Thursday, June 13, 2024
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डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है एवं इंट्राडे और डिलीवरी ट्रेडिंग में अंतर है

डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है- आप जानते है शेयर बाजार में ट्रेडिंग  दो प्रकार से की जाती है Intraday और Delivery Trading. इंट्राडे ट्रेडिंग के बारे में हम आपको पिछले  बता चुके हैं. आज  हम आपको बताएँगे कि Delivery Trading क्या है, डिलीवरी ट्रेडिंग कैसे करें, डिलीवरी ट्रेडिंग में लगने वाले फीस, डिलीवरी ट्रेडिंग के फायदे, नुकसान तथा डिलीवरी ट्रेडिंग और इंट्राडे ट्रेडिंग में क्या अंतर है. आप शेयर बाजार में पैसे निवेश करना चाहते हैं तो सभी टर्म के बारे में आपको जानकारी भी होनी चाहिए।  डिलीवरी ट्रेडिंग के बारे में हर एक  को जानना बहुत जरूरी  है क्योंकि इसकी मदद से आप कम समय में अच्छे पैसे कमा सकते हो डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है

हमने  पूरी कोशिस की है कि आपको डिलीवरी ट्रेडिंग के बारे में पूरी जानकारी दे सकें जिससे कि आपके मन में डिलीवरी ट्रेडिंग से जुड़े सारे Confusion दूर हो सकें. तो शुरू करते हैं इसे जानते हैं डिलीवरी ट्रेडिंग क्या होती है

डिलीवरी ट्रेडिंग क्या है (What is Delivery Trading in Hindi)

  • Intraday Trading में जाना था कि एक ही दिन के अन्दर (शेयर बाजार के खुलने से बंद होने तक के समय) शेयर को खरीदना और बेचना होता है, लेकिन डिलीवरी ट्रेडिंग इंट्राडे से बहुत अलग  होती है. डिलीवरी ट्रेडिंग में निवेशक अपने साथ खरीदे गए शेयर को बेच सकता है इसमें शेयर को बेचने की कोई समय सीमा नहीं होती है
  • डिलीवरी ट्रेडिंग के अंदर जब निवेशक शेयर बाजार से शेयर खरीदते हैं तो वे शेयर को कितने भी समय के लिए अपने डीमैट अकाउंट में Hold कर सकते हैं. चाहें तो निवेशक अपने शेयर को खरीदने के दुसरे दिन ही बेच सकते हैं या चाहें तो 10 साल बाद भी.
  • डिलीवरी ट्रेडिंग उन निवेशकों के लिए सबसे अच्छी होती है जो Long Term Share Investment में भरोसा  रखते हैं. Delivery Trading को Intraday की मुकाबले में कम परसेंट जोखिम भरा माना जाता है. दुनिया के बड़े – बड़े निवेशक जैसे वारेन बुफेट, राकेश झुनझुनवाला Delivery Trading पर छूट  नहीं मिलती  है हमें शेयर को उसी दाम में खरीदना होता है जितना उसका Actual Price होता है. डिलीवरी ट्रेडिंग करने के लिए निवेशक के पास अधिक मात्रा में धनराशी होनी चाहिए ताकि शेयर खरीदने और बेचने में उसे कोई दिक्क्त न हो
  • सीधे -सीधे में कहे।  तो डिलीवरी ट्रेडिंग ऐसी ट्रेडिंग होती है जिसके साथ  निवेशक शेयर बाजार में लम्बे समय के लिए अपने पैसे निवेश कर सकता है. इसमें पूरी तरह निवेशक की मर्जी होती है कि वह कब अपने शेयर को बेचना चाहताह।

डिलीवरी ट्रेडिंग के नियम (Delivery Trading Rules in Hindi)

  • डिलीवरी ट्रेडिंग करने के भी कुछ नियम होते हैं जिसके बारे में एक निवेशक को जानना बहुत जरुरी है
  • डिलीवरी ट्रेडिंग में शेयर को खरीदने के लिए निवेशक को पूरी राशि का भुगतान करना होता है.
  • डिलीवरी ट्रेडिंग के लिए Demat Account का होना आवश्यक होता है.
  • डिलीवरी ट्रेडिंग में आप ख़रीदे गए शेयर को लम्बे समय तक के लिए Hold कर सकते हैं.
  • डिलीवरी ट्रेडिंग में कोई मार्जिन नहीं मिलता है, निवेशक को शेयर फिक्स कीमत में खरीदने होते हैं.
डिलीवरी ट्रेडिंग कैसे करते हैं
  • अगर आप शेयर बाजार में बड़े समय के लिए निवेश करना चाहते हैं तो डिलीवरी ट्रेडिंग आपके लिए Best है. डिलीवरी ट्रेडिंग से आप लम्बे समय बाद बहुत अच्छे पैसे कमा सकते हैं.
  • डिलीवरी ट्रेडिंग  के लिए आपको एक Demat Account की जरूरत होती है आप Full Service Broker या Discount Broker से अपना Demat Account खुलवा सकते हो.
  • अगर आपके पास धनराशि  कम है तो आप Discount Broker से ही अपना Demat Account खुलवाएं. कुछ Discount Broker फ्री में भी आपका Demat Account Open करवा देते हैं.
  • Demat Account खुलवाने के बाद आप Broker की ऑफिसियल वेबसाइट या मोबाइल एप्लीकेशन से ट्रेडिंग करना शुरू कर सकते  है।  पहले आपको Delivery Trading को Select करना होगा। फिर अपनी समझ के साथ कम्पनी के शेयर खरीदने होंगे। और शेयर को अपने Demat Account में Hold करना होता है आपको लगे  कि यह शेयर बेचने का सही समय है तो आप शेयर बेच कर अच्छे पैसे कमा सकते हो.

कुछ Best Discount Broker निम्नलिखित हैं जहाँ से आप अपना Demat Account खुलवा सकते हैं –

  • Zerodha अप्प
  • Angleone अप्प
  • 5Paisa अप्प
  • Groww अप्प
  • Upstox अप्प
डिलीवरी ट्रेडिंग के टिप्स
  •  अगर  आप  शेयर बाजार में एक नये डिलीवरी ट्रेडिंग करते समय निम्न बातों का ध्यान रख सकते हैं जिससे कि Long Term में आपको फायदा मिलने की संभावना अधिक होगी.
  • डिलीवरी ट्रेडिंग करने के लिए निवेशक के खाते में पर्याप्त धनराशी होनी चाहिए जिससे कि उसे शेयर खरीदने और बेचने में कोई समस्या न हो.
  • डिलीवरी ट्रेडिंग में हमेशा अलग – अलग कंपनियों के शेयर में निवेश करने की सलाह दी जाती है क्योंकि शेयर और फण्ड डायवर्सिफाई करने से जोखिम की संभावना कम हो जाती है
  • शेयर को बेचने के लिए सही समय का इंतजार करें, जल्दबाजी में कोई भी फैसला न लें.
  • डिलीवरी ट्रेडिंग में किसी कम्पनी में निवेश करने से पहले विभिन्न श्रोतों से कम्पनी के बारे में पूर्ण जानकारी प्राप्त कर लें और उनकी अच्छे से जाँच कर लें.
  • डिलीवरी ट्रेडिंग में यह सलाह भी दी जाती है कि स्टॉप लॉस का टारगेट भी सेट कर लेना चाहिए ताकि अधिक नुकसान नहीं होगा.
  • अपने सारे पैसे शेयर में निवेश न करें.यह सलाह दी जाती है कि निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में से 10 प्रतिशत ही निवेश करना चाहिए.

डिलीवरी ट्रेडिंग पर लगने वाले शुल्क

  •  आप डिलीवरी ट्रेडिंग करना चाहते हैं तो इसमें लगने वाले शुल्क के बारे आपको पता होना चाहिए। . डिलीवरी ट्रेडिंग में कौन – कौन से शुल्क लगते हैं।
  • STT, CTT और Transaction Charge भी डिलीवरी ट्रेडिंग में लगाया जाता है.
  • डिलीवरी ट्रेडिंग में SEBI के द्वारा भी शुल्क लगाया जाता है
  • GST शुल्क लगता है जो कि सरकार के द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं पर लगाया जाता है और साथ में ब्रोकर के साथ लेन – देन में भी GST शुक्ल लगता है.
  • अधिकतर ब्रोकर डिलीवरी ट्रेडिंग में किसी प्रकार का ब्रोकरेज चार्ज नहीं लेते हैं पर कुछ ब्रोकर डिलीवरी ट्रेडिंग में भी कुछ प्रतिशत ब्रोकरेज चार्ज लेते हैं.
  • डिलीवरी ट्रेडिंग के फायदे (Advantage of Delivery Trading in Hindi)

डिलीवरी ट्रेडिंग के फायदे निम्न हैं –

  • अधिकतर ब्रोकर डिलीवरी ट्रेडिंग में कोई ब्रोकरेज चार्ज नहीं लेते हैं.
  • डिलीवरी ट्रेडिंग में निवेशक सही समय तक शेयर को अपने पास Hold कर सकता है.
  • डिलीवरी ट्रेडिंग में आप शेयर बाजार में लम्बे समय के लिए अपने पैसे निवेश कर सकते हैं.
  • डिलीवरी ट्रेडिंग में कम जोखिम होता है.
  • डिलीवरी ट्रेडिंग में निवेशक अपने सभी शेयरों का मालिक खुद होता है इसलिए कम्पनी से उसे बोनस भी मिलता है.
  • डिलीवरी ट्रेडिंग में अधिक लाभ होता है क्योंकि निवेशक लम्बे समय तक शेयर को Hold करते हैं और कम्पनी के द्वारा बोनस भी प्राप्त करते हैं.

डिलीवरी ट्रेडिंग के नुकसान (Disadvantage of Delivery Trading in Hindi)

डिलीवरी ट्रेडिंग के कुछ नुकसान भी हैं जैसे कि

  • डिलीवरी ट्रेडिंग में कोई छूट  नहीं मिलता है निवेशक को शेयर खरीदने के लिए पूरा भुगतान करना होता है.
  • डिलीवरी ट्रेडिंग करने के लिए निवेशक के पास पर्याप्त धन राशि होनी चाहिए तभी वह लम्बे समय के लिए निवेश कर सकता है.
  • लम्बे समय तक निवेश करने से अच्छे Return आने की भी कोई गारंटी नहीं रहती है.
  • डिलीवरी ट्रेडिंग में निवेशक को धैर्य बनाये रखना होता है और सही समय का इन्तजार करना होता है शेयर बेचने के लिए.

 

 

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