Wednesday, May 22, 2024
HomeComputer & TechnologyGPRS क्या है और कैसे काम करता है

GPRS क्या है और कैसे काम करता है

GPRS क्या है और कैसे काम करता है – GPRS – General Packet Radio Service असल में एक 2G evolution थी GSM की जो देती  थी packet-switched data capability वो भी speeds up to 172 kbps में.

GPRS असल में मोबाइल संचार विश्व में बड़ी तेजी चल रहा है. ये मूल रूप से 2G और 3G सेलुलर संचार नेटवर्क की विश्व में एक पैकेट-उन्मुख मोबाइल डेटा मानक है मोबाइल संचार के लिए. GPRS को European Telecommunications Standards Institute (ETSI) के साथ  बनाया गया था.

GPRS क्या है

GPRS override करता है wired associations को, क्यूंकि ये framework में स्ट्रीमलीनेड

access  रहता है packet information’s network के तरह जैसे की web. Packet radio standard को utilize किया जाता है GPRS के साथ वो भी transport करने के लिए client information packets को एक structured route में, GSM versatile स्थित होता  है

और external packet information networks के बीच में. इन packets को straightforwardly direct किया जाता है packet changed systems को वो भी GPRS portable stations से.

जीपीआरएस की परिभाषा

General Packet Radio Service एक तरह का packet-switching technology होता है जो की enable करता है data transfers वो भी cellular network’s global system के बीच से mobile communications (GSM) के लिए, वहीँ  देता है end-to-end,

wide-area wireless IP connectivity भी.

GPRS transmission rate को improve किया जा सकता है 56Kbps से 114Kbps तक इसमे  existing wireless applications की जरुरत नहीं होती है एक एक इंटरमीडीआरय

converter के कारण connection और transmission बन जाते हैं ज्यादा convenient  आसान तरीके से, users आसानी से log on कर सकते हैं Internet में, वहीँ साथ में वो participate भी कर सकते हैं interactive communication में जैसे की वीडियो

conference, और users उसी समान video network (VRN) में connect हो सकते हैं network के साथ बिना dial-up के ही.

GPRS Full Form हिंदी

  • GPRS की फुल फॉर्म “General Packet Radio Service” होती है, हिंदी भाषा में इसका अर्थ
  • यह एक ऐसी service है जो की data को radio waves के साथ  transmit करने का काम करती है.
  • इसे हिंदी में “सामान्य पैकेट रेडियो सवाएं “ कहा जाता है.

जीपीआरएस का मालिक कौन है?

GPRS specifications को लिखी गयी है European Telecommunications स्टैण्डर्ड

Institute (ETSI) के साथ, यह एक European counterpart है American National Standard Institute (ANSI) की. इसको  हम GPRS का मालिक मान सकते हैं

जीपीआरएस की मापदंड

GPRS एक standard ETSI के अंतर्गत वहीँ इसे बाद में transfer कर दिया गया.

3rd Generation Partnership Project (3GPP)  वहीँ इसे publish कर दिया गया। सन 1998 में. एक standard के तोर पर, ये compatible होता ह।  2G, 3G और WCDMA networks के साथ वो भी via GPRS Core Network के साथ.

GPRS एक packet-switching communications protocol होता है।जहां इसे  पहले दुसरे circuit-based switching protocols का इस्तमाल किया जाता था 2G networks पर.

यह मतलब ये है इसमें data delivery होती है best-effort वाली; latency और deliverability थोडा vary कर सकती है समय समय पर. Quality of Service (QoS) आसानी से manageable नहीं होती है GPRS में क्यूंकि ये इसी में रहती है कितनी संख्या में  दुसरे उस service को share कर रहे हैं.

जीपीआरएस के प्रमुख विशेषताऐं

आप जानते हैं की कौन सी तीन key features है GPRS की जो की describe करती हैं wireless packet data को:

  1. हमेशा online वाली feature – ये हटा देती है dial-up process जो की applications को बना देती है केवल one click away.
  2. यह एक upgrade है होने मेह्जुदा systems के साथ – इसमें Operators को उनके equipment को replace नहीं करना होता है;जबकी , GPRS एक added features है उनके मेह्जुदा existing infrastructure के ऊपर.
  3. integral part वो भी future 3G systems का – GPRS एक packet data core network होता है 3G systems EDGE और WCDMA के लिए.GPRS का लक्ष्य

GPRS एक पहला कदम है end-to-end wireless infrastructure की और इसकी कुछ लक्ष्य भी है जिनके बारे  में जानते हैं :

  • समान infrastructure वो भी अलग अलग air interfaces के लिए
  • Integrated telephony और Internet इंफ्रास्ट्रक्चर
  • Consistent IP services प्रदान करना
  • Leverage करना industry investment वो भी IP में
  • Open architecture का होना
  • इसकी Service innovation पूरी तरह से independent होती है infrastructure से
  • GPRS में कैसी Services Offer की जाती हैं?

अब चलिए जानते हैं की GPRS के द्वारा प्रदान की जाने वाली Services के विषय में.

  •  Multimedia messaging सर्विस
  •  Instant messaging और प्रजेंस
  •  Push-to-talk over सेलुलर
  •  Push-to-talk over सेलुलर
  •  Point-to-Point और Point-to-Multipoint सर्विसेज

GPRS के द्वारा Support किये जाने वाले Protocols क्या क्या हैं?

  • हम  जानते हैं की वो कौन से Protocols हैं जिन्हें की GPRS Support करता है.
  • Internet Protocol (IP)2. Point-To-Point Protocol (PPP)
जीपीआरएस के फायदे क्या है?

GPRS technology बहुत सारे benefits और advantages देती  है users और network operators को वो भी basic GSM system की समान में. इसे widely डेप्लॉय

किया जाता था एक realistic data capability देने के लिए via cellular telecommunications technology. आप जानते हैं की GPRS के advantages क्या हैं :-

Higher Data Rate 

GPRS shorter access times में higher data rates देती हैं. GPRS देतीया करती है transfer rate up to 115kbit/s (इसमें maximum होती है 171.2kbit/s, excluding FEC). इसका मतलब है यह की GPRS और ISDN users आसानी से Internet को surf कर सकते हैं वो भी portable computers के जरिये.

Low Connection Cast 

GSM network में, high resource utilization होती हैं. GPRS ने पहली बार

introduce किया packet-switching, transmission mode सही दरिके से circuit-switching GSM data transmission mode का इस्तमाल होने लगा,  ये बहुत  जरूरी था  wireless resource scarcity के लिए.

अब GPRS Users की billing के लिए communication की data volume को main basis किया जाता है, जिससे की ये आसानी से जान लेते  है की user को service प्रयोग करने में कितना pay करना होता है. अब GPRS users की connection time  भले ही थोड़ी देर क्यूँ न हो, लेकिन उन्हें केवल pay करना होता है relatively low connection cost.

Short Access Times 

GPRS mainly प्रदान करता है एक connection mobile users और remote डाटा

networks (Support TCP/IP, X.25 और दुसरे networks को), जिससे की mobile users को दे दिया  जा सके high-speed wireless IP और wireless X.25 सर्विस

Easy बिलिंग

GPRS packet transmission offer करता है एक ज्यादा user-friendly billing वो भी

circuit switched services की billing के मुताबिक. Circuit switched services की बात करें तब, billing ही  होती है connection के duration के ऊपर नहीं होती है उन applications के लिए जिनमें bursty traffic होती है. इसमें user को pay करना होता है

entire airtime को, वो भी idle periods में कोई भी packets को भेजा न जाता हो (e.g., जब एक user read करता है एक Web page).

इससे  अलग, packet switched services में, billing ऊपर  होता है transmitted

data के परिणाम के ऊपर. इसमें user की advantage है वे भले ही “online” होते हैं एक लम्बे समय के लिए  उन्हें billed किया जाता है transmitted data volume के आधार पर.

Speed:

ये बहुत बड़ा  benefit है GPRS technology की वो offer करती है higher data rate वो भी GSM की तुलना में. Rates up to 172 kbps मुमकिन हैं, वहीँ maximum data रेट्स

realistically achieve किया जा सकता है under most conditionse इन की range 15 – 40 kbps में होती है.

 GSM में circuit switched techniques का प्रयोग होता था, वहा  GPRS टेक्नोलॉजी

प्रयोग करती हैं packet switching in line वो भी Internet के साथ. इससे अधिक  efficient use होता है available capacity को वहीँ ये allow करती है greater commonality वो भी Internet techniques.

Always on connectivity:

GPRS की एक तरफ advantage यह है की ये offer करती है “Always On” capability. जब circuit switched techniques का प्रयोग होता है तब charges पर आधारित होते हैं ये समय के साथ  कितनी देर तक एक circuit का प्रयोग होता ह।कब तक call चल रही है. वहीँ packet switched technology में charges में  हिसाब किया जाता है amount of data carried के ऊपर जो की services provider’s capacity के साथ  इस्तमाल किया जाता है वहीँ, always on connectivity कामयाब होती है.

ज्यादा applications:

Packet switched technology के साथ always on connectivity जब combined होती है higher data rates के साथ, तब उतनी ज्यादा possibilities पैदा होती है नए applications के लिए. GPRS के आने से Blackberry जैसे Mobile या PDA का growth बढ़ने  लगी

 GPRS की Capabilities को ज्यादा develop के लिए, उसमें further advances दूसरी system जैसी की EDGE या Enhanced GPRS, EGPRS को develop किया गया..

GPRS में किस Switching का इस्तमाल किया जाता है?

GPRS technology में Packet Switched Data का प्रयोग होता है न की circuit switched data का. यह technique ज्यादा efficient प्रयोग करती हैं available.

capacity का  कारण यह है की ज़्यदा data transfer occur होती है “bursty” fashion में. इसमें transfer होती है short peaks में, वहीँ ये followed होती है breaks के साथ बहुत ही कम या no activity होती है.

एक traditional approach के साथ  एक circuit को permanently switched कर दिया जाता था एक particular user से  कहा जाता है एक circuit switched mode. Data Transfer की “bursty” nature के तरफ से इसका मतलब है की कुछ ऐसे भी periods

होते हैं जब ये किसी भी तरह की data carry नहीं कर रही होती है.इस situation को improve करने के लिए, overall capacity को shared कर दिया जाता है several users के बीच में.होते हैं जब ये किसी भी प्रकार की data carry नहीं कर रही होती है.इस situation को improve करने के लिए, overall capacity को shared कर दिया जाता है several users के बीच में.

इसे पाने करने के लिए, data को split किया जाता है packets और tags में जिन्हें की इन्सर्ट

किया जाता है packet me इसे देदिया जाता है destination address. Packets वो भी अलग अलग sources से उन्हें transmit किया जाता है link के बिच तो possible नहीं है की data burst वो भी अलग अलग users के  एक समय में occur हो, लेकिन overall resource को share कर ऐसे fashion में, channel, या combined channels को

बहुत अच्छे  से ज्यादा इस्तमाल किया जा सकता है. इसी approach को packet switching कहा जाता है, और ये काफी सारे cellular data systems के core में हुआ करता था, और इस case में GPRS में PACKET SWITCHING VS CIRCUIT SWITCHING

RELATED ARTICLES
5 3 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments

Most Popular