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मार्शल लॉ क्या है (Martial Definition In Hindi)

मार्शल लॉ क्या है (Martial Definition In Hindi)

Martial Law Kya Hai हेलो दोस्तों स्वागत है आपका हमारी वेबसाइट पर आज हम महत्वपूर्ण जानकारी लेकर आये है और आज का विषय (TOPIC) है मार्शल लॉ क्या है दोस्तों विद्यार्थियों के लिए यह जानकारी अवश्य जरुरी है। Martial Law Kya Hai और साथ ही एल्डर लोगो को भी इस विषय के बारे में जानना होता है तो आज हम बातएंगे आखिरकार मार्शल लॉ क्या है इसको आज हम विस्तार चर्चा करने वाले है।  तो मित्रो बिना वक़्त गुजारे शुरू करते है। Martial Law Kya Hai  प्रारम्भ से इसकी जानकारी आज हम इस आर्टिकल जानेगे।  

मार्शल लॉ क्या है

मार्शल लॉ किसी भी देश में सरकार द्वारा घोषित करा गया है। एक ऐसी न्याय व्यवस्था है जिसमें सैन्य बलों को एक क्षेत्र, शासन और नियंत्रण करने का अधिकार दिया जाता है। यह जरूरी नहीं हैं कि मार्शल लॉ पूरे देश में ही लागू हो, यह किसी भीं देश के छोटे से हिस्से में लगाया जा सकता है। इसे सैनिक कानून भी कहा जाता है। विशेष परिस्थितियों में किसी भी देश की न्याय व्यवस्था जब सेना अपने हाथ में ले लेती है ,तब जो नियम प्रभावी होते हैं उन्हें मार्शल लॉ कहा जाता है।

कभी-कभी मार्शल लॉ को युद्ध के समय या फिर किसी क्षेत्र को जीतने के बाद उस क्षेत्र में लगा दिया जाता है. उदाहरण के लिए द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी और जापान में इसे लागू किया गया था। अब तक पाकिस्तान में भी चार बार मार्शल लॉ लगाया जा चुका है।

 

मार्शल लॉ और नेशनल इमरजेंसी में क्या अंतर होता है.

 हमारे देश में मार्शल लॉ कभी नहीं लगा है Martial Law Kya Hai  और जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थी तब नेशनल इमरजेंसी या राष्ट्रीय आपातकाल लगाया गया था। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 352 के अनुसार राष्ट्रपति युद्ध, बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति के आधार पर संपूर्ण भारत में एक साथ राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकता है। 

1975 में श्रीमती इंदिरा गांधी ने आंतरिक अशांति के आधार पर संपूर्ण भारत में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की थी। हम आपको बता दें कि 44 संविधान संशोधन 1978 के द्वारा आर्टिकल 352 में निम्न संशोधन किए गए। Martial Law Kya Hai आंतरिक अशांति के स्थान पर शस्त्र विद्रोह शब्द को अत: स्थापित किया गया, राष्ट्रीय आपातकाल संपूर्ण भारत में एक साथ या उसके किसी एक भाग में लगाया जा सकता है और राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा मंत्रिमंडल के लिखित प्रस्ताव पर करेंगे।

भारत के संविधान में मार्शल लॉ के विशिष्ट प्रावधान नहीं हैं। यानी किस परिस्थितियों या परिस्थितियों में इसे लगाया जाएगा आदि. दूसरी ओर, एक संपूर्ण अध्याय आपातकालीन प्रावधानों को समर्पित किया गया है Martial Law Kya Hai मार्शल लॉ केवल मौलिक अधिकारों को प्रभावित करता है लेकिन राष्ट्रीय आपातकाल में मौलिक अधिकारों, संघीय योजनाओं, पॉवर के वितरण पर भी व्यापक प्रभाव पड़ता है।

मार्शल लॉ में मिलिट्री का काफी इम्पोर्टेन्ट रोल होता है लेकिन राष्ट्रीय आपातकाल में मिलिट्री का उतना रोल नहीं होता है. जब मार्शल लॉ लगाया जाता है तो मिलिट्री का कंट्रोल ज्यादा हो जाता है। जब राष्ट्रीय आपातकाल लगाया जाता है तो पॉवर का स्टेट और सेंट्रल के बीच में वितरण हो जाता है, सारी पॉवर सेंटर या केंद्र के हाथों में आ जाती हैं यानी पॉवर का केन्द्रीयकरण हो जाता है। वहीं मार्शल लॉ की बात करें तो मार्शल लॉ के समय सरकार और सामान्य अदालतों को ससपेंड कर दिया जाता है। Martial Law Kya Hai लेकिन राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट यानी सामान्य अदालत काम करती रहती हैं ससपेंड नहीं होती हैं।  Martial Law Kya Hai  भारत में अगर कानून की व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो रही हो या भंग हो रही हो तो उस वक्त मार्शल लॉ लगाया जा सकता है. लेकिन अगर बाहर से अटैक हो रहा हो, युद्ध, बाहरी आक्रामकता या सशस्त्र विद्रोह हो तब आपातकाल लगाया जा सकता है।

क्या आप जानते हैं कि अतीत में मार्शल लॉ किन-किन देशों में लगाया गया है: ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, चीन, ईरान, पाकिस्तान, अमेरिका आदि. अगर मार्शल लॉ के प्रभाव के बारे में बात करें तो जहां भी या जिस देश में भी इसको लगाया गया है वहां पर लोकतंत्र (democracy) को बहुत भारी नुक्सान हुआ है. ऐसा देखा गया है कि मार्शल लॉ के दौरान सिविलियंस या आम नागरिक ज्यादा प्रभावित होते हैं Martial Law Kya Hai  क्योंकि उनके सारे अधिकार खत्म हो जाते हैं, कोर्ट सही से काम नहीं कर पाते हैं. भले ही देश में बाहरी आक्रामकता (external aggression) हो, देश खतरे में हो तब भी मार्शल लॉ का विरोध लोगों द्वारा किया गया है.

मार्शल लॉ के दौरान सत्तारूढ़ दल कई बार लोकतंत्र के बुनियादी मौलिक अधिकारों को लंबे समय तक चोट पहुंचाते हैं जिससे वहां के रहने वाले लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. इसीलिए लोग चाहते हैं कि उनके अधिकारों का दमन ना हो, लोकतंत्र रहे और देश में शांति बनी रहे।

मार्शल लॉ तब लगाया जाता है जब देश में कानूनी व्यवस्था को नुक्सान पहुंच रहा हो और यह एक देश से दूसरे देश में परिस्थितियों पर निर्भर करता है कि कब इसको लगाया जाएगा।  मार्शल लॉ लागू होने पर देश में सारा कंट्रोल मिलिट्री का हो जाता है, इसे सैनिक कानून भी कहा जाता है। Martial Law Kya Hai 

किन-किन देश में मार्शल लॉ लगाया गया और कब

मार्शल लॉ अब तक निम्न देशों में लागू किया गया है –

अमेरिका :- संयुक्त राज्य अमेरिका में, सीमित परिस्थितियों में मार्शल लॉ का उपयोग किया गया है. जैसे न्यू ओरलेंस की लड़ाई के दौरान जापानी हमले के बाद, सन 1871 के ग्रेट शिकागो फायर एवं सन 1906 के सैन फ्रांसिस्को भूकम्प जैसी बड़ी आपदाओं के बाद और सन 1934 में विरोध प्रदर्शन और आंदोलनों आदि में यह लगाया गया था।

ब्रूनेई :- 8 दिसंबर सन 1962 को यहाँ एक बहुत बड़ा विद्रोह हुआ था जिसे ब्रूनेई विद्रोह कहा जाता है, और उस समय ब्रिटिश सैनिकों ने उसे सिंगापुर से हटा दिया था, तब ब्रूनेई मार्शल लॉ के अधीन था।

चाइना :- चाइना में 20 मई सन 1989 में तियानानमेन स्क्वायर विरोध के दौरान राज्य परिषद द्वारा मार्शल लॉ लगाया गया था। इस विद्रोह को ’89 लोकतंत्र आंदोलन’ भी कहा जाता है, जिसे मार्शल लॉ लगने के बाद जबरन दबा दिया गया था।

ईरान :- 7 सितंबर, 1978 को ईरान में अयातुल्ला खोमेनी के बेटे की मौत से कथित सरकारी भागीदारी का विरोध और सार्वजानिक प्रदर्शन हुए, जिसके चलते मोस्तफा खोमेनी, शाह मोहम्मद रेज़ा पहलवी ने सेना के प्रमुख जनरल गुलाम अली ओवेसी को तेहरान राजधानी के सैन्य गवर्नर के रूप में नियुक्त किया. और 8 सितंबर को सरकार ने कई अन्य शहरों के साथ पूरे देश में मार्शल लॉ को प्रभावी रूप से घोषित कर दिया, जिसके बाद आगे कई विरोध प्रदर्शन हुए।

आयरलैंड :- सन 1916 में ईस्टर राइजिंग के दौरान, आयरलैंड के लेफ्टिनेंट लार्ड विम्बोर्न ने डबलिन में मार्शल लॉ घोषित किया. स्वतंत्रता के आयरिश युद्ध के दौरान ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा अधिकांश आयरलैंड में मार्शल लॉ घोषित किया गया था. बाद में इसे ब्रिटिश सरकार की सहमति से पूरे देश में बढ़ा दिया गया था।

इजराइल :- इजरायल के कुछ भौगोलिक क्षेत्रों जैसे नेगेव, गैलिली और ट्रायंगल में सन 1949 से 1966 तक बड़ी अरब आबादी वाली सैन्य प्रशासनिक सरकार प्रभाव में थी।  उस समय इन क्षेत्रों में निवासी मार्शल लॉ के अधीन थे।

मॉरिशस :- मॉरिशस के लोकतंत्र को ‘वेस्टमिंस्टर’ शैली के रूप में जाना जाता है, लेकिन सन 1968 में यहाँ आपातकाल की स्थति उत्पन्न हुई थी, तब यहाँ मार्शल लॉ लगाया गया था।

पाकिस्तान :- पाकिस्तान में सन 1958 में हुए युद्ध के दौरान पहला मार्शल लॉ लगाया गया था, जोकि 7 अक्टूबर को वहां के तत्कालिक राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्ज़ा द्वारा लगाया गया था।  इसके चार साल बाद यानि सन 1962 में संविधान का एक नया दस्तावेज लागू किया गया था  किन्तु अयूब खान के पाकिस्तान के राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने एक अहम फैसला लिया. उन्होंने सन 1969 में, 1962 में लागू किये गये संविधान को रद्द कर दिया और वहां फिर से मार्शल लॉ घोषित कर दिया. इसके बाद यहाँ तीसरी बार भी मार्शल लॉ लगाया गया जोकि बांग्लादेश लिबरेशन युद्ध के बाद जुल्फिकार अली भुट्टो ने लगाया था. फिर 5 जुलाई सन 1977 को जनरल मुहम्मद जिला – उल – हक द्वारा लगाया गया था. 12 अक्टूबर, 1999 को प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की सरकार भंग कर दी गई थी, उस समय भी सेना ने एक बार फिर नियंत्रण संभाला. लेकिन यह मार्शल लॉ नहीं था.

फिलीपींस :- फिलिपीन्स के राष्ट्रपति द्वारा मार्शल लॉ 21 सितंबर 1944 को द्वीतीय विश्व युद्ध के दौरान लगाया था. इसके बाद देश सन 1972 से 1981 तक फर्डीनांड मार्कोस के प्रशासन के तहत फिर से मार्शल लॉ के अधीन था.

पोलैंड :- यहाँ लोकप्रियता और राजनीतिक शक्ति प्राप्त करने से लोकतांत्रिक विपक्ष को रोकने के लिए 13 दिसंबर 1981 को कम्युनिस्ट पोलैंड में मार्शल लॉ पेश किया गया था.

साउथ कोरिया :- अक्टूबर 1946 में कोरिया में संयुक्त राज्य आर्मी सैन्य सरकार ने डेगू दंगे के परिणामस्वरुप मार्शल लॉ घोषित किया. इसके बाद 17 नवंबर, 1948 को राष्ट्रपति सिंग्मन रिहे रेजिम ने जेजू विद्रोह को रद्द करने के लिए मार्शल लॉ घोषित किया था. 19 अप्रैल 1960 को सिंग्मन सरकार ने अप्रैल क्रांति को दबाने के लिए भी मार्शल लॉ घोषित किया.

सीरिया :- यहाँ सन 1963 के सीरियाई कूप डी’एटैट के बाद से अभी भी मार्शल लॉ का शासन है.

ताइवान :- द्वितीय विश्व युद्ध में चीन की जीत के बाद कई देश उसके नियंत्रण में थे जिसमे से एक ताइवान द्वीप था. सन 1949 में युद्ध में हारे हुए कुछ देशों के साथ यहाँ भी मार्शल लॉ घोषित किया गया था.

थाईलैंड :- थाईलैंड में भी मार्शल लॉ काफी सक्रिय रहा हैं. यहाँ सन 1912 में अपरिवर्तनीय पैलेस विद्रोह के चलते मार्शल लॉ लगाया गया था, इसके बाद सन 2004 में दक्षिण थाईलैंड विद्रोह के जवाब में कुछ प्रान्तों में मार्शल लॉ की घोषणा की गई. फिर सन 2006 में भी एक खूनी विद्रोह के चलते मार्शल लॉ घोषित किया गया. 20 मई 2014 को यहाँ नागरिक और राजनीतिक अशांति के चलते भी राष्ट्रव्यापी मार्शल लॉ घोषित किया गया था.

तुर्की :- सन 1923 में तुर्की गणराज्य की नींव के बाद से सेना ने तीन कूप डी’एटैट का आयोजन किया और मार्शल लॉ की घोषणा की. फिर सन 1978 में भी मार्शल लॉ लगया गया लेकिन उसे सन 2002 तक सीमित प्रान्तों में आपातकालीन स्थिति में बदल दिया गया.

यूक्रेन :- हालही में यूक्रेन में यहाँ के तटीय क्षेत्रों, रूस और ट्रान्सनिस्ट्रिया में मार्शल लॉ लगाये जाने के बारे में ख़बरें सामने आई है.  

कनाडा :- कोलोनियल युग में, 1775 – 1776 में अमेरिकी महाद्वीप कांग्रेस की सेना द्वारा, कनाडा पर आक्रमण के दौरान क्यूबैक प्रान्त क्षेत्र में मार्शल लॉ घोषित और लागू किया गया था. इसके बाद इसे सन 1837 – 1838 विद्रोह के दौरान लोअर कनाडा के क्षेत्र में दो बार लागू किया गया था.

ऑस्ट्रेलिया :- ब्लैक वॉर, सन 1820 के दशक के मध्य से 1832 के दशक तक की अवधि तस्मानिया में ब्रिटिश उपनिवेशवादियों और आदिवासी ऑस्ट्रेलियाई लोगों के बीच हिंसक संघर्ष की अवधि थी. सन 1820 के दशक में हिंसा में वृद्धि होने की वजह से लेफ्टिनेंट – गवर्नर जॉर्ज आर्थर ने नवंबर 1828 में मार्शल लॉ लगाया था. यह 3 साल से भी अधिक समय तक लागू रहा. ऑस्ट्रेलिया के इतिहास में यह सबसे लंबी अवधि तक लागू रहा था.

इंडोनेशिया :- 18 मई सन 2003 को राष्ट्रपति के आदेश के तहत, एसे (Aceh) में एक सैन्य गतिविधि के दौरान, इंडोनेशिया सेना प्रमुख ने 6 महीने की अवधि के लिए मार्शल लॉ लगाया, ताकि वह एसेनीज़ अलगाववादियों को आक्रामक रूप से ख़त्म कर सके.

इजिप्ट :- इजिप्ट यानि मिस्र में सन 1967 से आपातकाल की स्थिति थी, किन्तु उस समय इसकी घोषणा नहीं की गई. फिर सन 1981 में राष्ट्रपति अनवर अल – सदात की हत्या के बाद आपातकाल की स्थिति घोषित की गई थी. उस समय से यहाँ मार्शल लॉ लगा हुआ है. जिसे हर 3 साल में रिन्यू कर दिया जाता है

मार्शल लॉ में सेना के अधिकार

जब मार्शल लॉ घोषित किया जाता है तो उस समय सेना को कुछ अधिकार मिल जाते हैं जोकि निम्न है –

इस कानून के तहत विशेष रूप से प्रभावित स्थान पर कर्फ्यू लगाया जाता है और इसका उल्लंघन करने वालों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाता है। अतः ऐसी स्थिति में लोग यहाँ वहां घूम नहीं सकते हैं. हालाँकि सामान्य समय में, उन्हें वारंट डिटेंशन के लिए उतना गंभीर नहीं माना जाता है। जब यह घोषित होता है, तब नागरिक स्वतंत्रताएं जैसे स्वतंत्र आंदोलन का अधिकार, स्वतंत्र भाषण या अनुचित खोजों से सुरक्षा आदि को ससपेंड कर दिया जाता है। न्याय प्रणाली जोकि आमतौर पर अपराधिक और नागरिक कानून के मुद्दों को संभालती है, उसे सैन्य ट्रिब्यूनल जैसे सैन्य न्याय प्रणाली के साथ रिप्लेस कर दिया जाता है। इससे सेना को यह अधिकार मिल जाता है कि वह किसी को भी जेल में डाल कर उसको मार भी सकती है।

गैरकानूनी हिरासत को रोकने के लिए डिजाइन किये गये, हैबियस कार्पस से सम्बंधित कानून को भी ससपेंड किया जा सकता है, सेना को बिना किसी का सहारा लेने की संभावना के अनिश्चित काल तक व्यक्तियों को हिरासत में रखने की इजाजत दे दी जाती है। उनके द्वारा मिलिट्री कोर्ट खोले जाते हैं, जहाँ किसी भी समय अपराधी को नोटिस देकर कोर्ट में पेश होने के लिए बुलाया जाता है. इसके साथ ही यदि कोई इस कानून के विरोध में आवाज उठाता है तो उसे भी इस कोर्ट में पेश होना पड़ता है और उस पर भी कार्यवाही की जाती है 

मार्शल लॉ का मतलब वॉर की शुरुआत करना नहीं होता है

सरकार के जो नार्मल सिविलियन फंक्शन होते है।आम नागरिक की व्यवस्था को हटा दिया जाता है और मिलिट्री का रुल लग जाता है।  तख्ता पलट के बाद भी मार्शल लॉ लगा दिया जाता है. कभी-कभी मार्शल लॉ बहुत बड़ी प्राकृतिक आपदा आने पर भी लगा दिया जाता है किन्तु अधिकांश देश इस स्थिति में आपातकाल (इमर्जेंसी) लागू करते हैं।

इस लॉ के अंतर्गत कर्फयू आदि विशेष कानून होते हैं।  हम आपको बता दें कि इसके अंतर्गत न्याय देने के लिए सेना का एक विशेष ट्रिब्यूनल नियुक्त किया जाता है जिसे कोर्ट मार्शल कहा जाता है. इसके अन्तर्गत बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका जैसे अधिकार निलम्बित किये जाते हैं

मार्शल लॉ किन परिस्थितियों में लगाया जा सकता है?

मार्शल लॉ एक देश तभी लागु करता है जब सिविल अनरेस्ट हो या कोई नेशनल कराईसेस आ जाए या फिर स्टेट ऑफ वार की स्थिति हो इत्यादि।  इसमें आर्मी के हाथ में सारा काम आ जाता है। जरुरी नहीं है कि मार्शल लॉ पूरे देश पर लागु हो, देश में किसी भी छोटे से हिस्से में यह लगाया जा सकता है. जिस देश में मार्शल लॉ लगता है वहां पर आर्मी का टेक ओवर हो जाता है।

राष्ट्रीयता और नागरिकता के बीच क्या अंतर होता है?

मार्शल लॉ को लगाने के तरीके एक देश से दूसरे देश में कुछ हद तक बदले जा सकते हैं लेकिन कुछ फंक्शनस हैं जो एक जैसे ही रहते हैं। इसके अन्तर्गत कर्फयू आदि विशेष कानून होते हैं। लोग वहां पर एक जगह से दूसरी जगह घूम नहीं सकते हैं। सिविल लॉ का सस्पेंशन, सिविलियन कोर्ट बंद हो जाते हैं। सिविल राईट खत्म हो जाते हैं यानी अरर्मी चाहे तो किसी को भी जेल में डाल सकती है या वहीं पर मार सकती है, हैबियस कॉर्पस यानी सिविलियन कोर्ट ससपेंड हो जाते है और मिलिट्री कोर्ट खुल जाते हैं, मिलिट्री कोर्ट में जज कभी भी नोटिस देकर किसी को भी कोर्ट में बुला सकता है।

इसके अलावा extention of military law and military justice to the civilians यानी जो भी सिविलियंस मार्शल लॉ का विरोध करते हुए दिखे या लोकतंत्र की मांग करें तो उन्हें मिलिट्री कोर्ट में पेश किया जाता है और उन पर भी मुकदमा चलाया जाता है

दोस्तों आज हम आपको मार्शल लॉ क्या है इससे जुडी जानकारी आज हमने आपको इस आर्टिकल में दी है उम्मीद है आपको यह महत्वपूर्ण जानकारी आपको जरूर पसंद आयी होगी और दोस्तों आप इस आर्टिकल को अपने दोस्तों और फॅमिली मेंबर्स को जरूर share (सांझा) करे और आपको और नयी जानकारी चाहिए तो आप कमेंट बॉक्स में जरूर बताये।

सधन्यवाद

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