Wednesday, May 29, 2024
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Analog Computer क्या है ?

Analog Computer क्या है-आइये दोस्तों आज हम Analog Computer के बारें में बात करेंगे तो Analog Computer एक प्रकार का कंप्यूटर है जो कि अनुमानित मूल्यों का उपयोग करते हुए संख्याओं की गणना करता है। ये कंप्यूटर डिजिटल कंप्यूटरों की तुलना में बहुत पुराने हैं और ये अपनी संरचना और काम करने की प्रक्रिया में अंतर होता है।

Analog Computer में संख्याओं को अनुमानित मूल्यों के द्वारा दर्शाया जाता है, जो स्थायी रूप से नहीं होते हैं। इन मूल्यों को अनलोग सिग्नल के रूप में दर्शाया जाता है, जो विद्युत विपथ पर आधारित होता था।

Analog Computer क्या है ?

Analog Computer क्या है-Analog Computer एक प्रकार का कंप्यूटर है जो अपनी कार्यविधि में अनुक्रमिक विधि का उपयोग करते हुए विभिन्न अनुक्रमिक दलों का उपयोग करता है। इसका उपयोग विभिन्न कार्यों को करने के लिए किया जाता है, जैसे कि निर्माण, उद्योग, जलवायु विज्ञान, नैतिक और सामाजिक अनुसंधान आदि। इसके अलावा, Analog Computer आधुनिक कंप्यूटर के तुलनात्मक रूप में कम तेजी से काम करते हैं लेकिन यह निश्चित तरीके से काम करते हैं।

Analog Computer दो प्रमुख विधियों, एनालोग और डिजिटल, में से पहली विधि का उपयोग करता है जो सामान्यतया बिजली के वॉल्टेज, ध्वनि, तापमान आदि को नंबरों में बदलती है।

Analog Computer कब बना ?

Analog Computer का विकास 20वीं सदी के प्रारंभिक दशक में हुआ था। यह उन दिनों में उपलब्ध थे जब डिजिटल कंप्यूटर से पहले इंजीनियरिंग और विज्ञान के क्षेत्रों में ज्यादातर अनुक्रमिक विधियों का उपयोग किया जाता था।

Analog Computer क्या है-Analog Computer में पहली बार संख्या प्रसंस्करण के लिए प्रयोग किया गया था, इसे उन लोगों द्वारा बनाया गया था जो बिजली इलेक्ट्रॉनिक यंत्रों का विकास कर रहे थे। जैसे कि टेलीफोन, रेडियो और अन्य उपकरण जो ध्वनि, तापमान और बिजली के अनुक्रमिक लक्षणों को संचालित करने के लिए उपयोग किए जाते हैं। इन लोगों ने अनुक्रमिक विधि का उपयोग करके उन विशेषताओं को विश्लेषण किया जो अनुक्रमिक तत्वों में उपलब्ध होते हैं।



Analog Computer को किसने बनाया ?

Analog Computer का विकास कई लोगों द्वारा हुआ। इसमें कुछ मुख्य निर्माताओं में जेरमी फ्लेचर, फिलिप हेविलॉक, विल्हेल्म शॉकली, कर्नवर्थ बर्रे और ओलाफ लौरेंस शामिल थे।

  • जेरमी फ्लेचर और फिलिप हेविलॉक ने 1937 में पहला Analog Computer विकसित किया, जिसे ‘अटना’ नामक कंप्यूटर कहा जाता है। इसमें तीन स्टेशनरी ड्रम थे जो विभिन्न वेगों पर घूम रहे थे और इससे उन्हें संख्याओं का अनुमान लगाने में मदद मिलती थी।
  • विल्हेल्म शॉकली ने 1941 में एक दरावाहिक कंप्यूटर विकसित किया, जो संख्याओं के लिए उपयोग किया जाता था।
  • कर्नवर्थ बर्रे और ओलाफ लौरेंस ने 1948 में एक Analog Computer विकसित किया, जिसे एनियाक कहा गया था। इसका उपयोग उच्च-गति में बिजली की चाल विश्लेषण करने के लिए किया जाता था।

इस तरह से, Analog Computer के विकास में कई लोगों ने अहम भूमिका निभाई।



Analog Computer कैसे काम करता था?

Analog Computer डिजिटल कंप्यूटरों से भिन्न होते हैं क्योंकि ये वे कंप्यूटर थे जो अपने काम के लिए अनुकूल इलेक्ट्रॉनिक कार्यकलापों का उपयोग करते थे। इन कंप्यूटरों में विभिन्न अवयवों को संशोधित करने के लिए अनुकूल धाराधार इलेक्ट्रिक विभिन्न मानों में बदल जाती हैं।

Analog Computer में सबसे महत्वपूर्ण अवयव, एक डिफरेंशियल एम्प्लीफायर होता था जो विभिन्न एकल प्रकार के विद्युत चुनौतियों को संशोधित करता था। इसके अलावा, कंप्यूटर में कई अन्य इलेक्ट्रॉनिक अवयव जैसे कि ऑप एम्प्लीफायर, ट्रांजिस्टर, कैपेसिटर, इंडक्टर, रेसिस्टर और वॉल्टेज रेगुलेटर होते थे।

Analog Computer में विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक अवयवों के उपयोग से विभिन्न विशेषताओं को मापा जाता था, जैसे कि तापमान, दबाव, वेग आदि। ये उपयोग करके, उन विशेषताओं की गणना की जाती थी जो संख्यात्मक काम के लिए जरूरी होता था।

Analog Computer के Advantage

Analog Computer के कुछ मुख्य लाभ हैं:

  • स्पीड: Analog Computer डिजिटल कंप्यूटरों की तुलना में बहुत तेज होते हैं। ये रिएल-टाइम एनालॉग सिग्नल प्रोसेसिंग करते हैं जो डिजिटल सिग्नलों की तुलना में तेज होते हैं।
  • संशोधन: Analog Computer इलेक्ट्रॉनिक संशोधन के लिए उपयुक्त होते हैं। ये विभिन्न संशोधन चुनौतियों को समाधान करने के लिए अनुकूल इलेक्ट्रॉनिक कार्यकलापों का उपयोग करते हैं।
  • लागत: Analog Computer की लागत डिजिटल कंप्यूटर की तुलना में कम होती है। इन्हें बनाने के लिए आवश्यक उपकरण भी सस्ते होते हैं।
  • अनुकूलता: Analog Computer विभिन्न प्रकार के संशोधन चुनौतियों के लिए अनुकूल होते हैं। इन्हें संशोधन करने के लिए अनुकूल इलेक्ट्रॉनिक कार्यकलापों का उपयोग किया जाता है जो विभिन्न विशेषताओं को मापने में मदद करते हैं।

Analog Computer के Disadvantage

Analog Computer के कुछ मुख्य नुकसान हैं:

  • अनुशंसित उपयोग: Analog Computer संख्यात्मक और अधिकांश डिजिटल काम के लिए अनुशंसित नहीं होते हैं। इन्हें लोग विशेष रूप से संशोधन कार्यों जैसे संकलन, गुणन, बटोरी और विवरण करने के लिए उपयोग करते हैं।
  • शोध और विकास की विकटता: Analog Computer को शोध और विकास के लिए नए उत्पादों की खोज करने में बहुत अधिक समय लगता है। इसके बावजूद, डिजिटल कंप्यूटर को इस दृष्टि से बहुत अधिक संवेदनशील और ताकतवर बनाने में आसानी होती है।
  • ध्वनि का प्रभाव: Analog Computer में ध्वनि के प्रभाव का खतरा होता है जो इसके कार्यकलापों को अस्थिर करता है। इसलिए Analog Computer को ध्वनि से दूर रखना अत्यंत आवश्यक होता है।
  • अक्षमता: Analog Computer अक्षम हो सकते हैं यदि उन्हें सही ढंग से नहीं चलाया जाता था।

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