Thursday, April 25, 2024
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बैसाखी क्यों मनाई जाती है




बैसाखी क्यों मनाई जाती है

बैसाखी क्यों मनाई जाती है- बैसाखी सिख धर्म के लोगो के लिए एक महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। देखा जाए तो कुछ हिंदू धर्म के लोग भी इसे मनाते हैं। यह पर्व हर साल विक्रम संवत के पहले महीने को पड़ता है, इस साल यह त्यौहार 14 अप्रैल को आ रहा है। हिंदू धर्म में जिस तरह होली और दीपावली का त्यौहार होता है तथा जैसे ये मनाया जाता है, उसी प्रकार सिख लोगो के लिए यह बैसाखी का त्योहार बहुत महत्वपूर्ण होता है। ये त्यौहार वैसाखी के नाम से भी प्रसिद्ध है और यह एक खुशी तथा उत्सव का पर्व होता है। यह त्यौहार ज्यादातर मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा का मनi जाता है क्यूंकि यहाँ पर कई सारे सिख लोग रहते है ।

देश के अलग-अलग जगहों पर इस पर्व को अलग-अलग नामों से जाना जाता है तथा इसे अलग अलग तरह से मनाया जाता है , जैसे बंगाल में नबा वर्ष, केरल में पूरम विशु, असम में बिहू के नाम से लोग इस पर्व को मनाते हैं। देश के कई हिस्सों में बैसाखी धूमधाम से मनाई जाती है और पंजाब में इसका अलग ही जश्न देखने को मिलता है। एक तरफ देखा जाए तो किसान जो की अपनी फसल काटने की खुशी में यह त्योहार मनाते हैं तो वहीं दूसरी तरफ पंजाब में इस दिन भांगड़ा किया जाता है और इस दिन को सिक्ख लोग इसे
नए साल के रूप में भी मानते है।

बैसाखी के दिन सिख समुदाय के लोग गुरुद्वारों में विशेष उत्सव मनाते हैं क्योंकि इस दिन सिख धर्म के 10वें और अंतिम गुरु, गुरु गोविंद सिंहजी ने 13 अप्रैल सन् 1699 में आनंदपुर साहिब में मुगलों के अत्याचारों से मुकाबला करने के लिए खालसा पंथ की स्थापना की थी। साथ ही गोविंद सिंहजी ने गुरुओं की वंशावली को समाप्त कर दिया था तथा इसके बाद सिख समुदाय के लोगों ने गुरु ग्रंथ साहिब को ही अपना गुरू माना था। इसके साथ-साथ ही इस दिन सिख लोगों ने अपना उपनाम ‘सिंह’ लगाना शरू किया था।

पुरे देश में बैसाखी को फसल के मौसम के अंत के रूप में माना जाता है जो किसानों के लिए विशेष समय होता है। इस दिन सूर्ये की धूप अधिक होती है,क्यूंकि इसी समय के साथ ही गर्मी की शुरुआत होती है। सूरज की धुप इतनी तेज़ होती है की सूर्य की गर्माहट के कारण रबी की फसल भी पक जाती है इसलिए इस दिन किसानों के द्वारा इसे एक महत्पूर्ण उत्सव के रूप में मनाया जाता है। अप्रैल के महीने में सर्दी पूरी तरह ख़त्म हो जाती है और गर्मी के मौसम की शुरुआत होती है। इस त्यौहार को मौसम में होने वाले कुदरती बदलावो के कारण भी मनाया जाता है।
बैसाखी का महत्त्व-
बैसाखी भारत का एक प्रमुख त्योहार है जो हिंदू धर्म के अलावा सिख धर्म के लोगों के लिए भी महत्त्वपूर्ण है। यह त्योहार हर साल 13 अप्रैल या 14 अप्रैल को मनाया जाता है।




बैसाखी का महत्व सिख धर्म के लिए इस दिन को खासकर उनके प्रभु गुरुगोबिंद सिंह जी की याद में मनाया जाता है। गुरु गोबिंद सिंह जी ने 1699 में इस दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी और इस दिन को उनके जन्मदिन के रूप में मनाने लगे। यह दिन इसलिए बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इस दिन सिख समुदाय के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है जो उनकी संस्कृति, धर्म और ऐतिहासिक विरासत को याद दिलाता है।
हिंदू धर्म के लिए बैसाखी एक महत्त्वपूर्ण कृषि त्योहार है। इस दिन अन्न, दाना, बेल, घेवड़ा आदि की खेती शुरू की जाती है। इस त्योहार को बगावा और रोहिणी नवमी के नाम से भी जाना जाता है।

बैसाखी का इतिहास

बैसाखी का इतिहास सिख धर्म के इतिहास से जुड़ा हुआ है। इस दिन को मनाने के पीछे सिख धर्म के प्रभु गुरु गोबिंद सिंह जी का योगदान है।

1699 में, गुरु गोबिंद सिंह ने बैसाखी के दिन अपने शिष्यों को बुलाया था। उन्होंने अपनी कुंडली और तलवार लेकर सामने आए थे और उन्होंने अपने शिष्यों को एक नया जाति बनाने के लिए कहा था। इस नई जाति को खालसा पंथ के नाम से जाना जाता है। गुरु गोबिंद सिंह ने अपने शिष्यों को यह समझाया कि उन्हें ब्राह्मणों, खत्रियों, वैश्यों और शूद्रों से अलग होना चाहिए और वे खालसा पंथ के सदस्य बनने के लिए तैयार होने चाहिए। उन्होंने अपनी कुंडली में चीनी और पानी को मिलाकर बनाई गई अमृत दी थी, जिसे शिष्यों को पिलाया गया था। इस रूप में, बैसाखी का दिन खालसा पंथ की स्थापना का दिन बन गया था।

इस वर्ष बैसाखी कब है:-

बैसाखी हिंदू धर्म और सिख धर्म के त्योहारों में से एक है। यह हर साल 13 या 14 अप्रैल को मनाया जाता है।
हालांकि, सिख धर्म के लिए बैसाखी का दिन थोड़ा अलग होता है। सिख धर्म के अनुसार, बैसाखी 1 मई को भी मनाया जा सकता है

बैसाखी कैसे मनाई जाता है

बैसाखी के दिन सूर्योदय के साथ लोग स्नान करते हैं और अपने परिवारों और दोस्तों के साथ प्रार्थनाओं को समर्पित करते हैं। इसके बाद लोग अपने घरों को सजाते हैं और बैंगन, प्याज और आलू जैसी फसलों को धार्मिक रूप से पूजते हैं
सिख समुदाय में, बैसाखी के दिन खास तौर पर मनाया जाता है, जब उन्होंने खास रूप से गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा स्थापित खालसा पंथ की शुरुआत की थी। सिखों के द्वारा इस दिन पर नगर कीरतन, बारात और नागर की शोभायात्रा की जाती है।

इस दिन पर लोग एक दूसरे को बैसाखी की शुभकामनाएं देते हैं और एक दूसरे को मिठाई और उपहार देते हैं। इस दिन का उत्साहपूर्ण माहौल द

 

 

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