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 Repeater kya hai Or Kaise kaam kar sakta hai in hindi 

 Repeater kya hai Or Kaise kaam kar sakta hai in hindi 

 Repeater kya hai दोस्तों  jugadme.in आपका स्वागत है हम आपको लिए लेकर आये है की रिपीटर क्या है और दोस्तों उम्मीद है आपको यह पोस्ट जरूर पसंद आएगा और दोस्तों आप इसके बारे में जानना चाहते है  Repeater kya hai तो ,आप सही वेबसाइट पर आये है आपको इस वेबसाइट के द्वारा अच्छे से समझ आ जायगा की यह है क्या और इससे जुडी सभी जानकारी हम आपको देने वाले है।  तो बिना वक़्त गवाए शुरू करते है ।

 Repeater kya hai 

रिपीटर एक ऐसा powerful network device होता है जिसका उपयोग signals को regenerate करने के लिए उपयोग में होता है. इससे Signal लम्बी दुरी तय करती हैं, जिससे की signal की strength समान रहे. Repeater kya hai

Repeaters के विषय में एक बहुत ही जरुरी बात यह हैं की repeaters signal को amplify नहीं करते हैं. जब signal weak बन जाते हैं,  Repeater kya hai तब ये signal को copy करते हैं फिर उसे regenerate करते हैं उसके original strength में. यह एक 2 port device होता है. Repeaters का उपयोग Ethernet network को establish करने के लिए होता है. एक repeater OSI layer के first layer (physical layer) में स्तिथ होता है.

Repeaters उन cables में उपयोग किया जाता है  Repeater kya hai जिन्हें की करीब 100 meters तक की दूरता को cover करने के लिए होता है. इनका उपयोग signals पाने के लिए होता है optical fibers, copper cables और coaxial cables से Repeaters को develop काफी ही जरुरी कार्य करने के लिए भी किया जा सकता है  Repeater kya hai जैसे की microwave को regenerate करना एक satellite से; ऐसे repeaters को transponders कहा जाता है. इसलिए इन devices का इस्तेमाल electric के साथ साथ light signals को carry करने के लिए भी होता है

वाईफाई रिपीटर क्या है और कैसे काम करते हैं?

Wireless routers के तरह ही, अब market में wireless repeaters भी हैं।  Wireless repeaters का उपयोग wireless signals के range को बढ़ाने के लिए होता है, Repeater kya hai इसमें और wires या devices को embed करने के कोई भी जरुरत नहीं होती है। यदि आपको एक instant और efficient boost की जरुरत है तो ,आपके deteriorating signal strength में, तब आपको एक wireless repeater को आपके computer और WAP के बिच में स्थापित करना होगा.

यदि हम इनकी कार्य करने की प्रक्रिया को समझें तब Wireless repeaters radio signals को receive करते हैं एक WAP से और उन्हें regenerate करते हैं फिर उन्हें deliver करते हैं frames के form में Wireless repeaters का उपयोग एक operator को offer करता है  Repeater kya hai sufficient convenience जिससे की वो wireless repeater का उपयोग कर सकता है ज्यादा access points को add करने की जगह में।

ये repeaters wireless system के एक बहुत ही major weakness को overcome करने में मदद कर सकते हैं. ये major weakness है signal attenuation (signal का कमजोर होना  Repeater kya hai Wireless repeaters बहुत ही ज्यादा capable होते हैं wireless signal के coverage को बढ़ाने में जब एक repeater को place किया जाता है एक remote location में network signals travel तो कर सकती है, लेकिन काफी ही ज्यादा कमजोर हो जाती है. इन जगहों में connectivity बढ़ जाती है इन repeaters के  उपयोग से उदहरण के लिए अगर एक व्यक्ति travel करता है अपने research project के लिए, तब वो अपने साथ एक wireless repeater carry कर सकता है; जिससे की वो signals regenerate कर सकता है repeater के उपयोग से इससे उसके सभी communication gapes को आसानी से makeup किया जा सकता है और उसे बिना रुकावट के signals मिल सकती हैं.

Repeaters का उपयोग Ethernet में

Repeaters का अच्छे उपयोग और efficient signal length प्राप्त करने के लिए होता है, इसलिए repeaters को ज्यादा Ethernet में उपयोग किया जाता है. Ethernet repeater का मुख्य काम होता है  Repeater kya hai signal को carry करना एक Ethernet cable से दुसरे तक बिना कोई attenuation या signal strength के loss से repeater system की मदद करते हैं किसी collision को detect करने में. अगर एक repeater कोई collision को identify करता है, तब ये उस signal को सभी connected ports तक पहुंचाता है.

Repeater का उपयोग Ethernet के बहुत से segments को आपस में connect करने के लिए होता है. एक multiport repeater का ज्यादातर उपयोग इस चीज़ के लिए होता है अगर दो host devices के बीच पांच से ज्यादा segments होंगे, repeaters improper links को detect कर लेते हैं। ऐसे में data flow terminate हो जाता है तब तक के लिए जब जाट की data सही तरीके से accurate या rectify न हो जाये Repeaters smart devices होते हैं; वो signals को regulate करते हैं और signal flow को control भी करते हैं. जिससे की wires को बचाया जा सके damage या breakage से Repeaters network segments की continuous working को भी enable करता है, अगर कोई segment टूट जाये या वो कोई function करने में असक्षम हो जाये. इसलिए repeaters बहुत ही ज्यादा helpful होते हैं

Star Topology में Repeaters का उपयोग

एक LAN में जब प्रत्येक individual unit को एक access प्रदान किया जाता है directly communicate करने के लिए central device या hub से, तब इसे star topology कहा जाता है. Topology की परिभाषा को समझें तब यह एक physical set up होता है जिससे की एक network connection point को establish किया जा सके। इसमें इस central device को कहा जाता है एक multiport repeater. इस repeater का मुख्य purpose होता है की ये allow करें signal को लम्बी दुरी तय करने के लिए. Multiple ports Ethernet repeaters का उपयोग star topology cabling के deficiency (दुर्बलता) को कम करने के लिए होता है.

Repeater के Features क्या होते हैं

एक repeater काफी ही simplest facility होता है जिसका उपयोग network interconnection के लिए किया जाता है। Repeater की संख्या कितनी होगी यह एक particular LAN implementation पर निर्भर करती है. एक repeater का इस्तमाल दो या उससे ज्यादा LAN cables segment में हो तब इसके लिए उन्हें समान physical layer protocol में कार्य करना होता है सभी cable segments में इसका major function होता है network signal को receive करना एक LAN terminal cable segment से और उन्हें regenerate करना और फिर उसी signal को retransmit करना उसकी original strength में एक या उससे ज्यादा cable segment में Repeaters operate करते हैं OSI model के Physical layer में और ये transparent होते हैं सभी protocols को जो की operate होते हैं इसके ऊपर के layers में  Repeaters allow करता है एक network को construct होने में जिससे की वो exceed हो सके एक single, physical, cable segment के size limit पर Basically repeater signal की strength को regenerate करती है उसे transmit करने से पहले

रिपीटर के फायदे –

  • रिपीटर के जरिये सिग्नल को Regenerate किया जा सकता है जिससे कि सिग्नल को लम्बी दुरी तक ट्रांसमिट कर सकते हैं.
  • रिपीटर एक बुद्धिमान डिवाइस होती है यह नेटवर्क सिग्नल को Regenerate करने के साथ – साथ सिग्नल में Error और Noise को भी ठीक करती है.
  • रिपीटर को कनेक्ट करना काफी ही आसान है.
  • रिपीटर की कीमत भी अंत नेटवर्क डिवाइस की तुलना में अधिक नहीं होती है.
  • रिपीटर वायर्ड और वायरलेस दोनों प्रकार के आते हैं। यूजर अपनी सुविधा अनुसार इसका उपयोग कर सकते है.
  • रिपीटर का इस्तेमाल करके नेटवर्क के आकार को बढाने पर भी नेटवर्क की Performance पर कोई फरक नहीं पड़ता है.
  • Small नेटवर्क के लिए रिपीटर एक Effective डिवाइस है

रिपीटर के नुकसान

  • रिपीटर नेटवर्क को मॉनिटर नहीं कर सकता है.
  • रिपीटर नेटवर्क ट्रैफिक को कम करने में सक्षम नहीं होता है.
  • एक केवल के ख़राब होने से पूरा नेटवर्क ख़राब हो जाता है.
  • केबल में डेटा ट्रान्सफर करने की एक सीमा होती है.
  • रिपीटर Noise और वास्तविक सिग्नल के बीच अंतर करने में सक्षम नहीं है.
  • अन्य नेटवर्क टोपोलॉजी की तुलना में रिपीटर की गति धीमी होती है

रिपीटर का कार्य

Digital communication systems में, एक repeater ऐसा device होता है जो की digital signal को receive करते हैं एक electromagnetic या optical transmission medium में और फिर उसे regenerate करते हैं उस signal को अगले medium में

Fiber optic repeaters operate करते हैं बहुत ही कम power levels में यदि हम इनकी तुलना करें wireless repeaters से, और ये बहुत ही ज्यादा simpler और cheaper भी होते हैं. लेकिन इन्हें बनाते वक़्त इस बात को जरुर से ध्यान देना चाहिए की इनकी internal circuit noise को हमेशा minimized किया जाये।

Electromagnetic media में, repeaters attenuation की समस्या को दूर करते हैं जो की free-space electromagnetic-field divergence या cable loss से उत्पन्न होता है. Repeaters के एक series केउपयोग से ये signal की extension होने में सहायता करता है लम्बी दुरी तय करने के लिए

इसलिए analog signal amplifiers को 18,000 meter intervals की दूरता में लगाया जाता है, वहीँ digital signal repeaters को typically place किया जाता है 2,000 से 6,000 meter की intervals में एक wireless communications system के, एक repeater में ये चीज़ें होती हैं radio receiver, एक amplifier, एक transmitter, एक isolator, और दो antennas.

इसमें transmitter ऐसी signal produce करती है जिसकी frequency भिन्न होती है received signal से. यही frequency offset ही बहुत ही जरुरी होता है strong transmitted signal को दूर रखने के लिए उसे receiver को disable करने से. ऐसे में isolator एक additional protection प्रदान करता है।

वहीँ एक repeater, जिसे की strategically ही locate किया गया होता है high building या किसी पहाड़ के top में, और ये बहुत हद तक wireless network के performance को बढ़ा सकता है जिससे की लम्बी दूरता के लिए आसानी से communication किया जा सके।

इन satellite wireless में, एक repeater (जिसे की frequently एक transponder भी कहा जाता है) receive करता है uplink signals और उसे फिर retransmits करता है, अक्सर अलग अलग frequencies में, दुसरे locations को।

 इन्हें cellular telephone system में भी इस्तमाल किया जाता है, एक repeater एक प्रकार का group होता हिया transceivers का, एक geographic area का जो की collectively ही serve करता है एक system user को  वहीँ एक fiber optic network में, एक repeater में एक photocell, एक amplifier, और एक light-emitting diode (LED) या infrared-emitting diode (IRED) होते हैं प्रत्येक light या IR signal के लिए जिन्हें की amplification की जरुरत होती है।

Repeaters हटाता है unwanted noise को एक incoming signal से. एक analog signal के विपरीत, original digital signal को और एक बार restore किया जा सकता है चाहे तो कितना भी weak या distorted क्यूँ न हो. Analog transmission में, signals को restrengthened किया जाता है amplifiers से लेकिन इससे noise और information भी amplify हो जाती है। digital signals निर्भर करता है voltage के होने या न होने से, इसलिए वो जल्द ही dissipate हो जाते हैं analog signals की तुलना में इसलिए उन्हें ज्यादा frequent repeating की जरुरत होती है।

Repeaters को commonly इस्तमाल किया जाता है commercial और amateur radio operators के द्वारा जिससे की signals को radio frequency range में extend किया जा सके एक receiver से दुसरे तक इनमें drop repeaters होते हैं, जो की cells किसी cellular radio के तरह होते हैं, और hub repeaters, जो signals को receive कर उन्हें retransmit भी करते हैं बहुत से directions में एक bus repeater link करता है एक computer bus को दुसरे bus के साथ जो की दुसरे computer chassis में होता है, जिससे की एक computer से दुसरे computer की chaining की जा सके।

दोस्तों आपको इस आर्टिकल हमने आपको पूरी जानकारी दी है उम्मीद है आपको यह लेख आपको पसंद आया होगा और आपको यह पोस्ट अपने  दोस्तों तक जरूर पहुचाये और दोस्तों आपको और नयी जानकारी आपको चाहिए तो आप हमें कमेंट बॉक्स बता सकते है ,जिससे हम आपके लिए वह पोस्ट लेकर आएंगे अभी तक के लिए धन्यवाद

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