Thursday, June 13, 2024
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राजा पोरस का जीवन परिचय, पोरस और सिकंदर का युद्ध Porus Sikander war history in hindi

राजा पोरस का जीवन परिचय पोरस और सिकंदर का युद्ध-हेलो दोस्तों आज हम आपको राजा पोरस के बारें में बताएँगे जिसमे उनका जीवन परिचय और राजा पोरस और सिकंदर के बीच हुए युद्ध के बारें में जानेगें-

राजा पोरस का जीवन परिचय पोरस और सिकंदर का युद्ध-राजा पोरस का जीवन परिचय, पोरस और सिकंदर का युद्ध – राजा पोरस (King Porus) भारतीय इतिहास में एक  राजा थे जो आज के पाकिस्तान के पंजाब सीमा के पास वहा नदी के किनारे रहता था। उनका शासन चांडावर्ती वंश के अंतर्गत था जो 4वीं शताब्दी ईसा पूर्व में उत्तर प्रदेश और पंजाब क्षेत्र में शासन करते थे।

राजा पोरस का जीवन परिचय, पोरस और सिकंदर का युद्ध
राजा पोरस का जीवन परिचय, पोरस और सिकंदर का युद्ध

कौन थे पोरस (who is porus)


राजा पोरस का जीवन परिचय पोरस-राजा पोरस का जीवन परिचय, पोरस और सिकंदर का युद्ध – पोरस के समय में, ग्रीक विदेशी शासक अलेक्जेंडर वेलेस (Alexander the Great) ने भारतीय सबको अपने अधीन करने की इच्छा रखते हुए भारत में घुस आया था। राजा पोरस ने भारतीय सेना के साथ अलेक्जेंडर की सेना से लड़ाई लड़ी थी, जो दक्षिणी पंजाब में हुई थी। इस लड़ाई को बहुत खूब याद किया जाता है क्योंकि राजा पोरस ने अलेक्जेंडर को हरा दिया था



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हालांकि, इस जीत के बाद राजा पोरस के साथ अलेक्जेंडर ने शांति संधि की घोषणा की थी और दोनों राजा एक-दूसरे के साथ मैत्री रखने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

राजा पोरस का जीवन परिचय


राजा पोरस का जीवन परिचय पोरस और सिकंदर का युद्ध-राजा पोरस का जीवन परिचय, पोरस और सिकंदर का युद्ध – राजा पोरस भारतीय इतिहास में एक प्रसिद्ध राजा थे जो चांडावर्ती वंश के अंतर्गत थे। वे आज के पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में वहा नदी के किनारे रहते थे। राजा पोरस का जन्म 316 ईसा पूर्व में हुआ था।

राजा पोरस बाल्यकाल से ही शासन का अधिकार संभाल लिया था। उन्होंने अपने विस्तृत साम्राज्य के लिए अनेक युद्ध लड़े थे और अपनी सेना को बढ़ाने के लिए नए-नए योद्धाओं को अपनी सेना में शामिल किया था। राजा पोरस का दांव कभी भी उन्हें लड़ने से मना नहीं कर पाया।

पोरस के समय में, ग्रीक विदेशी शासक अलेक्जेंडर वेलेस (Alexander the Great) ने भारत में आक्रमण करने का फैसला किया था। राजा पोरस ने भारतीय सेना के साथ अलेक्जेंडर की सेना से लड़ाई लड़ी थी, जो दक्षिणी पंजाब में हुई थी। इस लड़ाई को बहुत खूब याद किया जाता है क्योंकि राजा पोरस ने अलेक्जेंडर को हरा दिया था।

पोरस राजा और सिकंदर का युद्ध 

(porus and alexander war in hindi) (sikander and porus history)


राजा पोरस का जीवन परिचय, पोरस और सिकंदर का युद्ध – पोरस और सिकंदर का युद्ध एक प्रसिद्ध इतिहासी घटना है जो दक्षिणी पंजाब में हुई थी। इस युद्ध के बाद, जीत के बाद राजा पोरस को एक महान विजेता के रूप में याद किया जाता है।

कुछ इतिहासकारों के मुताबिक, सिकंदर ने भारत में अपने सैन्य अभियान के दौरान राजा पोरस से मुलाकात की इच्छा जताई थी। राजा पोरस ने इस अनुरोध को स्वीकार किया था, लेकिन उन्होंने सिकंदर से मिलने से पहले अपने सैन्य को तैयार किया था।

युद्ध के दौरान, सिकंदर और पोरस के सैनिक एक दूसरे से टकराते रहे थे। दोनों सेनाओं के बीच बहुत तेज लड़ाई हुई थी। राजा पोरस एक बहुत ही समझदार और अनुभवी योद्धा थे जो अपनी सेना को अच्छी तरह से संभाल सकते थे।

युद्ध के अंत में, राजा पोरस की सेना ने सिकंदर की सेना को हराया था। सिकंदर के साथ एक समझौता हुआ जिसमें उन्होंने राजा पोरस को अपने समक्ष दण्डित करने से बचा लिया था।



कौन थे सिकंदर (who is Alexander)


राजा पोरस का जीवन परिचय पोरस और सिकंदर का युद्ध-सिकंदर वेलेस्ली (Alexander the Great) यूनान का एक महान राजा था जो 336 ईसा पूर्व से 323 ईसा पूर्व तक शासन करता रहा। उन्होंने अपने जीवन के दौरान एक विशाल साम्राज्य का निर्माण किया था जो यूनान, मकदूनिया, इराक, ईरान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत और ईजिप्ट जैसे कई देशों को शामिल करता था।

सिकंदर का जन्म 356 ईसा पूर्व में यूनान के पेला में हुआ था और उनके पिता का नाम फिलिप द्वितीय था, जो मकदूनिया का राजा था। उन्होंने अपनी सेना के साथ बड़ी संख्या में अभियान चलाए जिनसे वे जीत हासिल करते गए। सिकंदर की जीत का शानदार उदाहरण उनके भारत में किए गए अभियान थे, जिसमें उन्होंने पंजाब तक अपनी सेना को ले जाया था।

ग्रीस के इतिहास के ‘हाइडस्पेश की लड़ाई’ की कहानी

(battle of hydaspes river 326 bc) 


हाइडस्पेश की लड़ाई एक ऐतिहासिक घटना थी जो 326 ईसा पूर्व में ग्रीक राजा सिकंदर वेलेस्ली (Alexander the Great) द्वारा भारतीय राजा पुरुषोत्तम के साथ लड़ी गई थी। इस लड़ाई का मुख्य कारण था कि सिकंदर अपने विस्तृत साम्राज्य के लिए भारत में आगे बढ़ते जा रहा था और पुरुषोत्तम उनकी आगे बढ़ती सत्ता को रोकना चाहते थे।

इस लड़ाई में सिकंदर के सेनापति पोरस ने पुरुषोत्तम की सेना के सामने अपनी सेना को बिछाया था। इस लड़ाई में दोनों पक्षों के सैनिकों के बीच काफी कठोर लड़ाई हुई थी, जिसमें बाण, तलवार, हथियार और हाथी जैसे विभिन्न युद्ध साधनों का उपयोग किया गया था।

लड़ाई के दौरान, सिकंदर ने अपनी असाधारण युद्ध कुशलता दिखाई और उनकी सेना ने अंततः पुरुषोत्तम की सेना को हराया। लड़ाई के बाद, पुरुषोत्तम ने शांति से सिकंदर से मुलाकात की और उन्हें बहुमूल्य उपहार दिए जैसे कि हाथियो

पोरस और सिकंदर के बीच की दोस्ती 

(porus and alexander relationship)


पोरस और सिकंदर के बीच की दोस्ती एक मशहूर कहानी है जिसे इतिहासकारों ने उल्लेख किया है। सिकंदर और पोरस दोनों ही बड़े-बड़े शासक थे और उन्हें एक दूसरे के सामने शक्तिशाली राजा के रूप में जाना जाता था। वे दोनों ही अपने राज्यों के समृद्धता, शक्ति और बल के लिए जाने जाते थे।

हालांकि, सिकंदर ने भारत में अपनी विजयों के बाद पोरस से मुलाकात की और दोनों ने दोस्ती की शुरुआत की। अन्ततः, पोरस ने सिकंदर को एक बहुमूल्य तोहफा दिया जो एक रत्नाकर मुखौटा था। सिकंदर ने उसे अपने हथियारों में जोड़ा और अपनी जंग के वक्त उसे पहना था। बाद में, जब सिकंदर का सेनापति पोरस के साथ लड़ने के लिए भेजा गया था, तब उन्होंने देखा कि वह रत्नाकर मुखौटा पहन रहा है। पोरस के सेनापति ने उसे पहचान लिया था और उसने सिकंदर से कहा कि “तुम पोरस के बहुत अच्छे मित्र हो, इसलिए मैं तुम्हारे खिलाफ नहीं लड़ूंगा।”

कैसे हुई थी पोरस और सिकंदर की मौत

 (death of porus)


राजा पोरस का जीवन परिचय पोरस और सिकंदर का युद्ध-पोरस और सिकंदर दोनों ही अपने राज्यों के बीच में भूमिका निभाते थे और उन्होंने अपनी जीवनकाल में कई युद्ध लड़े।

पोरस की मृत्यु 323 ईसा पूर्व में हुई थी। उस समय, सिकंदर ने उसके राज्य को अपने अधीन कर लिया था और पोरस को अपनी जेल में बंद कर दिया गया था। पोरस ने जेल में ही अपनी मृत्यु के लिए निर्णय लिया था। इस वक्त, पोरस अपने बेटे के पास थे और उन्हें लगा कि उनके पिता की मृत्यु के बाद उनकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इसलिए, पोरस ने अपने बेटे को अपनी मृत्यु के बाद भारत छोड़ने का आदेश दिया था।

दूसरी ओर, सिकंदर की मृत्यु उसी वर्ष हुई थी, जब उसे बीमारी हुई थी। उसकी मृत्यु के बाद, उसके वंशजों ने उसके साथ कई युद्ध लड़े और अपनी सत्ता को बनाए रखने की कोशिश की। इतिहासकार इस बात पर विवाद करते हैं कि क्या सिकंदर की मृत्यु उसकी बीमारी के कारण हुई थी या फिर उसे किसी अन्य कारण से मार दिया गया था

भारत के इतिहासकारों की राय (porus in indian history)


राजा पोरस का जीवन परिचय पोरस और सिकंदर का युद्ध-भारत के इतिहासकारों की राय अलग-अलग हो सकती है। हालांकि, सामान्य रूप से, सिकंदर की मृत्यु के बाद उसके वंशजों ने भारत में कई युद्ध लड़े और अपनी सत्ता को बनाए रखने की कोशिश की। उनमें से कुछ इतिहासकार इस बात का मानते हैं कि सिकंदर के वंशजों ने भारत में तबाही मचाई थी जबकि कुछ लोग इसे विवादास्पद मानते हैं।

पोरस की मृत्यु के बाद, उसके वंशजों ने भी कई युद्ध लड़े और उन्हें भारत में तबाही मचाने की कोशिश की। हालांकि, कुछ इतिहासकार इस बात का मानते हैं कि पोरस के वंशजों ने भारत में तबाही मचाने की बजाय भारत के साथ शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखने की कोशिश की। इस तरह, भारत के इतिहासकारों की राय विभिन्न हो सकती है।

इस युद्ध पर बनी फिल्में- (battle of hydaspes alexander movies)


राजा पोरस का जीवन परिचय पोरस और सिकंदर का युद्ध-पोरस और सिकंदर के बीच का युद्ध इतिहास का एक महत्वपूर्ण घटना है, जिसे कई फिल्मों में दिखाया गया है।

कुछ फिल्में निम्नलिखित हैं:

  • “Sikandar” (1941) – इस फिल्म में सिकंदर के रोल में प्रीम चोपड़ा ने काम किया था।
  • “Sikandar-e-Azam” (1965) – इस फिल्म में सिकंदर के रोल में प्रदीप कुमार ने काम किया था।
  • “Alexander” (2004) – इस फिल्म में कॉलिन फरेल ने सिकंदर का रोल निभाया था।
  • “Porus” (2017-2018) – यह एक टीवी शो था, जो पोरस और सिकंदर के बीच के युद्ध को दिखाता था। इस शो में लाखन अर्या ने पोरस का रोल

निभाया था जबकि अलेक्जेंडर संदार्स ने सिकंदर का रोल निभाया था।
ये फिल्में पोरस और सिकंदर के बीच के युद्ध को अपनी अंदाज में दिखाती हैं।


निष्कर्ष-(conclusion)


इस प्रकार का युद्ध इतिहास में एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटना है जिसने पूर्व मध्यकालीन एशिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह घटना न केवल दो शक्तियों के बीच एक सामरिक विवाद के बारे में है, बल्कि यह दो महान व्यक्तित्वों, पोरस और सिकंदर, के बीच एक महत्वपूर्ण दोस्ती के बारे में भी है। इस युद्ध ने स्पष्ट किया कि दो विरोधी देशों के बीच दोस्ती बनाना संभव है, और इससे हमें एक महत्वपूर्ण संदेश मिलता है कि अपने विरोधी को जानने और समझने से हम बेहतर तरीके से उनसे संघर्ष कर सकते हैं।

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