Thursday, April 25, 2024
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महिलाएं कैसे तरावीह पढ़े: तरावीह क्यों है जरूरी रमजान के महीने में

महिलाएं कैसे तरावीह पढ़े: तरावीह क्यों है जरूरी रमजान के महीने में- असलामवालैकुम आप सभी को में मुस्कान आज आपको बताउंगी कि कैसे आप तरावीह की नमाज़ अदा कर सकते है जैसा की आप सभी जानते है रमजान चल रहे है और ऐसे में हर मुस्लमान ख्वातीन, रोज़े रखती है और शक़्स भी तो कहा जाता है जो भी हम गुनाह करते है तो उसकी माफ़ी के लिए रमजान आता है हम सभी रोजा रखकर क़ुरान की तिलावत करते है और पांचो वक़्त की नमाज़ अदा करते है और साथ ही साथ तरावीह पढ़ना भी जरूरी है और यह फ़र्ज़ है तो आज में आप सभी को तरवीह किस तरह पढ़ी जा सकती है उसके के बारे में बताने जा रही हूँ

महिलाएं तरावीह कैसे पढ़ती हैं

महिलाएं कैसे तरावीह पढ़े: तरावीह क्यों है जरूरी रमजान के महीने में- तरावीह नमाज, ईस्लाम में रमज़ान महीने के दौरान अदा की जाने वाली एक विशेष नमाज है। यह नमाज रमज़ान के पूरे महीने में रोज़ादारों के लिए महत्वपूर्ण होती है। तरावीह नमाज को तरावीह नबवी (Tarawih Nabvi) भी कहा जाता है, क्योंकि इसे प्रारंभ में प्रोफ़ेसर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अपने सहाबा के साथ पढ़ा था।

रमज़ान के महीने में मुसलमान रोज़ा रखते हैं, जिसमें उन्हें सारे दिन खाने-पीने की छूट नहीं होती है। रोज़ादारों के लिए तरावीह नमाज एक विशेष महत्व रखती है क्योंकि इसमें उन्हें रमज़ान के महीने में इबादत, तिलावत और ध्यान की अधिक अवसर मिलता है।

महिलाएं कैसे तरावीह पढ़े: तरावीह क्यों है जरूरी रमजान के महीने में- महिलाएं भी तरावीह नमाज पढ़ सकती हैं, हालांकि कुछ समाजों या कॉम्युनिटीज़ में इसे महिलाओं के लिए मस्जिद में नहीं पढ़ा जाता है और वे अपने घरों में ही नमाज अदा करती हैं। लेकिन कई जगहों पर मस्जिदों में महिलाएं भी तरावीह नमाज के लिए आजादी प्राप्त कर रही हैं।

महिलाएं यदि मस्जिद में तरावीह नमाज पढ़ना चाहती हैं, तो उन्हें इसे पढ़ने की अनुमति और सुविधा के बारे में अपनी स्थानीय मस्जिद के नियमों की जाँच करनी चाहिए। वे अपने घरों में भी नमाज पढ़ सकती हैं, यह उनकी स्वतंत्रता पर निर्भर करता है।

नियत

महिलाएं कैसे तरावीह पढ़े:- दो रकात सुन्नत तरावीह की नियत: “नियत करती हूं दो रकात नमाज सुन्नत तरावीह की, अल्लाह तआला के वास्ते, वक्त ईशा का, मुंह मेरा मक्का कअबा शरीफ की तरफ, अल्लाहु अकबर

  • तरावीह 20 रकअतों में पढ़ी जाती है, हर दो रकअत के बाद सलाम फेरते हुए।
  • पुरुषों की तरह महिलाएं भी जमाअत में या अकेले तरावीह पढ़ सकती हैं।
  • मस्जिद में जाना बेहतर है, लेकिन घर में तरावीह पढ़ना भी ज़ायज़ है।
  • घर में पढ़ते समय, पर्दे के पीछे खड़े होकर नमाज़ पढ़ना बेहतर है।
  • तरावीह में क़ुरआन की तिलावत ज़्यादा होती है, इसलिए लंबी सूरहें पढ़ने की बजाय छोटी सूरहें और आयतें पढ़ना बेहतर है।

तरावीह के फायदे

तरावीह नमाज़ रमजान के महीने में अल्लाह की विशेष रहमत और مغفرत पाने का ज़रिया है। यह नमाज़ नफ़्स की तराश और पाकीज़गी का ज़रिया है। तरावीह नमाज़ में जमाअत के साथ इबादत करने का सवाब मिलता है। यह नमाज़ रमजान की रातों को ज़िंदादिली और इबादत में गुजारने का ज़रिया है।

महिलाओं के लिए तरावीह

तरावीह नमाज़ महिलाओं के लिए वाजिब नहीं है, लेकिन यह ज़रूर मुस्तहब है। अगर कोई महिला तरावीह नमाज़ पढ़ना चाहती है, तो उसे घर में या मस्जिद में पर्दे के पीछे खड़े होकर पढ़ना चाहिए।

तरावीह नमाज़ पढ़ते समय महिलाओं को पुरुषों से अलग खड़ा होना चाहिए। तरावीह नमाज़ पढ़ते समय महिलाओं को अपनी आवाज़ धीमी रखनी चाहिए।

 

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