Tuesday, July 23, 2024
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तीन तलाक पर शाह बानो का केस क्या था | Triple Talaq Shah bano case Summary in hindi

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तीन तलाक पर शाह बानो का केस क्या था – तीन तलाक (Triple Talaq) एक इस्लामिक तलाक़ प्रणाली है जिसमें पति तलाक का निर्णय तीन बार बोलकर ले सकता है। इसका मतलब होता है कि अगर पति तीन बार “तलाक” शब्द को बोलता है, तो तलाक सिद्ध हो जाती है। इस प्रक्रिया में कोई समयीनता नहीं होती है और तलाक स्वीकार्य हो जाती है।

तीन तलाक पर अलग-अलग धर्म समुदायों और देशों में अलग-अलग नियम और कानून हो सकते हैं। कुछ देशों और धार्मिक संप्रदायों में तीन तलाक को वैध माना जाता है और तलाक की प्रक्रिया को संपूर्ण करने के लिए कानूनी फॉर्मालिटीज़ की आवश्यकता होती है।

शाहबानो केस क्या था  Shah Bano case Summary in hindi

शाहबानो केस (Shah Bano case) भारत के एक महत्वपूर्ण केस है जो 1985 में सुप्रीम कोर्ट में सुनाया गया था। यह मामला मुस्लिम महिला शाहबानो बेगम के द्वारा दायित्वार्थ दावा करने के संबंध में था।

शाहबानो बेगम एक मुस्लिम महिला थी जिसके पति ने उसे तलाक दे दी थी और उसकी ज़िंदगी की न्यूनतम आवश्यकताओं का ध्यान नहीं रखा था। उसने सुप्रीम कोर्ट में यह दावा किया कि उसे उसके पति से दायित्वार्थ अलीमोनी भुगतान की आवश्यकता है।

तीन तलाक पर शाह बानो का केस क्या था –सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला किया और उसने यह निर्णय लिया कि मुस्लिम महिलाओं को भी तलाक के बाद अलीमोनी का अधिकार होता है और धार्मिक प्राथमिकताओं के विपरीत उन्हें न्यायपूर्ण भुगतान प्राप्त करने का अधिकार होता है। इससे पहले तो मुस्लिम महिलाओं को इस संबंध में कोई कानूनी सुरक्षा नहीं थी। यह फैसला विवादों का केंद्र बन गया और इसने धार्मिक और सामाजिक संघर्ष को उजागर किया।

शाहबानो कौन है

तीन तलाक पर शाह बानो का केस क्या था – साल 1978 में शाहबानो नामक एक महिला है जो तीन तलाक का शिकार हुई थी. उनको उनके पति द्वारा तीन तलाक दे दिया गया था.

उस समय उनके पति मोहम्मद खान ने तलाक दिया था, उस समय उनकी केवल उम्र 62 वर्ष की थी. और साथ ही शाहबानो के पांच बच्चे भी थे. उनके पति ने दूसरी शादी कर ली थी और दूसरी शादी के दौरान उन्हें तलाक़ मिल गया और साथ जब मोहम्मद ने शाहबानो को तलाक़ दिया तब उसने अपने बच्चों के लिए भी किसी तरह का खर्चा देने से इंकार कर दिया था.

अपने पति से तीन तलाक मिलने के बाद शाहबानो ने गुजारा भत्ते न देने पर वहा मध्य प्रदेश की एक निचली अदालत में केस दर्ज कया था.




जिसमे शाहबानो को जीत हासिल हुई और अदालत ने उनके पति को शाहबानो को हर महीने 25 रुपए देना का आदेश दिया था. 25 रुपए के गुजारे भत्ते की राशि को बढाने के लिए शाहबानो ने ये केस फिर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में दर्ज किया. जिसके बाद उनके गुजारे भत्ते की राशि को 25 रुपए से बढ़ाकर 179 रुपए कर दिया था

उस दौरान हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ शाहबानो के पति ने उच्चतम न्यायालय में अर्जी दी थी जिसके बाद ये केस उच्चतम न्यायालय में चला गया, जहाँ पर भारत में समान नागरिक पर भी सवाल आये थे और ये केस शाहबानो के नाम से जाना जाने लगा

केस में असली मोड़ तब हासिल हुई जब उस वक्त के प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कोर्ट के आदेश को पूरी तरह बदल दिया था

1986 में मुस्लिम महिला (तलाक अधिकारों) अधिनियम संसद में चलाया गया इस दौरान अधिनियम के दूरांमुस्लिम महिला को अगर उसका पति तीन तलाक दे देता है. तो केवल 90 दिन यानी 3 महीनों तक ही उसे अपनी पत्नी को गुजारा भत्ते देना होगा और इस तरह शाहबानो की जीत कर भी हार हो गई थी

इस बार हुई सायरा बानो की जीत (supreme court judgment on triple talaq)

80 के दशक में शाहबानो की जीत कर भी हार हुई थी, मगर इस बार भारत सरकार ने सायरा बानो नामक महिला का साथ दिया था

जहा पर उच्चतम न्यायालय में उत्‍तराखंड की निवासी सायरा बानो ने ही तीन तालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जिसके बाद देश के उच्चतम कोर्ट ने सरकार से इस मसले में उनकी राय मांगी और सरकार ने तीन तलाक को गलत बताया और सायरा बानो के पति ने उनको एक पत्र लिख कर तलाक दे दिया था और अपनी 15 साल की शादी को चुटकियों में तोड़ दिया था तो ऐसे यह मतलब है की इस्लाम और हदीस में तीन तलाक़ का जिक्र किया गया है पर शरीयत के अनुसार किसी भी आदमी को तीन तलाक़ देना सही नहीं माना गया

इस्लाम में कोई भी पति अगर अपनी पत्नी को तीन बार तलाक तलाक बोल दे, तो पति-पत्नी का तलाक हो जाता है. इतना ही नहीं तलाक होने के बाद पति अपनी पत्नी और बच्चों को गुजारा भत्ता नहीं देता है परन्तु अब

देश में अब तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित कर लिया गया है. यानी अब कोई भी पति अपनी पत्नी को तीन तलाक नहीं दे सकता है. ऐसा करने पर अब तीन साल की सज सुनाई गयी है इस कानून को लोकसभा से मंजूरी मिल गई है. वहीं दुनिया में कई ऐसे देश हैं जिन्होंने तीन तलाक को कई सालों पहले असंवैधानिक घोषित कर दिया है

 

 

 

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