Saturday, February 24, 2024
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रथ यात्रा क्यों मनाया जाता है और कौन से दिन है?

रथ यात्रा क्यों मनाया जाता है- रथ यात्रा (Ratha Yatra) भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है। यह यात्रा हिन्दू धर्म के मुख्यतः एक उत्सव है और विशेष रूप से जगन्नाथ पुरी मंदिर, ओड़ीशा में मनाया जाता है। यह यात्रा हर साल जून या जुलाई में होती है और करीब दस दिन चलती है।

रथ यात्रा क्या है – What is Rath Yatra in Hindi

रथ यात्रा क्यों मनाया जाता है और कौन से दिन है?- रथ यात्रा एक प्रमुख हिन्दू धार्मिक उत्सव है जो विशेष रूप से जगन्नाथ पुरी मंदिर, ओड़ीशा में मनाया जाता है। यह उत्सव हर साल जून या जुलाई में आयोजित किया जाता है और कई लाखों भक्तों द्वारा भागीदारी की जाती है। जगन्नाथ पुरी मंदिर में स्थित मूर्तियों – जगन्नाथ (कृष्ण), बालभद्र (उसके भाई बलराम) और सुभद्रा (उनकी बहन) – को एक विशेष ढाल पर रखकर रथ (रथा) पर स्थापित किया जाता है। यह रथ भव्य और आकर्षक होता है, जिसे लोग धक्के-मुक्के के साथ चलाते हैं। मंदिर के प्रांगण से रथ निकलते ही यह यात्रा आरम्भ होती है।

रथ यात्रा कब मनाया जाता है?

रथ यात्रा कौन से दिन है? रथ यात्रा हर साल जून या जुलाई में मनाई जाती है। इस उत्सव की तिथि भारतीय हिन्दू पंचांग (कैलेंडर) के अनुसार निर्धारित की जाती है। यह उत्सव जगन्नाथ पुरी मंदिर में सभी भक्तों के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन के रूप में मनाया जाता है और इसे दुनिया भर के लोग देखने आते हैं। यह रथयात्रा 10 दिनों की होती है। मान्यता है भगवान जगन्नाथ आषाढ़ शुक्ल की द्वितीया से दशमी तक लोगों के बीच रहते हैं

रथ यात्रा 20th June

रथ यात्रा क्यों मनाया जाता है

रथ यात्रा हर साल जून या जुलाई में मनाई जाती है। इस उत्सव की तिथि भारतीय हिन्दू पंचांग (कैलेंडर) के अनुसार निर्धारित की जाती है। यह उत्सव जगन्नाथ पुरी मंदिर में सभी भक्तों के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन के रूप में मनाया जाता है

दुनिया भर के लोग देखने आते हैं। यह रथयात्रा 10 दिनों की होती है। मान्यता है भगवान जगन्नाथ आषाढ़ शुक्ल की द्वितीया से दशमी तक लोगों के बीच रहते हैं रथ यात्रा को सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण मान्यताएं जुड़ी होती हैं। इसमें भक्तों को विभिन्न देवी-देवताओं की आराधना का मौका मिलता है। यह यात्रा लोकनृत्य, गायन, और विभिन्न कलात्मक प्रदर्शनों के साथ सांस्कृतिक आयोजन का हिस्सा भी है। रथ यात्रा में भाग लेने वाले लोगों की अलग-अलग सामाजिक वर्गों से जुड़ी भक्ति और आस्था का प्रतीक है।

रथ यात्रा की कहानी

रथ यात्रा क्यों मनाया जाता है – ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ का जन्म हुआ था. और उस दिन भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा को रत्नसिंहासन से उतार कर भगवान जगन्नाथ के मंदिर के पास बने स्नान मंडप में ले जाया जाता है। 108 कलशों से उनका शाही स्नान होता है जिससे भगवान जगन्नाथ बीमार पड़ जाते हैं और उन्हें बुखार आ जाता है. इसके बाद भगवान जगन्नाथ को एक विशेष स्थान में रखा जाता है रथ यात्रा की कहानी हिन्दू पुराणों और मान्यताओं से जुड़ी है, जिसमें भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह कथा जगन्नाथ पुरी मंदिर के सम्बंध में विस्तृत है।

भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन पहले योगमाया के आदेश पर मथुरा में निवास कर रहे थे। उनके विशेष आवश्यकताओं के कारण वे मथुरा के बाहर जगन्नाथ पुरी में स्थापित किए गए। यहां उन्हें लोग भक्ति और पूजा करते थे।

एक बार जगन्नाथ पुरी में एक राजा ने भगवान के दर्शन करने की इच्छा प्रकट की। भगवान ने इसका सम्मान किया और उन्हें दर्शन दिए। राजा को इतनी आनंद मिली कि उन्होंने भगवान के साथ अपनी रथ यात्रा मनाने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने मंदिर के आगे एक रथ बनवाया और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को उस पर स्थापित किया।

रथ यात्रा कैसे मनाया जाता है?

यात्रा के लिए विशेष रथ (रथा) तैयार किया जाता है। इस रथ में भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की मूर्तियां स्थापित की जाती हैं। रथ बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के लकड़ी, बांस, कागज़, रंग, वस्त्र और सजावटी सामग्री का उपयोग किया जाता है।

रथ यात्रा की तिथि हिन्दू पंचांग (कैलेंडर) के अनुसार निर्धारित की जाती है। यह यात्रा हर साल जून या जुलाई में मनाई जाती है। यात्रा के दिन, मंदिर से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां रथ पर स्थापित की जाती हैं। भक्त रथ को धक्के-मुक्के के साथ मंदिर के प्रांगण से बाहर निकालते हैं। रथों की पूजा करके सोने की झाड़ू से रथ और रास्ते को साफ किया जाता है. आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को रथ यात्रा का आरंभ होता है.और भक्तगण रथ को खींचकर पुन्य लाभ अर्जित करते हैं।

रथ यात्रा का महत्व

रथ यात्रा हिन्दू धर्म की महत्वपूर्ण परंपरा में से एक है। इसमें भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की पूजा और आराधना की जाती है। यह यात्रा भक्तों को धार्मिक महत्वपूर्णता की अनुभूति प्रदान करती है और उन्हें दिव्यता का अनुभव कराती है।

रथ यात्रा में भाग लेने वाले भक्तों के लिए यह एक महत्वपूर्ण आस्था का प्रतीक होती है। भक्त अपने दिल की आराधना और समर्पण को प्रदर्शित करते हैं रथ यात्रा एक सांस्कृतिक आयोजन के रूप में महत्वपूर्ण है। इसमें लोकनृत्य, गायन, कविता पाठ, धार्मिक भजन और संगीत के प्रदर्शन शामिल होते हैं। यह यात्रा सामाजिक एकता, संघटनशीलता और सांस्कृतिक विरासत को प्रमोट करती है।

FAQ

रथ यात्रा क्या है?
रथ यात्रा हिन्दू धर्म में एक प्रमुख पर्व है, जिसमें भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की मूर्तियों को रथ पर स्थापित करके उन्हें मंदिर से अन्य स्थानों तक यात्रा की जाती है। यह यात्रा भक्तों के लिए महत्वपूर्ण और प्रमुख सामारोहिक आयोजन है।



 

रथ यात्रा कब मनाई जाती है?
रथ यात्रा हर साल जून या जुलाई के महीने में मनाई जाती है।

रथ यात्रा क्यों मनाई जाती है?
रथ यात्रा का मुख्य उद्देश्य है भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन करने का अवसर प्रदान करना। इसके अलावा, यह यात्रा धार्मिकता, सामाजिक एकता, सांस्कृतिक समृद्धि और भक्ति को प्रमोट करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसे मनाकर लोग अपनी आस्था और भक्ति को प्रकट करते हैं।

 

 

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