगल ग्रह हम सभी के लिए हमेशा से उत्सुकता का केंद्र रहा है लोगों का मानना है कि करोड़ों साल पहले इस सुंदर लाल ग्रह पर पानी की मौजूदगी थी। ऐसे में वहां पर पहले के समय में जीवन होने की संभावना भी व्यक्त की जाती है। इसी की तलाश मंगल पर नासा द्वारा भेजे गए मिशन क्यूरियोसिटी (2012) और पर्सीवरेंस (2021) कर रहे हैं। आपको बता दें कि पृथ्वी और मंगल ग्रह में कई समानताएं हैं। दोनों ग्रहों पर दिन और रात का समय लगभग बराबर है। ये हमारी पृथ्वी का सबसे नजदीकी ग्रह है। इसी वजह से इस सुंदर लाल ग्रह को पृथ्वी वासियों के दूसरे घर के रूप में देखा जा रहा है।

ऐसे में दुनिया की कई बड़ी स्पेस एजेंसियां मंगल पर मैन मिशन भेजने के लिए अपनी कमर कस रही हैं। हालांकि संभावना ये जताई जा रही है कि एलन मस्क की निजी कंपनी स्पेसएक्स साल 2026 में मंगल की सतह पर पहले इंसान को उतार सकती है। इसी सिलसिले में आज हम ये जानेंगे कि उनके इस मिशन की रूपरेखा क्या होने वाली है और वे किस प्रकार से मार्स की सतह पर पहले इंसान को उतारेंगे। Mars Orbiter Mission In Hindi

मिशन के उद्देश्य (Mission Objectives)

मंगलयान का मुख्य उद्देश्य भारत के रॉकेट प्रक्षेपण प्रणाली, अंतरिक्ष यान के निर्माण और संचालन क्षमताओं का प्रदर्शन करने के लिए हैं। विशेष रूप से, मिशन का प्राथमिक उद्देश्य ग्रहों के बीच के लिए मिशन के संचालन,उपग्रह डिजाइन, योजना और प्रबंधन के लिए आवश्यक तकनीक का विकास करना है। द्वितीयक उद्देश्य मंगल ग्रह की सतह का स्वदेशी वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग कर विशेषताओं का पता लगाना है। Mars Orbiter Mission In Hindi

मुख्य उद्देश्य

  • मिशन का मुख्य उद्देश्य ग्रहों के मिशन के संचालन के लिए उपग्रह डिजाइन, योजना और प्रबंधन के लिए आवश्यक प्रौद्योगिकी का विकास जिसमें प्रमुख निम्न कार्यों
  • ऑर्बिट कुशलता-अंतरिक्ष यान को पृथ्वी की कक्षा से सूर्य केंद्रीय प्रक्षेपण पथ में स्थानांतरण करना। तथा अंत में यान को मंगल की कक्षा के प्रवेश करना।
  • कक्षा और दृष्टिकोण गणनाओं के विश्लेषण के लिए बल मॉडल और एल्गोरिदम का विकास।
  • सभी चरणों में नेविगेशन
  • मिशन के सभी चरणों में अंतरिक्ष यान का रखरखाव
  • बिजली, संचार, थर्मल और पेलोड संचालन की आवश्यकताओं को पूरा करना।
  • आपात स्थितियों को संभालने के लिए स्वायत्त सुविधाओं को शामिल करना।

वैज्ञानिक उद्देश्य

  • वैज्ञानिक उद्देश्यों में निम्न प्रमुख पहलुओं का पालन
  • मंगल ग्रह की सतह की आकृति, स्थलाकृति और खनिज का अध्ययन करके विशेषताएं पता लगाना
  • सुदूर संवेदन तकनीक का उपयोग कर मंगल ग्रह का माहौल के घटक सहित मीथेन और कार्बन डाइआक्साइड का अध्ययन करना।
  • मंगल ग्रह के ऊपरी वायुमंडल पर सौर हवा, विकिरण और बाह्य अंतरिक्ष के गतिशीलता का अध्ययन
  • मिशन मंगल के चाँद का भी निरीक्षण करने के लिए कई अवसर प्रदान करेगा।

इतिहास (History)

23 नवंबर 2008 को, मंगल ग्रह के लिए एक मानव रहित मिशन की पहली सार्वजनिक अभिस्वीकृति की घोषणा इसरो के अध्यक्ष माधवन नायर द्वारा की थी। मंगलयान मिशन की अवधारणा 2008 में चंद्र उपग्रह चंद्रयान-1 के प्रक्षेपण के बाद अंतरिक्ष विज्ञान और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा 2010 में एक व्यवहार्यता अध्ययन के साथ शुरू हुआ। भारत सरकार ने परियोजना को 3 अगस्त 2012 में मंजूरी दी। इसके बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने 125 करोड़ रुपये (19$ मिलियन) के ऑर्बिटर के लिए आवश्यक अध्ययन पूरा किया। परियोजना की कुल लागत 454 करोड़ रुपये (67$ मिलियन) हुई। Mars Orbiter Mission In Hindi

अंतरिक्ष एजेंसी ने 28 अक्तूबर 2013 लांच की योजना बनाई। लेकिन प्रशांत महासागर में खराब मौसम के कारण इसरो के अंतरिक्ष यान ट्रैकिंग जहाजों को पहुंचने में देरी हुई। जिससे अभियान को 5 नवंबर 2013 तक स्थगित कर दिया गया था। ईंधन की बचत के लिए होहमान्न स्थानांतरण कक्षा में लांच के अवसर हर 26 महीने घटित होते हैं। इस मामले में यह 2013, 2016 और 2018 में लॉन्च विंडोज़ है।







पीएसएलवी-एक्सएल लांच सी25 वाहन को जोड़ने का कार्य 5 अगस्त 2013 को शुरू हुआ। मंगलयान को वाहन के साथ जोड़ने के लिए 2 अक्टूबर 2013 को श्रीहरिकोटा भेज दिया गया। उपग्रह के विकास को तेजी से रिकार्ड 15 महीने में पूरा किया गया। अमेरिका की संघीय सरकार के बंद के बावजूद, नासा ने 5 अक्टूबर 2013 को मिशन के लिए संचार और नेविगेशन समर्थन प्रदान करने की पुष्टि की। 30 सितंबर 2014 को एक बैठक के दौरान, नासा और इसरो के अधिकारियों ने मंगल ग्रह के भविष्य के संयुक्त मिशन के लिए मार्ग स्थापित करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। तथा दोनों देशों ने मंगलयान और मेवेन अंतरिक्ष यानो के आंकड़े को साझा करेने का फैसला किया।

स्टारशिप रॉकेट की होगी बड़ी भूमिका 

स्पेस एक्स का स्टारशिप रॉकेट इस मिशन में एक बड़ी भूमिका निभाने वाला है। ये रॉकेट एक बार में करीब 100 मीट्रिक टन कार्गो आसानी से पृथ्वी के ऑर्बिट में पहुंचा सकता है। 394 फीट लंबे इस रॉकेट में करीब 6 रेप्टर इंजन लगे हुए हैं। यही नहीं इसमें एक साथ करीब 100 यात्री आसानी के साथ बैठ सकते हैं। स्पेस एक्स की वेबसाइट की मानें तो ये आसानी से क्रू मेंबर्स और लॉजिस्टिक को पृथ्वी से चंद्रमा और मंगल ग्रह तक पहुंचा सकता है। आने वाले वक्तों में इस रॉकेट के ऊपर भी कई काम होने वाले हैं। मार्स को कॉलोनाइज करने के लिए भारी मात्रा में कार्गो की जरूरत होगी, तो अंदाजा ये लगाया जा रहा है कि जल्द ही स्टारशिप का अपग्रेडेड वर्जन भी सामने  आ सकता है, जिसमें करीब 37 रेप्टर इंजन लगे होंगे। Mars Orbiter Mission In Hindi

इस तरह से मंगल ग्रह के ऑर्बिट तक भेजा जाएगा इंसानोंं को

स्पेसएक्स की योजना है कि मंगल ग्रह पर भेजने के लिए वह पहले स्टारशिप को पृथ्वी के ऑर्बिट में प्रवेश करवाएगा। ऑर्बिट में प्रवेश करने के बाद कई दूसरे रॉकेट इसमें लॉजिस्टिक फिल करेंगे। इसमें मार्स को कॉलोनाइज करने के लिए जरूरी कार्गो को शामिल किया जाएगा। उसके बाद ये रॉकेट कार्गो और इंसानों को लेकर सीधा मंगल ग्रह के ऑर्बिट में प्रवेश करेगा।

साल 2022 में टेस्ट मिशन भेजने की योजना बना रहा स्पेसएक्स

साल 2022 में मंगल ग्रह 26 महीनों के बाद पृथ्वी के नजदीक से गुजरेगा। ये समय मार्स पर मिशन भेजने के लिए काफी उचित रहता है। ऐसे में साल 2022 में स्पेस एक्स एक टेस्ट मिशन मार्स पर भेज सकता है, जिसमें कोई भी इंसान नहीं होगा। इस मिशन का काम वास्तविक मिशन के लिए महत्वपूर्ण डेटा को जुटाना होगा। Mars Orbiter Mission In Hindi

कुछ इस तरह से सॉफ्ट लैंडिंग करेगा स्टारशिप

मंगल का वातावरण काफी अच्छा है ।  इस कारण सतह पर उतरने के लिए काफी विशेष उपकरणों का प्रयोग किया जाएगा। ऑर्बिट में दाखिल होते ही स्टारशिप करीब 7.5 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से नीचे उतरेगा। उसके बाद स्टारशिप के सभी इंजन चालू हो जाएंगे। थ्रस्टर्स की सहायता से मंगल की सतह पर रॉकेट की सॉफ्ट लैंडिंग होगी और उसके बाद मनुष्यता का पहला कदम मंगल की सतह पर अपना ना मिटने वाला निशान बनाएगा। Mars Orbiter Mission In Hindi

2026 तक पूरा हो सकता है ये मिशन

एलन मस्क की मानें तो वह इस बात को लेकर काफी भरोसे में हैं कि स्पेसएक्स साल 2026 तक पहले इंसान को मंगल की सतह पर उतार देगा। कई लोगों का ये भी कहना है कि मंगल ग्रह पर कॉलोनी बसाने के बाद उसको पृथ्वी की तरह टेराफॉर्म करने की भी शुरुआत की जाएगी।

दोस्तों आज हमने मार्स मिशन के बारे में जानकारी प्राप्त की है उम्मीद है आपको यह जानकारी अच्छे से समझ आ चुकी होगी।  और दोस्तों आपको और नयी जानकारी के बारे में जानना है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताये और आपको पसंद आया है तो आप अपने दोस्तों तक जरूर साँझा करे।

धन्यवाद

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