Wednesday, May 29, 2024
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सूरदास का जीवन परिचय

सूरदास जी का जीवन परिचय :-

सूरदास का जीवन परिचय – सूरदास भारत के प्रसिद्ध संत-कवि थे। उनके जन्म की तिथि या जन्मस्थान के बारे में कोई निश्चित जानकारी नहीं है, लेकिन वे उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में जन्मे थे और 15वीं शताब्दी में उनका जन्म हुआ था।




सूरदास बचपन से ही अन्य बच्चों से अलग थे। उन्हें देखकर लगता था कि वे दुनिया के साथ नहीं रहते हैं। बाद में उन्हें नज़र आया कि वे अपने अंधेरे साम्राज्य में किसी एक दिव्य आलोक की तलाश में थे।

उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय श्री कृष्ण भक्ति में बिताया। सूरदास की लोकप्रियता उनकी कृष्ण भक्ति के कारण हुई थी। उन्होंने कृष्ण भक्ति के लिए कई भजन लिखे थे, जो अब भी बहुत लोकप्रिय हैं।

सूरदास जी जो के सगुण भक्ति धारा के एक महान और जाने मने कवियों में से एक है जिनकी जयंती को पूरे भारतवर्ष में धूम धाम के साथ मनाया जाता है। महान कवी सूरदास जो की भगवान श्री कृष्ण के भक्त थे। वो जन्म की शुरुआत से ही आम व्यक्ति जैसे थे तथा भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का वर्णन बिलकुल अद्भुद तरह से अपनी लिखी हुई कविताओं में करते थे जैसा वर्णन सूरदास जी किया करते थे वैसेा कोई दूसरा नेत्र वाला व्यक्ति भी नहीं कर सकता था । उनके लिखे हुए काव्यों में श्री कृष्ण के प्रति प्रेम और अपनी भावनाओ को इस तरह प्रतीत किया है जैसे उन्होंने स्वयं श्री कृष्ण की लीलाओं को देखा हो और महसूस किया हो।

महान कवी सूरदास जी को कृष्ण का परम भक्त माना जाता था । सूरदास जी ने श्री कृष्ण की हर लीलाओ का वर्णंन उन्होंने अपने दोहों के माध्यम से इस प्रकार किया है कि हर ओर कृष्ण ही छवि दिखाई देती हैं। सूरदास जी ने भगवान श्री कृष्ण की बचपन की लीलाओं का अपने पदों , दोहे और काव्यों में इस तरह प्रदर्शित किया है जिससे हर मनुष्यो के दिलो में उनकी छवि छप जाएँ और उन्होंने ही अपने काव्यों में माखनचोर, नंदलाल और यसोदा मैया के लाडले को बाल गोपाल कहा है ।

सूरदास जी गुरु वल्लभाचार्य जी के मार्ग पर कुछ ऐसे चले कि उनके इस मार्ग को जहाज तक कहा जाने लगा। अपने गुरु की कृपा से सूरदास जो ने श्री कृष्ण की लीलाओ को उन्होंने जैसे देखा उसे उन्होंने अपने शब्दों में इतनी सूंदर तरह से चित्रित किया की आज हम जब उनकी लिखी हुई कविताओं को पढ़ते है



 

तो श्री कृष्ण हमें दिखाई देने लगते हैं।सूरदास जी ने ज्यादातर अपनी कविताओं तथा काव्यों में ब्रजभाषा का उपयोग किया है। हिन्दी साहित्य में भगवान श्रीकृष्ण के उपासक और ब्रजभाषा के महत्वपूर्ण कवि महाकवी सूरदास जी का जन्म 1478 ईस्वी में रुनकता नामक गांव में हुआ था । यह गाँव मथुरा-आगरा के किनारे स्थित है।। वैशाख शुक्ल पंचमी क। इनकी जयंती मनाई जाती है।
अवं इस वर्ष सूरदास जयंती मई 06 की शुक्रवार को मनाई जाएगी।

सूरदास जी का जीवन काल

सूरदास का जीवन काल “वर्ष 1478 से वर्ष 1580 तक” जो की कुल 102 वर्ष का रहा था। अपने दिर्ध आयु जीवन काल में सूरदास ने कई ग्रंथ लिखे और काव्य तथा कई पदों की रचनाएँ की तथा उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन कृष्ण जी की भक्ति के लिए समर्पित किया ।

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