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Chhath puja Kyu Manaya Jaata Hai

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छठ पूजा क्यों मनाया जाता है इन हिंदी Why chhath puja is celebrated in hindi

Chhath puja Kyu Manaya Jaata Hai लखनऊ. उत्तर प्रदेश और बिहार में छठ का main importance माना जाता है। छठ only एक पर्व नहीं है, महापर्व है, जो पूरे 4 days तक चलता है। नहाए-खाए से इसकी starting होती है, जो डूबते और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर समाप्त होती है। ये पर्व years में दो बार मनाया जाता है। पहली बार चैत्र में और second बार कार्तिक में। चैत्र शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले छठ पर्व को ‘चैती छठ’ और कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले पर्व को ‘कार्तिकी छठ’ कहा जाता है। Chhath puja Kyu Manaya Jaata Hai पारिवारिक सुख-समृद्धि और मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए ये पर्व मनाया जाता है। इसका एक अलग historic महत्व भी है।





छठ पूजा का इतिहास

एक कथा के according , महाभारत काल में जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गए, तब द्रौपदी ने छठ व्रत किया। इससे उनकी desire पूर्ण हुईं तथा पांडवों को राजपाट वापस मिल गया। इसके अलावा छठ महापर्व का विस्तार किया और रामायण काल में भी मिलता है। Chhath puja Kyu Manaya Jaata Hai एक अन्य respect के according , छठ या सूर्य पूजा महाभारत काल से की जाती है।

माता सीता ने भी की थी सूर्यदेव की पूजा

छठ पूजा की tradition कैसे शुरू हुई, इस संदर्भ में कई कथाएं प्रचलित हैं। एक respect के according , जब राम-सीता 14 years के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे, तब रावण वध के पाप से मुक्त होने के लिए उन्होंने ऋषि-मुनियों के आदेश पर राजसूर्य यज्ञ करने का फैसला लिया। पूजा के लिए उन्होंने मुग्दल ऋषि को आमंत्रित किया। मुग्दल ऋषि ने मां सीता पर गंगाजल छिड़ककर पवित्र किया और कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्यदेव की उपासना करने का आदेश दिया। Chhath puja Kyu Manaya Jaata Hai इससे सीता ने मुग्दल ऋषि के आश्रम में रहकर छह दिनों तक सूर्यदेव भगवान की पूजा की थी। सप्तमी को सूर्योदय के time फिर से अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया था।

महाभारत काल से हुई थी छठ पर्व की शुरुआत

हिंदू respect के मुताबिक, कथा प्रचलित है कि छठ पर्व की starting महाभारत काल से हुई थी। इस पर्व को सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण ने सूर्य की पूजा करके शुरू किया था। कहा जाता है कि कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे Chhath puja Kyu Manaya Jaata Hai और वो daily hours तक पानी में खड़े होकर उन्हें अर्घ्य देते थे। सूर्य की कृपा से ही वह great योद्धा बने। आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही tradition प्रचलित है।

द्रोपदी में भी रखा था छठ व्रत

छठ पर्व के बारे में एक कथा और भी है। इस किवदंती के मुताबिक, जब पांडव सारा राजपाठ जुए में हार गए, तब द्रोपदी ने छठ व्रत रखा था। इस व्रत से उनकी desire पूरी हुई थी और पांडवों को सब कुछ वापस मिल गया। लोक tradition के according , सूर्य देव और छठी मईया का संबंध भाई-बहन का है। इसलिए छठ के मौके पर सूर्य की आराधना फलदायी मानी गई। Chhath puja Kyu Manaya Jaata Hai

छठ का पौराणिक महत्व क्या है

इन कथाओं के अलावा एक और किवदंती भी प्रचलित है। पुराणों के according , प्रियव्रत नामक एक राजा की कोई संतान नहीं थी। Chhath puja Kyu Manaya Jaata Hai  इसके लिए उसने हर जतन कर कर डाले, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। तब उस राजा को संतान प्राप्ति के लिए महर्षि कश्यप ने उसे पुत्रयेष्टि यज्ञ करने का परामर्श दिया। यज्ञ के बाद महारानी ने एक पुत्र को जन्म दिया, लेकिन वह मरा पैदा हुआ। राजा के मृत बच्चे की सूचना से पूरे नगर में शोक छा गया। कहा जाता है कि जब राजा मृत बच्चे को दफनाने की तैयारी कर रहे थे, तभी आसमान से एक ज्योतिर्मय विमान धरती पर उतरा। इसमें बैठी देवी ने कहा, ‘मैं षष्ठी देवी और विश्व के समस्त बालकों की रक्षिका हूं।’ इतना कहकर देवी ने शिशु के मृत शरीर को स्पर्श किया, जिससे वह जीवित हो उठा। इसके बाद से ही राजा ने अपने राज्य में यह त्योहार मनाने की घोषणा कर दी।

छठ पर्व का महत्व 

छठ पूजा का महत्व बहुत ज्यादा है। यह व्रत सूर्य भगवान, उषा, प्रकृति, जल, वायु आदि को समर्पित है। इस त्यौहार को मुख्यत: बिहार में मनाया जाता है। छठ के दिन अगर कोई व्यक्ति व्रत को करता है तो वह अत्यंत शुभ और मंगलकारी होता है। पूरे भक्तिभाव और विधि विधान से छठ व्रत करने वाला व्यक्ति सुखी और साधनसंपन्न होता है। इस व्रत को करने से नि:संतान दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है। कहा जाता है Chhath puja Kyu Manaya Jaata Hai कि यह व्रत संतान की रक्षा और उनके life की खुशहाली के लिए किया जाता है। इस व्रत का फल सैकड़ों यज्ञों के फल की प्राप्ति से भी ज्यादा होता है। only संतान ही नहीं बल्कि परिवार में सुख समृद्धि की प्राप्ति के लिए भी यह व्रत किया जाता है।

छठ पूजा के दौरान व्रतियों के लिए नियम (Chhath Puja Vrat Niyam)

  • व्रती और घर के members छठ पूजा के दौरान प्याज, लहसुन और मांस-मछली का सेवन न करें।
  • पूजा के लिए बांस से बने सूप और टोकरी का use करें।
  • छठ पूजा में गुड़ और गेंहू के आटे के ठेकुआ, फलों में केला और गन्ना ध्यान से रखें
  • व्रती छठ पर्व के चारों दिन नए कपड़े पहनें।
  • छठ पूजा के चारों दिन व्रती जमीन पर ही सोएं।

पौराणिक कथाओं के according द्रौपदी ने भी की थी छठ पूजा 

छठ पर्व के बारे में एक कथा और भी है। इसके according , जब पांडव अपना सारा राजपाट जुए में हार गए, तब द्रौपदी ने छठ व्रत रखा। उनकी desire पूरी हुईं और पांडवों को राजपाट वापस मिल गया। लोक tradition के according , सूर्य देव और छठी मईया का संबंध भाई-बहन का है। इसलिए छठ के मौके पर सूर्य की आराधना फलदायी मानी गई है। Chhath puja Kyu Manaya Jaata Hai  महाभारत काल में कर्ण ने की थी सूर्य देव की उपासना:पौराणिक desire के according , छठ पर्व की starting महाभारत काल में हुई थी। सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण ने सूर्य देव की पूजा शुरू की। कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे। वह प्रतिदिन hours कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे। सूर्य की कृपा से ही वह great योद्धा बने। आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही tradition प्रचलित है।

छठी मइया की कथा (Chhathi Maiya Katha)

पौराणिक कथा के according प्रियव्रत नाम का एक राजा था. उनकी पत्नी का नाम था मालिनी. दोनों की कोई संतान नहीं थी. इस बात से राजा और रानी दोनों की दुखी रहते थे. संतान प्राप्ति के लिए राजा ने महर्षि कश्यप से पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया. यह यज्ञ सफल हुआ और रानी गर्भवती हुईं. लेकिन रानी को मरा हुआ बेटा पैदा हुआ. इस बात से राजा और रानी दोनों बहुत दुखी हुए और उन्होंने संतान प्राप्ति की आशा छोड़ दी.Chhath puja Kyu Manaya Jaata Hai राजा प्रियव्रत इतने दुखी हुए कि उन्होंने आत्म हत्या का मन बना लिया, जैसे ही वो खुद को मारने के लिए आगे बड़े षष्ठी देवी प्रकट हुईं. षष्ठी देवी ने राजा से कहा कि जो भी व्यक्ति मेरी सच्चे मन से पूजा करता है मैं उन्हें पुत्र का सौभाग्य प्रदान करती हूं. यदि तुम भी मेरी पूजा करोगे तो तुम्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी. राजा प्रियव्रत ने देवी की बात मानी और कार्तिक शुक्ल की षष्ठी तिथि के दिन देवी षष्ठी की पूजा की. इस पूजा से देवी खुश हुईं और तब से हर years इस तिथि को छठ पर्व मनाया जाने लगा.

चार दिवसीय उत्सव है छठ पूजा

first day छठ पूजा की starting कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाय खाय के साथ हो जाती है। इस दिन व्रत रखने वाले स्नान आदि कर नये वस्त्र धारण करते हैं। और शाकाहारी भोजन करते हैं। व्रती के भोजन करने के बाद ही घर के बाकी members भोजन ग्रहण करते हैं। Chhath puja Kyu Manaya Jaata Hai

नहाने और खाने  की पूरी विधि 

नहाने और खाने वाले दिन अपने घर को पूरी तरफ से साफ कर लेना चाहिए। morning उठकर नदी, तालाब, कुएं में नहाकर साफ कपड़े धारण करना चाहिए। यदि आपके निकट गंगा नदी है तो प्रयास करें कि इस दिन गंगा स्नान जरूर करें। पूजा की किसी भी वस्तु को जूठे या गंदे हाथों से ना छूएं। फिर व्रती female एं और male भोजन ग्रहण करें। Chhath puja Kyu Manaya Jaata Hai भोजन ग्रहण करने से पहले सूर्य भगवान को भोग लगाते हैं। इस दिन व्रती only एक ही बार भोजन ग्रहण करते हैं। छठ करने वाली व्रती female या male चने की दाल और लौकी शुद्ध घी में सब्जी बनाते और ग्रहण करते हैं। उसमें सेंधा शुद्ध नमक ही डालते हैं। घर के बाकी members भी यही खाते हैं। इस बात का भी ध्यान रखें कि घर के बाकी members व्रती लोगों के भोजन करने के बाद ही खाएं।Chhath puja Kyu Manaya Jaata Hai

second day  (खरना)– कार्तिक शुक्ल पंचमी के दिन व्रत रखा जाता है। व्रती इस दिन evening के time एक बार भोजन ग्रहण करते हैं। Chhath puja Kyu Manaya Jaata Hai  इसे खरना कहा जाता है। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला व्रत रखते हैं। evening को चावल व गुड़ की खीर बनाकर खायी जाती है। चावल का पिठ्ठा व घी लगी हुई रोटी ग्रहण करने के साथ ही प्रसाद रूप में भी वितरीत की जाती है।

third day (डूबते हुये सूर्य को अर्घ्य) – कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन पूरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है। साथ ही छठ पूजा का प्रसाद तैयार करते हैं। इस दिन व्रती evening के time किसी नदी, तालाब पर जाकर पानी में खड़े होकर डूबते हुये सूर्य को अर्घ्य देते हैं। और रात भर जागरण किया जाता है।
forth day (उगते हुये सूर्य को अर्घ्य)– कार्तिक शुक्ल सप्तमी की morning भी पानी में खड़े होकर उगते हुये सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य देने के बाद व्रती सात बार परिक्रमा भी करते हैं। इसके बाद एक दूसरे को प्रसाद देकर व्रत खोला जाता है। Chhath puja Kyu Manaya Jaata Hai

छठ पूजा सामग्री

प्रसाद के लिए बांस की तीन टोकरी, सिंदूर, कपूर, कुमकुम, अक्षत के लिए चावल, चन्दन ठेकुआ, मालपुआ, खीर-पूड़ी, खजूर, सूजी का हलवा, चावल का बना लड्डू/लड्डुआ, सेब, सिंघाड़ा, मूली,बॉस या पीतल के तीन सूप, लोटा, थाली, गिलास, नारियल, साड़ी-कुर्ता पजामा, गन्ना पत्तों के साथ, हल्दी और अदरक का पौधा, सुथनी, शकरकंदी, डगरा, नाशपाती, नींबू बड़ा, शहद की डिब्बी, पान सुपारी, कैराव, etc…

छठ पूजा की विधि (Chhath Puja Vidhi)

1. छठ की व्रतधारी लगातार 36 घंटे का कठोर व्रत रखती हैं। इस दौरान पानी भी ग्रहण नहीं किया जाता है। पहला दिन कार्तिक शुक्ल चतुर्थी नहाय-खाय के रूप में मनाया जाता है।
2. दूसरे दिन व्रती पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। evening को चावल व गुड़ की खीर बनाकर खाती है। चावल का पिठ्ठा व घी लगी हुई रोटी ग्रहण करने के साथ ही प्रसाद रूप में भी वितरीत की जाती है।
3. कार्तिक शुक्ल छठी तिथि यानी तीसरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है। इस दिन व्रती अपने घर पर बनाए पकवानों और पूजन सामग्री लेकर आसपास के घाटों पर पहुंचती हैं।
4. घाट पर ईख का घर बनाकर एक बड़ा दीपक जलाया जाता है।
5. सबसे पहले व्रती घाट में स्नान करती हैं और पानी में रहते हुए ही ढलते हुए सूर्य को अर्घ्य देती हैं।
6. इसके बाद घर पर सूर्य देव का ध्यान करते हुए रात भर जागरण किया जाता है। जिसमें छठी माता के प्राचीन गीत गाए जाते हैं।
7. सप्तमी के दिन यानी व्रत के चौथे और आखिरी दिन सूर्य उगने से पहले घाट पर पहुंचें। इस दौरान अपने साथ पकवानों की टोकरियां, नारियल और फल भी रखें।
8. अब उगते हुए सूर्य को जल श्रद्धा से अर्घ्य दें। छठ व्रत की कथा सुनें और प्रसाद बांटे।
9. आखिर में व्रती प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलें।

छठ अनुष्ठान विधि

1. छठ के दिन सूर्योदय में उठना चाहिए।
2. व्यक्ति को अपने घर के पास एक झील, तालाब या नदी में स्नान करना चाहिए।
3. स्नान करने के बाद नदी के किनारे खड़े होकर सूर्योदय के time सूर्य देवता को नमन करें और विधिवत पूजा करें।
4. शुद्ध घी का दीपक जलाएं और सूर्य को धुप और फूल अर्पण करें।
5. छठ पूजा में सात प्रकार के फूल, चावल, चंदन, तिल आदि से युक्त जल को सूर्य को अर्पण करें।
सर झुका कर प्रार्थना करते हुए ॐ घृणिं सूर्याय नमः, ॐ घृणिं सूर्य: आदित्य:, ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय, सहस्त्रकिरणाय मनोवांछित फलं देहि देहि स्वाहा,
या फिर ॐ सूर्याय नमः 108 बार बोलें।
6. अपनी सामर्थ्य के according ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन कराएं।
7. गरीब लोगों को कपड़े, भोजन, अनाज आदि का दान करना चाहिए।

षष्ठी देवी मंत्र (Chhath Mantra)

षष्ठांशां प्रकृते: शुद्धां सुप्रतिष्ठाण्च सुव्रताम्।
सुपुत्रदां च शुभदां दयारूपां जगत्प्रसूम्।।
श्वेतचम्पकवर्णाभां रत्नभूषणभूषिताम्।
पवित्ररुपां परमां देवसेनां परां भजे।।

छठ मइया का पूजा मंत्र (Chhath Puja Mantra)

ॐ सूर्य देवं नमस्ते स्तु गृहाणं करूणा करं |
अर्घ्यं च फ़लं संयुक्त गन्ध माल्याक्षतै युतम् ||

छठ व्रत में अर्ध्य देने की विधि

अर्घ्य के लिए सामान
सूप:- अर्ध्य में नए बांस से बनी सूप व डाला का प्रयोग किया जाता है। सूप से वंश में वृद्धि होती है और वंश की रक्षा भी।
ईख:- ईख आरोग्यता का द्दोतक है।
ठेकुआ:- ठेकुआ समृद्धि का द्दोतक है।
मौसमी फल:- मौसम के फल ,फल प्राप्ति के द्दोतक हैं।

इसके लिए छठ घाट की तरफ जाती हुए female एं रास्ते में छठ मैय्या के गीत गाती हैं। इनके हाथों में अगरबत्ती, दीप, जलपात्र होता है। घाट पर पहुंचकर व्रती पानी में प्रवेश करके सूर्य देव का ध्यान करती हैं। पानी कमर तक होना चाहिेए। संध्या कल में जब सूर्य अस्त होने लगता हैं तब अलग-अलग बांस और पीतल के बर्तनों में रखे प्रसाद को तीन बार सूर्य की दिशा में दिखाते हुए जल से स्पर्श कराते हैं। इसके लिए बांस की टोकरी में अर्घ्य का सूप सजाया जाता है. ठीक इसी तरह अगले दिन morning में उगते सूर्य की दिशा में प्रसाद को दिखाते हुए तीन बार जल से प्रसाद के बर्तन को स्पर्श करवाते हैं। Why chhath puja is celebrated in hindi परिवार के लोग प्रसाद पर लोटे से कच्चा दूध अर्पित करते हैं। इस प्रकार छठ पूजा के दौरान व्रती के साथ परिवार तथा पड़ोस के सारे लोग सूर्य को अर्घ्य देते हैं. यह दृश्य काफी भक्तिमय होता है। सभी छठ व्रती नदी या तालाब के किनारे एकत्रित होकर सामूहिक रूप से अर्घ्य दान संपन्न करते हैं। Chhath puja Kyu Manaya Jaata Hai

chhath puja कब है

Sunday, 30 October
 2022 in India

सरस्वती पूजा क्यों मनाया जाता है

respect है कि सृष्टि के रचियता भगवान ब्रह्मा के मुख से वसंत पंचमी के दिन ही ज्ञान और विद्या की देवी मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था. इसी वजह से ज्ञान के उपासक सभी लोग वसंत पंचमी के दिन अपनी आराध्य देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना करते हैं Chhath puja Kyu Manaya Jaata Hai

छठ माता का पति कौन है

पुराणों में कहीं सूर्य की पत्नी संज्ञा को, कहीं कार्तिकेय की पत्नी को षष्ठी देवी या छठी मैया माना गया है। श्रीमद्भागवत महापुराण के according ,प्रकृति के छठे अंश से प्रकट हुई सोलह मातृकाओं अर्थात माताओं में प्रसिद्ध षष्ठी देवी (छठी मैया) ब्रह्मा जी की मानस पुत्री हैं।

डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य क्यों दिया जाता हैं

आमतौर पर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने की tradition बहुत-से व्रत और festivals में है। लेकिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देने की tradition विशेष तौर पर छठ महापर्व में है। religious beliefs के according evening के time सूर्य को अर्घ्य देने से life में संपन्नता और सुखों का आगमन होता है। माना जाता है कि evening के time सूर्य अपनी पत्नी प्रत्युषा के साथ होते हैं। कहते हैं कि उन्हें इस time अर्घ्य देने से जल्द ही desire पूरी होती है। religious ग्रन्थों में ऐसा बताया जाता है Chhath puja Kyu Manaya Jaata Hai कि जो डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं, उन्हें उगते हुए सूर्य को भी अर्घ्य देना चाहिए। इससे जल्द desire पूरी हो सकती है।

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