Thursday, April 25, 2024
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Tata Group का सीईओ रतन टाटा जीवन परिचय Ratan Tata Biography in Hindi

रतन टाटा जीवन परिचय-रतन टाटा जीवनी, जीवन परिचय (शिक्षा, जन्म तारिक पुरस्कार, माता, पिता, पत्नी, नागरिता, जाती,आयु, करियर,कुल संपत्ति, थॉट्स) Ratan Tata Biography (education, age, cast, date of birth





रतन टाटा  जिसे हर कोई जानता है। लेकिन सिर्फ एक उघोपगति के रूप में। उनके निजी जीवन के बारे में शायद ही किसको पता हो इसलिए हर कोई उनके जीवन से जुड़ी कहानी को अपने शब्दों में सबके दिखाना चाहते     है । वो इसके जरिए ये बताना चाहता है कि, वो कैसे इतने सक्सेफुल उघोगपति बने। कहां हुआ उनका जन्, कहां से शिक्षा और कैसे उन्होंने अपने जीवन में इतनी सफलता हासिल की। ऐसा क्या है कि, आज लोग उनके बारे में जानने के लिए इतने उत्सुक होजाते है । ऊंचाईयों को छूने वाला उघोगति रतन टाटा आखिर कैसे हुआ लोगों के बीच इतना पॉपुलर । रतन टाटा के जीवन के कुछ ऐसे ही पहलुओं पर आज हम चर्चा करेंगे

रतन टाटा का जीवन परिचय

नाम रतन टाटा
जन्म 28 दिसंबर 1937, सूरत (गुजरात)
माता-पिता का नाम नवल टाटा (पिता) और सोनू टाटा (माता)
शिक्षा कहां से की प्राप्त कॉर्नेल विश्वविधालय, हार्वर्ड विश्वविधालय
जीवनसाथी अविवाहित
व्यवसाय टाटा समूह के निवर्तामान अध्यक्ष
व्यवसाय की शुरूआत 1962
पुरस्कार पद्मा विभूषण (2008) और ओबीई (2009)
शिक्षा बी.एस. डिग्री संरनात्मक इंजीनियरिंग एवं वास्तुकला में उन्नत प्रबंधन कार्यक्रम
नागरिकता भारतीय

रतन टाटा देश के प्रसिद्ध उघोगपति का जन्म 28 दिसंबर 1937 को सूरत रतन टाटा जीवन परिचय-शहर,राज्ये गुजरात में हुआ था रतन टाटा नवल टाटा के बेटे हैं। जिनको नवजबाई टाटा ने गोद लिया था। ऐसा इसलिए क्योंकि नवजबाई टाटा के पति का निधन हुआ था   जिसके बाद वो अकेली हो गए । इसलिए उन्होंने इन्हें गोद लेना हुआ।  जब रतन टाटा 10 साल के और उनके छोटे भाई जिमी टाटा 7 साल के हुए , तो उनके माता-पिता 1940 में एक-दूसरे से अलग ही हो  गया । जिसके कारण दोनों भाईयों को एक दूसरे से भी अलग होना पड़ा। लेकिन उनकी दादी नवजबाई ने दोनों पोतो का पालन-पोषण करने में कोई कमी दी। वो नियमो  को लेकर जितनी भाबूक थी। उतनी ही नरम दिल की भी  थी। आपको हम  बता दें कि, रतन टाटा का एक सौतेला भाई जो। नोएल टाटा। बचपन से ही इन्हें पियानों सीखने का और क्रिकेट खेलने काफी अच्छा लगता था ।

रतन टाटा की शिक्षा

रतन टाटा की शुरूआती शिक्षा मुंबई के कैंपियन स्कूल से पूरी की । जहां उन्होंने 8 वीं कक्षा तक शिक्षा तक करि उसके बाद वो कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल में आपहुचे। स्कूली शिक्षा खत्म करने के बाद उन्होंने अपनी बी.एस वास्तुकला में स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग के साथ कॉर्नेल विश्वविधालय से 1962 में ख़तम की।  इसको पूरा करने के बाद उन्होंने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में एडमिशन लिया जहां उन्होंने 1975 में एडवांस मैनेजमेंट का कोर्स कंप्लीट करा और

रतन टाटा के करियर की शुरूआत

रतन टाटा जीवन परिचय-रतन टाटा ने भारत में वापसी करने से पहले लॉस एंजिल्स, कैलिफोर्निया में जोन्स एंड एमोंस में थोड़े समय के लिए काम करना चालू  किया। लेकिन अपनी दादी की बिगड़ती तबीयत को देखते हुए  अमेरिका में बसने का सपना छोड़कर उन्हें वापस इंडिया आना हुआ। भारत आने के बाद उन्होंने आईबीएम के साथ काम किया लेकिन जेआरडी टाटा को ये पसंद नहीं था  और उन्होंने रतन टाटा को टाटा ग्रुप से साथ काम करने का मौका प्रदान किया। इसके बाद से ही उनके करियर की असली नींव रखी गई।

1961 में उन्होंने टाटा के साथ काम करना शुरू किया। पहले कुछ शुरूआती दिनों में उन्होंने टाटा स्टील के शॉप फ्लोर पर काम दिया। उसके बाद वो धीरे-धीरे टाटा ग्रुप की और कंपनियों के साथ जुड़ना चालू किता । एक समय आया जब उन्हें 1971 में राष्ट्रीय रेडियों और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी (नेल्को) में डायरेक्टर इंचार्ज के लिए चुना गया।

रतन टाटा जीवन परिचय-1981 में उन्हें टाटा का अध्यक्ष चुना गया। उस समय कंपनी काफी घाटे को घेल रही थी और बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी सिर्फ 2% था और घटा 40% था। कुछ साल बाद रतन टाटा ने कंपनी को काफी मुनाफा दिल्या इसके कुछ समय बाद उन्हें 1991 में टाटा ग्रुप का उत्तराधिकारी बनाया गया।

रतन टाटा के इस पद को संभालने के बाद मानों टाटा ग्रुप में चमत्कार होगया हो। ऐसा लग रहा था आसमान पर भी सिर्फ टाटा का ही नाम लिखा हो   उनके कार्यकाल में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने पब्लिक इशू जारी करे जिसके बाद टाटा मोटर्स को न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टड हो गई

रतन टाटा जीवन परिचय-साल 1998 में टाटा ने अपनी पहली भारतीय कार तैयार की जिसका नाम रखा था  टाटा इंडिका। इसके बाद टाटा ने टेटली, टाटा मोटर्स ने जैगुआर लैंड रोवर और टाटा स्टील ने कोरस को तैयार किया। जिसके बाद भारतीय उघोग की लिस्ट में टाटा का नाम दर्ज  कर दिया गया दुनिया की सबसे सस्ती कार यानि टाटा नैनो भी रतन टाटा की एक सपना था  जिसको लोगों ने काफी पसंद किया था। रतन टाटा एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं जो कभी भी झूठी चमक दमक नहीं रखते  वो सिर्फ काम को अंजाम देना  जानते हैं, उसे किस तरह से अपने व्यवसाय में लगाना है और उसका इस्तेमाल कैसे करना है हमेशा से ही उनकी सोच यही थी की ।

रतन टाटा जीवन परिचय-रतन टाटा 28 दिसंबर 2012 को टाटा समूह की सभी कार्यकारी जिम्मेदारियों से रिटायर होंगे । जिसके बाद उनकी ये जगह 44 वर्षीय साइरस मिस्त्री को दी गई। लेकिन रतन टाटा ने इस जगह को देने से पहले उनके सामने अपनी बात रखी। जिसके मुताबिक उन्हें 1 साल तक रतन टाटा के साथ काम सिखने को कहा गया। जिसको उन्होंने मन भी लिया।

आपको बता दें कि, सायरस मिस्त्री पलौनजी मिस्त्री के छोटे बेटे थे जो शपूरजी-पलौनजी के प्रबंध निदेशक का काम भी कर चुके है  । सायरस मिस्त्री ने लंदन के इंपीरियल कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग में लंदन बिजनेस स्कूल से डिग्री प्राप्त की है। वो टाटा समूह के साथ 2006 से काम कर रहे हैं। जिसके बाद अब वो इस दिशा में ही आगे  इसा ही काम करते रहेंगे। हालांकि इस समय वो टाटा से रिटायर हो गए हैं। लेकिन इसके बाद भी रतन टाटा जीवन परिचय Ratan Tata Biography in Hindi


रतन टाटा देश के चहेते उघोगपतियों का एक ऐसा चेहरा, जिसे हर कोई जानता है। लेकिन सिर्फ एक उघोपगति के रूप में। उनके निजी जीवन के बारे में शायद ही कोई जानता होगा। इसलिए हर कोई उनके जीवन से जुड़ी कहानी को अपने शब्दों में सबके सामने उतारना चाहता है। वो इसके जरिए ये बताना चाहता है कि, वो कैसे इतने सक्सेफुल उघोगपति बने। कहां हुआ उनका जन्, कहां से शिक्षा और कैसे उन्होंने अपने जीवन में इतनी सफलता हासिल की। ऐसा क्या है कि, आज लोग उनके बारे में जानने के लिए इतने उत्सुक हैं। ऊंचाईयों को छूने वाला उघोगति रतन टाटा आखिर कैसे हुआ लोगों के बीच इतना प्रसिद्ध। रतन टाटा के जीवन के कुछ ऐसे ही पहलुओं पर आज हम नजर डालेंगे

रतन टाटा जीवन परिचय-रतन टाटा देश के प्रसिद्ध उघोगपति का जन्म 28 दिसंबर 1937 को सूरत शहर में हुआ। रतन टाटा नवल टाटा के बेटे हैं। जिनको नवजबाई टाटा ने गोद लिया था। ऐसा इसलिए क्योंकि नवजबाई टाटा के पति का निधन हो गया था, जिसके बाद वो अकेली पड़ गई। इसलिए उन्होंने इन्हें गोद लिया। जब रतन टाटा 10 साल के और उनके छोटे भाई जिमी टाटा 7 साल के थे, तो उनके माता-पिता 1940 में एक-दूसरे से अलग हो गए। जिसके कारण दोनों भाईयों को भी अलग होना पड़ा। लेकिन उनकी दादी नवजबाई ने दोनों पोतो का पालन-पोषण करने में कोई कमी नहीं छोड़ी। वो अनुशासन को लेकर जितनी सख्त थी। उतनी ही नरम थी। आपको बता दें कि, रतन टाटा का एक सौतेला भाई भी है जिसका नाम है नोएल टाटा। बचपन से ही इन्हें पियानों सीखने का और क्रिकेट खेलने का काफी शौक था।

रतन टाटा की शिक्षा

रतन टाटा की शुरूआती शिक्षा मुंबई के कैंपियन स्कूल से हुई। जहां उन्होंने 8 वीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की। उसके बाद वो कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल में चले गए। स्कूली शिक्षा खत्म करने के बाद उन्होंने अपनी बी.एस वास्तुकला में स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग के साथ कॉर्नेल विश्वविधालय से 1962 में पूरी की। इसको खत्म करने के बाद उन्होंने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में एडमिशन लिया जहां उन्होंने 1975 में एडवांस मैनेजमेंट का कोर्स कंप्लीट किया।

रतन टाटा के करियर की शुरूआत

रतन टाटा ने भारत में वापसी करने से पहले लॉस एंजिल्स, कैलिफोर्निया में जोन्स एंड एमोंस में थोड़े समय के लिए काम किया। लेकिन अपनी दादी की बिगड़ती तबीयत को देख अमेरिका में बसने का सपना छोड़कर उन्हें वापस इंडिया आना पड़ा। भारत आने के बाद उन्होंने आईबीएम के साथ काम किया लेकिन जेआरडी टाटा को ये पसंद नहीं आया और उन्होंने रतन टाटा को टाटा ग्रुप से साथ काम करने का मौका दिया। इसके बाद से ही उनके करियर की असली नींव रखी गई।

रतन टाटा जीवन परिचय-1961 में उन्होंने टाटा के साथ काम करना शुरू किया। पहले कुछ शुरूआती दिनों में उन्होंने टाटा स्टील के शॉप फ्लोर पर काम किया। उसके बाद वो वो धीरे-धीरे टाटा ग्रुप की और कंपनियों के साथ जुड़ गए। एक समय आया जब उन्हें 1971 में राष्ट्रीय रेडियों और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी (नेल्को) में डायरेक्टर इंचार्ज के लिए चुना गया।

1981 में उन्हें टाटा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उस समय कंपनी काफी घाटे में चल रही थी और बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी सिर्फ 2% था और घटा 40% था। कुछ साल बाद रतन टाटा ने कंपनी को काफी मुनाफा पहुंचाया। इसके कुछ समय बाद उन्हें 1991 में टाटा ग्रुप का उत्तराधिकारी बनाया गया।

रतन टाटा जीवन परिचय-रतन टाटा के इस पद को संभालने के बाद मानों टाटा ग्रुप की किस्मत ही बदल गई हो। ऐसा लग रहा था आसमान पर भी सिर्फ टाटा का ही नाम लिखा है।  उनके कार्यकाल में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने पब्लिक इशू जारी किया। जिसके बाद टाटा मोटर्स को न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टड किया गया।


साल 1998 में टाटा ने अपनी पहली भारतीय कार तैयार की जिसका नाम था टाटा इंडिका। इसके बाद टाटा ने टेटली, टाटा मोटर्स ने जैगुआर लैंड रोवर और टाटा स्टील ने कोरस को तैयार किया। जिसके बाद भारतीय उघोग की लिस्ट में टाटा का नाम दर्ज हो गया। दुनिया की सबसे सस्ती कार यानि टाटा नैनो भी रतन टाटा की सोच का एक हिस्सा है। जिसको लोगों ने काफी पसंद किया था। रतन टाटा एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं जो कभी भी झूठी चमक दमक में विश्वास नहीं रखता। वो सिर्फ काम करना जानते हैं, उसे किस तरह से अपने व्यवसाय में लगाना है और उसका इस्तेमाल कैसे करना है हमेशा से ही उनकी सोच यही रही है।

रतन टाटा 28 दिसंबर 2012 को टाटा समूह की सभी कार्यकारी जिम्मेदारियों से रिटायर हो गए। जिसके बाद उनकी ये जगह 44 वर्षीय साइरस मिस्त्री को दी गई। लेकिन रतन टाटा ने इस जगह को देने से पहले उनके सामने अपनी बात रखी। जिसके मुताबिक उन्हें 1 साल तक रतन टाटा के साथ काम करने को कहा गया। जिसको उन्होंने स्वीकार कर लिया।

आपको बता दें कि, सायरस मिस्त्री पलौनजी मिस्त्री के छोटे बेटे हैं जो शपूरजी-पलौनजी के प्रबंध निदेशक भी रह चुके हैं। सायरस मिस्त्री ने लंदन के इंपीरियल कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग में लंदन बिजनेस स्कूल से डिग्री हासिल की है। वो टाटा समूह के साथ 2006 से काम कर रहे हैं। जिसके बाद अब वो इस दिशा में ही आगे काम करते रहेंगे।

रतन टाटा जीवन परिचय-हालांकि इस समय वो टाटा से रिटायर हो गए हैं। लेकिन इसके बाद भी को कामकाज में जुटे हुए हैं। हाल ही में उन्होंने भारत की इ-कॉमर्स कंपनी स्नैपडील कंपनी में इंवेस्ट करा इसके बाद अर्बन लैडर और चाइनीज मोबाइल कंपनी जिओमी में भी इंवेस्ट किया। रतन टाटा भले ही टाटा ग्रुप से रिटायर हो गए हैं। लेकिन टाटा संस के 2 ट्रस्टों के चेयरमैन  की जगह   पर  वीराज मन रहेंगे

रतन टाटा ने भारत के अलावा कई देशों के संगठनों में भी अपनी अहम भूमिका नबाही ha  वह प्रधानमंत्री की व्यापार उघोग परिषद और राष्ट्रीय विनिर्माण प्रतिस्प्रर्धात्मकता परिषद के सदस्य भी हैं। इसके साथ ही वो कई कंपनियों के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर भी हैं।



रतन टाटा के रोचक तथ्य

टाटा ग्रुप 100 कंपनियों के साथ आप पूरे विश्व में पांचवी सबसे बड़ी कंपनी है। जिसमें टाटा चाय, 5 स्टार होटल, स्टील, कार और हवाई जहाज शामिल हैं।

आपको बता दें कि, रतन टाटा को पालतू जानवर रखना काफी पसंद हैं। इसलिए उन्होंने अपना मुंबई वाला बंगाला जिसकी कीमत 400 करोड़ है वो पालतू कुत्तों की देखभाल के लिए दिया हुआ है। साथ ही उन्हें प्लेन उड़ाने का भी काफी शौक है, जिसका उनके पास लाइसेंस भी है।



रतन टाटा जीवन परिचय-रतन टाटा का काम करने का तरीक एकदम अलग है। इसलिए उनके साथ काम करने वाले कर्मचारी भी उनके साथ काम करना काफी पसंद करते हैं। इसलिए कहा जाता है टाटा में काम करना सरकारी नौकरी से कम नहीं है।

रतन टाटा ने अपने ग्रुप को 21 साल दिए और आपको बता दें कि, इन्हीं 21 सालों में उन्होंने अपनी कंपनी को टॉप  तक पहुंचा दिया। इसलिए आज के समय में इस कंपनी की वैल्यू करीबन ५० से भी जाया डा हो चुकी  थी

इस बात को हर कोई बहुत अच्छे से समझा गया  कि 2008 में मुंबई में हुए 26/11 हमले में ताज होटल में जितने भी लोग घायल हुए थे उन सबका इलाज टाटा ने ही कराया था।

26/11 के हमले में होटल के आस-पास जो लोग भी दुकान या ठेला लगाते थे। उनकी मदद के लिए भी टाटा ग्रुप आगे बाद कर मदत की  और उन्होंने उनको मुआवजे के तौर पर भौत सी कीजे भी दी थी।

26/11 आतंकवादी हमला शायद ही मुंबईवासी भूल पाए। खासकर वो लोग जो इसमें बंदी बने। इनमें ताज होटल का स्टाफ भी शामिल था। इसलिए जितने भी दिन होटल बंद रहा उतने दिन का वेतन टाटा की ओर से कर्मचारियों को पहुंचा दिया गया

रतन टाटा की कुल संपत्ति

अगर हम टाटा ग्रुप की सभी कंपनियों के मार्किट वैल्यू की बात करें तो एक अनुमान के हिसाब से जितनी उनकी कंपनियां हैं उनकी मार्किट वैल्यू 17 लाख करोड़ रुपये मनी जाती है । एक रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी कुल संपत्ति 117 बिलियन डॉलर यानी करीबन 8.25 लाख करोड़ की करीब पहुंच जाती है    रतन टाटा इसमें से 65 प्रतिशत पैसा लोगों की और सहित करने के लिए दान करना पसंद करते है । यही कारण है कि वो दुनिया के अमीर व्यक्तियों में शामिल नहीं हो पते  लेकिन लोग उन्हें दिल का बहुत अमीर कहते है

रतन टाटा को मिला सम्मान और पुरस्कार

रतन टाटा को भारत सरकार की ओर से पद्म भूषण (2000) और पद्म विभूषण (2008) में सम्मानित किया गया । ये सम्मान देश के तीसरे और दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान में से एक है। इसके अलावा उनको और कई अवॉर्ड से भी नवाजा गया है। जिसके जानकारी इस प्रकार से है-

साल अवॉर्ड संगठन
2001 बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन के मानद डॉक्टर ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी
2004 उरुग्वे के ओरिएंटल गणराज्य की पदक उरुग्वे की सरकार
2004 प्रौद्योगिकी के मानद डॉक्टर एशियन इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी
2005 साइंस की मानद डॉक्टर वारविक विश्वविद्यालय
2006 साइंस की मानद डॉक्टर इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी मद्रास
2007 मानद फैलोशिप अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान के लंदन स्कूल
2007 परोपकार की कार्नेगी पदक अंतर्राष्ट्रीय शांति के लिए कार्नेगी एंडोमेंट
2008 लीडरशिप अवार्ड लीडरशिप अवार्ड
2008 लॉ की मानद डॉक्टर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय
2008 साइंस की मानद डॉक्टर इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी मुंबई
2008 मानद नागरिक पुरस्कार सिंगापुर सरकार
2008 मानद फैलोशिप इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान
2009 ब्रिटिश साम्राज्य के आदेश के मानद नाइट कमांडर यूनाइटेड किंगडम
2009 2008 के लिए इंजीनियरिंग में लाइफ टाइम योगदान पुरस्कार इंजीनियरिंग इंडियन नेशनल एकेडमी
2009 इतालवी गणराज्य की मेरिट के आदेश के ‘ग्रैंड अधिकारी’ का पुरस्कार इटली की सरकार
2010 लॉ की मानद डॉक्टर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय
2010 हैड्रियन पुरस्कार विश्व स्मारक कोष
2010 शांति पुरस्कार के लिए ओस्लो व्यापार शांति प्रतिष्ठान के लिए व्यापार
2010 लीडरशिप अवार्ड में लीजेंड येल विश्वविद्यालय
2010 कानून की मानद डॉक्टर पेपरडाइन विश्वविद्यालय
2010 इस साल के बिजनेस लीडर एशियाई पुरस्कार
2012 मानद फैलो इंजीनियरिंग की रॉयल अकादमी
2012 व्यापार मानद डॉक्टर न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय
2013 विदेश एसोसिएट नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग
2013 अर्नस्ट और वर्ष का सर्वश्रेष्ठ युवा उद्यमी – लाइफटाइम अचीवमेंट अर्न्स्ट एंड यंग
2013 व्यापार व्यवहार के मानद डॉक्टर कार्नेगी मेलॉन विश्वविद्यालय
2013 डॉक्टरेट की मानद उपाधि एम्स्टर्डम विश्वविद्यालय
2014 व्यापार के मानद डॉक्टर सिंगापुर मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी
2014 सयाजी रत्न पुरस्कार बड़ौदा मैनेजमेंट एसोसिएशन
2014 ब्रिटिश साम्राज्य के आदेश के मानद नाइट ग्रैंड क्रॉस यूनाइटेड किंगडम
2014 कानून की मानद डॉक्टर न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय, कनाडा
2015 ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग की मानद डॉक्टर क्लेमसन विश्वविद्यालय
2015 मानद एचईसी पेरिस
2016 कमांडर ऑफ ऑनर फ्रांस की सरकार

 

 

सत्ता और धन मेरे दो प्रमुख सिद्धांत नहीं हैं। ऐसी कई चीजें हैं, जो अगर मुझे दोबारा जीने के मौका मिले तो शायद मैं अलग ढंग से करूँगा। लेकिन मैं पीछे मुड़कर ये नहीं देखना चाहूँगा कि मैं क्या नहीं कर पाया।

जिस दिन मैं उड़ान नहीं भर पाऊंगा, वो मेरे लिए एक दुखद दिन होगारतन टाटा की बायोग्राफी मिली जानकारी के अनुसार हार्परकॉलिंस ने टाटा संस के चेयरमैन रतन टाटा के जीवन पर आधारित बायोग्राफी छापने की डील पर सादिल डील थी आपको बता दें कि ये किताब नवंबर 2022 में छपकर तैयारहो गई । ऐसा कहा जाता है कि, इसमें उनके जीवन के कुछ ऐसे तथ्यों के बारे में दिखया जाएगा। जिसके बारे में बहुत कम लोग ही को पता होगा।

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