Thursday, June 20, 2024
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Class 12th History Chapter 5 यात्रियों के नजरिए  Notes In Hindi

Class 12th History Chapter 5 आपने यह साहित्यिक विषय पर अध्ययन करने का उल्लेख किया है, और आप चाहते हैं कि आप इस अध्याय में अल-बिरूनी, इब्न बतूता, फ्रांस्वा बर्नियर, और मुग़ल काल के समयकाल पर विस्तार से चर्चा करें। यह सभी महत्वपूर्ण व्यक्तित्व थे और उनका योगदान साहित्य, इतिहास, और सामाजिक जीवन में महत्वपूर्ण रहा है।

Textbook NCERT
Class Class 12
Subject HISTORY
Chapter Chapter 5
Chapter Name यात्रियों के नजरिए
Category Class 12 History Notes in Hindi
Medium Hindi

 

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अलबिरूनी (Al-Biruni):

अल-बिरूनी एक ईरानी वैज्ञानिक, गणितज्ञ, तथा सांस्कृत और भूगोल विद्वान थे।

उन्होंने विभिन्न संस्कृत ग्रंथों का अध्ययन किया और भूगोल, खगोल, और गणित में उनका योगदान अद्भुत था।


इब्न बतूता (Ibn Battuta):

इब्न बतूता एक मुस्लिम यात्री और एक मुग़ल समय का इतिहासकार थे।

उन्होंने अपने जीवन के दौरान विश्व के कई हिस्सों की यात्रा की और अपने यात्राओं का विवरण तथा अनुभव दर्शाने के लिए “रिहला” नामक ग्रंथ लिखा।

फ्रांस्वा बर्नियर (François Bernier):

फ्रांस्वा बर्नियर एक फ्रेंच यात्री और चिकित्सक थे।

उन्होंने आगे बढ़ते हुए मुग़ल सम्राट और समाज का विवेचन किया और अपने अनुभवों को “Travels in the Mughal Empire” नामक पुस्तक में लिखा।

मुग़ल काल:

मुग़ल साम्राज्य 16वीं से 19वीं सदी तक भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण युग था।

अकबर, जहाँगीर, शाहजहाँ, और आउरंगजेब जैसे मुग़ल सम्राटों ने कला, साहित्य, और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान किया।

इस समयकाल में विविधता और साहित्यिक अभिवृद्धि हुई और इसे “सोने की युग” कहा जाता है।

इन व्यक्तियों और समयकाल के चरित्रों की चर्चा आपको इस अध्यय में विभिन्न साहित्यिक, सांस्कृतिक, और ऐतिहासिक पहलुओं को समझने में मदद करेगी।

यात्रा कई उदेश्यों के लिए की जाती है और विभिन्न लोग विभिन्न कारणों से यात्रा करते हैं। यहां कुछ मुख्य उदेश्यों की सूची है:

पर्यटन और मनोरंजन

बहुत से लोग यात्रा करते हैं ताकि वे नए स्थानों को देखें, नई सांस्कृतिक अनुभव प्राप्त करें और अन्य स्थानों की सुंदरता का आनंद लें।

धार्मिक यात्रा

Class 12th History Chapter 5 धार्मिक यात्राएं धार्मिक स्थलों की यात्रा को दर्शाती हैं, जैसे कि विभिन्न धार्मिक तीर्थस्थलों की यात्रा जैसे कि केदारनाथ, मेका, वाराणसी आदि।

शिक्षा और अध्ययन:

छात्र और शिक्षायात्री अक्सर शिक्षा और अध्ययन के उद्देश्य से यात्रा करते हैं। वे नए जगहों के विभिन्न सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, और वैज्ञानिक पहलुओं को समझने का प्रयास करते हैं।

व्यापार और रोजगार:

कई लोग व्यापारिक उदेश्यों से यात्रा करते हैं, जैसे कि व्यापारी, निर्यातकर्ता, और आपूर्तिकर्ता यात्राएं करके नए बाजारों और ग्राहकों के साथ मिलने का प्रयास करते हैं।

आर्थिक सुरक्षा

कुछ लोग अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए बाहर के क्षेत्रों में रोजगार की तलाश में यात्रा करते हैं।

स्वास्थ्य और आत्मा की खोज:

योग और मेडिटेशन के शैली में रहे लोग यात्रा करके अपने आत्मा की खोज करते हैं और स्वास्थ्य को सुधारने के लिए यात्रा करते हैं।

आवासीय यात्रा:

कुछ लोग अन्य स्थानों पर अपने दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताने के लिए यात्रा करते हैं।

इन उदेश्यों से यात्रा करना व्यक्तिगत और सामाजिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हो सकता है और इससे लोग नए अनुभव प्राप्त करते हैं जो उनके जीवन को रृचित कर सकते हैं।

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प्राचीन दौर में यात्राएं करने की समस्याएं

लंबा समय

सुविधाओं का अभाव

समुद्री लुटेरो का भय

प्राकृतिक आपदाएं

बीमारियां

रास्ता भटकने का भय

भारत की यात्रा करने वाले मुख्य यात्री

  • अल – बिरूनी
  • इब्न बतूता
  • फ्रांस्वा बर्नियर

कुछ अन्य यात्री जिन्होंने भारत की यात्रा की :-

  • मार्कोपोलो :- 13 वीं सदी में वेनिस से आए यात्री मार्कोपोलो के विवरण से दक्षिण भारत की सामाजिक व आर्थिक स्थिति पर प्रकाश पड़ता है ।
  • निकितिन :- रूस से ( 15 वी सदी )
  • सायदि अली रेइस :- तुर्की ( 16 वी सदी )
  • फादर मांसरेत :- स्पेन ( अकबर के दरबार मे गए )
  • पीटर मुंडी :- इंग्लैंड ( 17 वी सदी )
  • अब्दुर रज्जाक :- अब्दुर रज्जाक समरकंदी ने 1440 के दशक में दक्षिण भारत की यात्रा की । उसने कालीकट बंदरगाह को देख उसके आधार पर भारत को एक विचित्र देश बताया मंगलौर में बने एक मंदिर की प्रशंसा की है । विजय नगर का भी वर्णन किया है ।
  • शेख आली हाजिन :- ( 1740 का दशक ) भारत से अत्यधिक निराश हुआ । तथा भारत को एक घृणित देश बताया ।
  • महमूद वली वल्खी :- ( 17 वी सदी ) भारत से इतना प्रभावित हुआ कि कुछ समय के लिए सन्यासी बन गया ।
  • दुआर्ते बरबोसा :- 1518 ई० में पुर्तगाल से दक्षिण भारत की यात्रा की ।
  • वैपटिस्ट तैवेनियर :- 17 वी सदी का फ्रांसीसी जोहरी है जिसने कम से कम भारत की 6 बार यात्रा की ।

अलबिरूनी का जीवन :-

  • अलबरूनी का जन्म 973 ई० में ख्वारिज्म ( आधुनिक उजबेकिस्तान ) में हुआ ।
  • ख़्वारिश्म शिक्षा का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र था और अलबरूनी ने उस समय उपलब्ध सबसे अच्छी बहेतर शिक्षा प्राप्त की थी ।
  • वह कई भाषाओं का ज्ञाता था जिनमें सीरियाई , फारसी , हिब्रू तथा संस्कृत शामिल हैं ।
  • हालाँकि वह यूनानी भाषा का जानकार नहीं था पर फिर भी वह प्लेटो तथा अन्य यूनानी दार्शनिकों के कार्यों से पूरी तरह परिचित था जिन्हें उसने अरबी अनुवादों के माध्यम से पढ़ा था ।

अल-बिरूनी (Al-Biruni) ने भारत की यात्रा 11वीं सदी के आस-पास की थी। उन्होंने अपने जीवन के कई वर्षों तक भारत में रहा और वहां की सांस्कृतिक, वैज्ञानिक, और धार्मिक परंपराओं का अध्ययन किया।

अल-बिरूनी ने भारत आने के पीछे कई कारणों का समर्थन किया:

वैज्ञानिक अध्ययन:

अल-बिरूनी एक प्रमुख वैज्ञानिक थे और उन्हें विभिन्न विज्ञान शाखाओं में अपने अद्वितीय योगदान के लिए माना जाता है। उन्होंने भारतीय गणित, खगोल, रसायन, और भूगोल के क्षेत्र में अगरतला अध्ययन किया।

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सांस्कृतिक और धार्मिक अध्ययन:

अल-बिरूनी ने सांस्कृतिक और धार्मिक अध्ययन के क्षेत्र में भी अपनी गहराईयों से योगदान किया। उन्होंने विभिन्न धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया और भारतीय समाज, धर्म, और सांस्कृतिक परंपरा को समझने का प्रयास किया।

भूगोल और खगोल:

अल-बिरूनी ने अपने भूगोल और खगोलीय अध्ययन के क्षेत्र में भी भारत में गहरा अध्ययन किया। उन्होंने अपने कामों में भारत की भूमि-अवस्था, नदी सिस्टम, और खगोलीय पहलुओं का विवेचन किया।

साहित्यिक योजना:

अल-बिरूनी ने अपनी यात्रा के दौरान भारतीय ग्रंथों का भी अध्ययन किया और उनके आत्मकथा “तहकीकात” में इस योजना का वर्णन किया है।

अल-बिरूनी की यह यात्रा न केवल उनके वैज्ञानिक और शैलीक संदर्भों के लिए महत्वपूर्ण थी बल्कि उनके काम ने भारतीय सांस्कृतिक और वैज्ञानिक विकास में भी योगदान किया।

अल-बिरूनी एक प्रमुख इस्लामी वैज्ञानिक, शिक्षाविद, और लेखक थे जिनका योगदान विभिन्न क्षेत्रों में हुआ। उनके लेखन कार्यों की कुछ विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

तहकीकात (Tahqiqat):

अल-बिरूनी का प्रमुख लेखन कार्य “तहकीकात” है, जो उनकी सर्वोत्तम और सबसे महत्वपूर्ण रचना है। इसमें उन्होंने भूगोल, खगोल, भूतल शास्त्र, रसायन, गणित, इतिहास, सांस्कृतिक अनुसंधान आदि पर विवेचन किया।

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आत्मकथा:

अल-बिरूनी ने अपनी आत्मकथा भी लिखी जिसका नाम “तहकीकात” है, जिसमें उन्होंने अपने जीवन, यात्राएं, और अनुसंधानों के अनुभवों का विवरण किया।

सांस्कृतिक योजना:

उनका लेखन भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक योजना पर बहुत गहरा था। उन्होंने भारतीय साहित्य, कला, और धर्म के प्रति अपनी गहरी रुचि का अभिव्यक्ति किया।

वैज्ञानिक योजना:

अल-बिरूनी ने वैज्ञानिक योजना में भी अपने कार्यों के माध्यम से अपनी बेहतरीनता प्रस्तुत की। उनका योगदान खगोल, भूगोल, रसायन, और गणित में हुआ।

भूगोलीय योजना:

उनके भूगोल योजना में भी विशेषज्ञता थी, जिसमें भूमि-अवस्था, नदी सिस्टम, और भूगोलीय सुधार के लिए अनुसंधान शामिल था।

भूगोलीय निदर्शन

अल-बिरूनी ने अपने लेखन कार्यों में भूगोलीय निदर्शन का परिचय किया और भूगोल में उनके निदर्शन को महत्वपूर्ण बनाया।

अल-बिरूनी के लेखन कार्य विभिन्न विषयों पर उनके दृष्टिकोण और विवेचन का प्रतीक हैं, जो आज भी उनके योगदान की महत्वपूर्ण एक्सेंट्स हैं।

इब्न बतूता (Ibn Battuta) एक मुस्लिम यात्री और लेखक थे, जिन्होंने 14वीं सदी में आपातकालीन विश्व का विस्तार से अध्ययन किया और विभिन्न हिस्सों में यात्रा की। इसके बारे में कुछ मुख्य तथ्य निम्नलिखित हैं:

जन्म और शिक्षा:

इब्न बतूता का जन्म 24 फरवरी 1304 को मोरक्को के तांजिया नामक स्थान पर हुआ था।

उनके पिता का नाम अब्दुल्लाह और माता का नाम कमाला था।

यात्रा का प्रारंभ:

इब्न बतूता की पहली यात्रा 1325 में हुई, जब उन्होंने हज (मक्का की यात्रा) की शुरुआत की।

इसके बाद, उन्होंने दुनिया भर में लगभग 30 साल तक यात्रा की, जिसमें उन्होंने विभिन्न मुस्लिम और गैर-मुस्लिम साम्राज्यों का अध्ययन किया।

यात्रा के क्षेत्र:

इब्न बतूता ने अपनी यात्रा में विभिन्न क्षेत्रों का अध्ययन किया, जैसे कि नॉर्थ आफ्रीका, मध्य पूर्व, इस्लामी दुनिया, इंडोनेशिया, इंडिया, चीन, रूस, तुर्की, स्पेन, और अफ्रीका के सहारा क्षेत्र।

लेखन कार्य:

इब्न बतूता ने अपनी यात्राओं के अनुभवों को “रिहला” नामक एक लेखन कार्य में विवरणित किया। इसमें उनकी व्यक्तिगत अनुभव, सांस्कृतिक विवेचन, और सामाजिक तथा राजनीतिक स्थिति का विवरण है।

हज का सफर:

इब्न बतूता ने अपनी पहली यात्रा को हज के लिए किया था, लेकिन उनकी यात्रा इस मात्रा में नहीं थी कि वह बस एक मकान से दूसरे मकान जा रहे हैं, बल्कि उनकी यात्रा बहुत विस्तार से और सबसे दूर फैसले तक पहुंची।

सम्राटों और राजाओं की मुलाकात:

Class 12th History Chapter 5 इब्न बतूता ने अपनी यात्रा के दौरान विभिन्न सम्राटों, राजाओं, और नायकों से मुलाकातें कीं और उनकी आत्मकथा में इसका विवरण दिया है।

अंतिम दिन:

इब्न बतूता ने अपनी यात्रा की अंतिम दशक में मोरक्को लौटकर अपना जीवन समाप्त किया।

इब्न बतूता का यात्रा और उनके अनुभवों का विवरण उनकी आत्मकथा “रिहला” में दिया गया है, जो आ

इब्न बतूता की यात्रा ने उन्हें दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में ले जाया और उनकी यात्रा का विवरण उनकी आत्मकथा “रिहला” में मिलता है। यहां कुछ मुख्य तथ्य इब्न बतूता की यात्रा के बारे में हैं:

हज से शुरुआत:

इब्न बतूता की पहली यात्रा 1325 में हज (मक्का की यात्रा) के लिए हुई थी।

हज से शुरू होने वाली इस यात्रा का उद्दीपन उनके परिवार की परम्परा में हुआ था, जो हज पर जाने का आदान-प्रदान करते थे।

दुनिया के विभिन्न हिस्सों की यात्रा:

Class 12th History Chapter 5 इब्न बतूता ने हज के बाद दुनिया भर में लगभग 30 साल तक यात्रा की। उन्होंने विभिन्न सम्राटों, राजाओं, और सुलतानों के दरबारों में जाकर उनसे मुलाकातें कीं और उनकी आत्मकथा में इसका विवरण दिया है।

भूगोलीय स्थानों का अध्ययन

इब्न बतूता ने अपनी यात्रा के दौरान भूगोल, समुद्री यात्रा, और विभिन्न राज्यों के लोगों और संस्कृतियों का अध्ययन किया।

मुल्तान से चीन की यात्रा:

इब्न बतूता ने मुल्तान से चीन की यात्रा की, जिसमें उन्होंने हिमालय पर्वत श्रृंग, तिब्बत, और चीन के कई प्रांतों का अध्ययन किया।

सफरनामा “रिहला

इब्न बतूता ने अपनी यात्रा के अनुभवों को “रिहला” नामक एक सफरनामा में विवरणित किया। इसमें उनके सुनहरे क्षणों, सांस्कृतिक अनुभवों, और भूगोलीय ज्ञन का ब्यान शामिल है।

अफ्रीका की यात्रा

इब्न बतूता ने अफ्रीका के सहारा क्षेत्र में भी यात्रा की और उनका विवरण उनकी आत्मकथा में मिलता है।

अन्तिम दिन

Class 12th History Chapter 5 इब्न बतूता ने अपनी यात्रा के दौरान बहुत अनेक कठिनाईयों और जोखिमों का सामना किया, लेकिन उनकी अद्वितीय यात्रा का परिणाम था कि उन्होंने अपनी जीवनी को रिच और अनमोल बना दिया। उनकी यात्रा का अंतिम दिन मोरक्को में था, जहां उन्होंने अपने पूरे जीवन को समाप्त किया।


नारियल

  • इब्नबतूता द्वारा नारियल का वर्णन एक प्रकति के विष्मयकारी ( आश्चर्यचकित ) व्रक्षो के रूप में किया गया । भारतीय इसमे रस्सी बनाते थे या है । लोहे की किलो की बजाय इससे जहाज को सिलते थे ।

पान

  • इब्नबतूता पान का वर्णन भी करता है । पान की बेल के बारे में इब्नबतूता ने लिखा की इस पर कोई फल नहीं होता इसे केवल पत्तियों के लिए उगाया जाता है । वह नारियल व पान से पहले परिचित नही था ।

इब्नबतूता द्वारा शहरों का वर्णन

  • उसके अनुसार दिल्ली भारत का सबसे बड़ा शहर था । दौलताबाद ( महाराष्ट्र ) भी कम नही था और आकर में यह दिल्ली को चुनौती देता था ।
  • दिल्ली धना – बसा शहर था । जिसके चारों और प्राचीर थी । इस शहर मे 28 द्वार थे । जिसमे बदायूँ दरवाजा सबसे विशाल था । माण्डवी द्वार के भीतर एक आनाज की मड़ी होती थी । दिल्ली शहर एक बेहतरीन कब्रगाह ( कब्रिस्तान ) थी । कब्रगाह में चमेली तथा गुलाब जैसे फूल उगाये जाते थे । जो सभी मौसम में खिले रहते थे ।
  • आधिकाश शहरों में एक मस्जिद तथा मंदिर होता था । बंद नगरो में नर्तको , संगीतकारों और गायको के सार्वजनिक प्रर्दशन के लिए स्थान भी चिनिहत होते थे । यद्यपि इब्नबतूता की शहरों की समृद्धि का वर्णन करने में अधिक रुचि नही थी ।

इब्न बतूता द्वारा संचार प्रणाली का वर्णन

  • इब्नबतूता दिल्ली सल्तनत की डाक प्रणाली ( संचार व्यवस्था ) का विवरण देता है । लगभग सभी व्यापारिक मार्गो पर सराय तथा विश्रामशाला या विश्रामगृह स्थापित किये गए ।
  • इब्नबतूता डाक प्रणाली की कार्य कुशलता देखकर चकित हो गया । इसमे न केवल लंबी दूरी तक सूचना भेजना व उदार प्रेरित करना सम्भव हुआ बल्कि अल्पसूचना पर माल भेजना भी ।
  • डाक प्रणली इतनी कुशल थी कि जहाँ सिंह से दिल्ली की यात्रा में 50 दिन लगते थे वही गुप्तचरों की खबरें सुल्तान तक इस डाक व्यवस्था के माध्यम से मात्र 5 दिन में पहुँच जाती थी ।
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