Saturday, March 2, 2024
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Statue of Equality क्या है? Statue of equality in Hindi

नमस्कार दोस्तों आज में आपको बताने वाली हूँ की Statue of Equality क्या है? शायद ही का लोग इसके बारे में नहीं जानते है। पर चिंता की कोई बात नहीं है आज में आपको इस पोस्ट के जरिये हिंदी में पूरी जानकरी देने वाली हूँ। तो आइए जानते है। Statue of Equality क्या है?

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Statue of Equality क्या है?

स्टैच्यू ऑफ इक्वॉलिटी एक भव्य प्रतिमा है जो भारत के हैदराबाद शहर में स्थित है। यह प्रतिमा भारत के दलित समुदाय के सम्मान और समानता को दर्शाती है। इस प्रतिमा की ऊंचाई 216 फीट है और इसे वैष्णव संत रामानुजाचार्य जी के समर्पण किया गया है। यह प्रतिमा भारत की सबसे ऊँची दलित प्रतिमा है और दुनिया की सबसे ऊँची महात्मा गांधी की प्रतिमा से भी ऊँची है।
संत रामानुजाचार्य कौन थे

संत रामानुजाचार्य भारतीय दार्शनिक और आचार्य थे जो दक्षिण भारत में 11वीं शताब्दी में जन्मे थे। वे विशिष्टाद्वैत वेदान्त के सम्प्रदाय के प्रमुख संस्थापकों में से एक थे। उन्होंने अपने जीवन के दौरान भगवान विष्णु की भक्ति और पूजा को प्रचलित किया। उन्होंने वेदों के विवेचन के अलावा संगीत और कला की भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संत रामानुजाचार्य भारतीय दार्शनिक और समाज सुधारक के रूप में भी मशहूर हैं जो उनके समय से लेकर आज तक दक्षिण भारत के समाज में गहरी छाप छोड़े हुए हैं।

स्टेच्यू ऑफ इक्वलिटी की खासियत क्या है?

स्टैच्यू ऑफ इक्वॉलिटी भारत की एक अनोखी और शानदार प्रतिमा है जो दलित समुदाय के सम्मान और समानता को दर्शाती है। यह प्रतिमा हैदराबाद शहर में स्थित है और इसकी ऊँचाई 216 फीट है। इसका निर्माण भारत के दलित समुदाय के लोगों के समर्थन से किया गया है। इस प्रतिमा में विशेषता यह है कि इसके निर्माण में केवल भारतीय संस्कृति और शिल्पकला के प्रतिनिधित्व के तत्व ही शामिल हैं। स्टैच्यू ऑफ इक्वॉलिटी भारत की सबसे ऊँची दलित प्रतिमा है और इसके माध्यम से दलित समुदाय के सम्मान को बढ़ाया जा रहा है।

प्रतिमा को स्टेच्यू ऑफ इक्वलिटी का नाम क्यों दिया गया है?

स्टैच्यू ऑफ इक्वॉलिटी का नाम इसलिए रखा गया है क्योंकि यह एक दलित समुदाय के सम्मान और समानता का प्रतीक है। इस प्रतिमा के माध्यम से भारतीय समाज में जाति व्यवस्था के विरुद्ध एक संदेश दिया जा रहा है और सभी लोगों को यह याद दिलाया जा रहा है कि सभी मनुष्य बराबर होते हैं। इस प्रतिमा के माध्यम से दलित समुदाय के लोगों को उनके समाज में एक उच्च स्थान दिया जा रहा है और सभी लोगों को यह समझाया जा रहा है कि हर व्यक्ति को समान अधिकार होते हैं।



संत रामानुजाचार्य के स्टेच्यू का अनावरण उनकी 1000वीं जयंती पर किया गया

हाँ, संत रामानुजाचार्य के स्टेच्यू का अनावरण उनकी 1000वीं जयंती पर किया गया था। यह स्टेच्यू तमिलनाडु के कंचीपुरम में स्थित है और इसका उद्घाटन 1 अक्टूबर 2018 को किया गया था। यह स्टेच्यू एक साथ दो भागों में बना हुआ है, जिसमें दाहिने भाग में संत रामानुजाचार्य की मूर्ति है और बाएं भाग में उनकी शिष्या थिरुमलैदासा की मूर्ति है। इस स्टेच्यू का अनावरण राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने किया था और इसे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एडाप्पाडी केप्पर अप्पानी स्वामी ने संबोधित किया था।

स्टेच्यू ऑफ इक्वलिटी बैठी अवस्था में दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची प्रतिमा

स्टेच्यू ऑफ इक्वलिटी बैठी अवस्था में दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची प्रतिमा है। यह प्रतिमा भारत के तेलंगाना राज्य में स्थित है और इसकी ऊंचाई 216 फीट है। इसे विश्व के सबसे बड़े ब्रह्मोत्सव के दौरान खोला गया था जिसे संत रामानुजाचार्य की 1000वीं जयंती पर मनाया गया था। इस प्रतिमा के अलावा, दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा भी भारत में ही स्थित है और वह केवड़िया पुल के पास स्थित श्रद्धालु मुर्ति है जिसकी ऊंचाई 597 फीट है।

संत रामानुजाचार्य द्वारा प्रतिपादित विशिष्टाद्वैत क्या है

संत रामानुजाचार्य द्वारा प्रतिपादित विशिष्टाद्वैत सिद्धांत के अनुसार, भगवान विष्णु जगत् के सृजनाथर्वाधिकारी होते हैं और उनके समक्ष जगत् शक्ति स्वतंत्र नहीं होती। इस सिद्धांत के अनुसार, ईश्वर और जीव दोनों अलग-अलग होते हैं लेकिन उनका आस्तिक सम्बन्ध होता है। समस्त जीव ईश्वर की अभिव्यक्ति होती है और इसलिए जीवों को दुख और सुख का अनुभव होता है। संत रामानुजाचार्य के अनुसार, जीव और ईश्वर का अभिन्नत्व होता है और इसलिए उनके बीच कोई भेद नहीं होता है। यह सिद्धांत हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है और इसे विशिष्टाद्वैत के नाम से जाना जाता है।

भारत में संत रामानुजाचार्य के असंख्य फाॅलोअर्स

भारत में संत रामानुजाचार्य के असंख्य फॉलोअर्स हैं। उनके विचारों और सिद्धांतों को आधार बनाकर दक्षिण भारत के अनेक मंदिरों में उनके नाम से पूजा और अर्चना की जाती है। उनके सिद्धांतों का प्रभाव भारत की संस्कृति, दर्शन, कला और साहित्य पर दृष्टिकोण डालता है। संत रामानुजाचार्य के फॉलोअर्स दक्षिण भारत में तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल और तेलंगाना में पाए जाते हैं। उनके विचारों को लोगों द्वारा अनुसरण किया जाता है और उन्हें अपने जीवन का मार्गदर्शन माना जाता है।

स्टेच्यू ऑफ इक्वलिटी क्या है

स्टेच्यू ऑफ इक्वलिटी भारत के हैदराबाद शहर में स्थित एक विशालकाय प्रतिमा है। इस प्रतिमा की ऊँचाई 216 फीट है और यह दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमाओं में से एक है। स्टेच्यू ऑफ इक्वलिटी का निर्माण संत रामानुजाचार्य की 1000वीं जयंती पर उनके सिद्धांतों को दुनिया के सामने रखने के उद्देश्य से किया गया है। इस प्रतिमा का निर्माण एक अनुसूचित जाति के शिल्पकारों द्वारा किया गया है और यह प्रतिमा दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला की एक उत्कृष्ट नमूना है। स्टेच्यू ऑफ इक्वलिटी में संत रामानुजाचार्य की मूर्ति भी स्थापित है और यह प्रतिमा भारत के धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण है।

स्टेच्यू ऑफ इक्वलिटी का निर्माण किसने किया है?

स्टेच्यू ऑफ इक्वलिटी का निर्माण एक अनुसूचित जाति के शिल्पकारों द्वारा किया गया है। इस प्रतिमा को भारत के हैदराबाद शहर में स्थापित किया गया है। यह प्रतिमा संत रामानुजाचार्य की 1000वीं जयंती पर उनके सिद्धांतों को दुनिया के सामने रखने के उद्देश्य से बनाई गई है।

स्टेच्यू ऑफ इक्वलिटी का डिजाइन किसने तैयार किया है?

स्टेच्यू ऑफ इक्वलिटी का डिजाइनजाइन साउथ के मशहूर आर्ट डायरेक्टर आनंद साईं ने तैयार किया है यह एक ऐसी स्केच है जिसे वे 1979 में बनाया था। इसे स्वामीनाथन के समूह ने भारत में सामाजिक न्याय और असमानता के मुद्दों को समझने और उन्हें दूर करने के लिए बनाया था। स्टेच्यू ऑफ इक्वलिटी उन सामाजिक संरचनाओं को दर्शाता है जो समानता को बढ़ावा देती हैं।

स्टेच्यू ऑफ इक्वलिटी का निर्माण कब शुरू हुआ?

स्टेच्यू ऑफ इक्वलिटी 2014 में प्रारंभ हुआ।

स्टेच्यू ऑफ इक्वलिटी का अनावरण कब और किसने किया?

5 फरवरी, 2022 को बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया।

स्टेच्यू ऑफ इक्वलिटी की स्थापना कहां की गई है?

हैदराबाद के बाहरी इलाके में स्थित संत चिन्ना जियर ट्रस्ट में की गई है।

प्रतिमा का नाम स्टेच्यू ऑफ इक्वलिटी रखने के पीछे क्या कारण है?

स्टेच्यू ऑफ इक्वलिटी नाम के पीछे का कारण यह है कि यह एक प्रतिमा है जो सभी मानवों के समान अधिकारों के प्रति उनकी समझ और उनके लिए समर्पित है। यह प्रतिमा एक स्केच है जो संत रामानुजाचार्य द्वारा बनाया गया था और भारत में सामाजिक न्याय और असमानता के मुद्दों को समझने और उन्हें दूर करने के लिए बनाया गया था। इस प्रतिमा का नाम स्टेच्यू ऑफ इक्वलिटी है जो समानता की प्रतिस्पर्धा को दर्शाती है और समस्याओं का समाधान खोजने के लिए प्रेरित करती है।

निष्कर्ष

यह तक दोस्तों आपने सीखा की Statue of Equality क्या है? उम्मीद है आपको मेरा बताया गया तरीका अच्छा लगा होगा यदि आप ऐसे ही और हिंदी ब्लॉग पढ़ना चाहते हैं तो आप बिलकुल सही वेबसाइट पर आये है में अपने ऑडियंस को हिंदी में और फ्री में जानकारी देती हूँ यदि आप मेरी इस वेबसाइट के साथ ऐसे बने रहते है तो आपको टेक्नोलॉजी से जुड़े या अन्य जानकारिया ऐसे हिंदी हिंदी में जानने को मिलेगी इसके लिए आपको सबसे पहले JUGADME को सब्सक्राइब करना होगा जिससे आप तक मेरे बनाये गए पोस्ट आप तक आसानी से पहुंच जाये। और अपने रिश्तेदारों को जरूर शेयर करे। मुझे आपलोगो को सहयोग की अति आवश्यकता है।
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