Bimbisara Kaun The Bimbisara Story In Hindi

Bimbisara Story In Hindi , Bimbisara Kaun The , बिम्बिसार का दूसरा नाम , बिम्बिसार की उपलब्धियों , बिम्बिसार किसका पुत्र था , बिम्बिसार की पत्नी का नाम , बिम्बिसार चन्द्रगुप्त मौर्य , अजातशत्रु , बिंबिसार का पुत्र कौन था , बिम्बिसार किस वंश का था 

Bimbisara Story In Hindi आइए दोस्तों आज में आपको बताने वाली हूँ Bimbisara के बारे में जैसा यह एक मगध साम्राज्य सम्राट थे। जिन्होंने हर्यक वंश की स्थापना की थी जैसा अत्यधिक लोग इनके बारे में नहीं जानते तो ऐसे में आपको इनके बारे में जानना चाहिए यह काफी महान व्यक्ति थे।

इनके बारे में और इनके इतिहास के बारे काफी बड़ी Story है। और हालही में Bimbisara के नाम से मूवी आ रही है तो ऐसे आप देख सकते है की Bimbisara की Story कितनी रहस्मय हो सकती है। आज में आपको इनके बारे में बताने वाली हूँ आइए जानते है ।

प्रस्तावना : Bimbisara का शासनकल 558 ईसा पूर्व से 491 ईसा पूर्व तक शासन किया था। Bimbisara बौद्ध धर्म के अपनाते थे। लेकिन बाद में उन्होंने रानी चेलना के को देखते हुए और उनसे प्राभावित होकर जैन धर्म अपना लिया। Bimbisara Story In Hindi

रानी चेलना कन्नड भारत के कर्नाटक के कित्तूर राज्य की रानी थीं। कुछ पुराणों के अनुसार Bimbisara को श्रेणिक नाम से भी जाना जाता हैं।

Bimbisara Story In Hindi

 

  • Full Name Of Bimbisara- राजा Bimbisara .
  • Other Name Of Bimbisara- बिंबिसार, श्रेणिक, खादीसार.
  •  Bimbisara Birth- 558 ईसा पूर्व.
  •  Death Of Bimbisara- 491 ईसा पूर्व.
  •  Bimbisara Fathers Name- भाट्टियां.
  •  Bimbisara Mothers Name- बिंबी.
  •  Bimbisara Wifes Name- चेलना , खेमा और कोशाला देवी.
  • Son Of Bimbisara- अजातशत्रु 

Bimbisara Kaun The

Bimbisara यह शुरुआती समय पर यह गौतम बुद्ध के अनुयारी थे और गौतम बुद्ध की शिक्षाए से यह बौद्ध धर्म मशहूर हुआ। यह अपने रीती रिवाज के लिए काफी कठोर थे यानी की यह अपने बौद्ध धर्म का पालन काफी सख्ती से करते थे। Bimbisara Kaun The

Satvahan Kaun The – सातवाहन राजवंश : इतिहास, उत्पत्ति, साम्राज्य और गिरावट

1543 ईसा पूर्व बिंबिसार ने हर्यक वंश की स्थापना के साथ ही मगध राज्य के काम को संभाला।  Bimbisara Kaun The शुरू से ही इन्होंने साम्राज्य पर ध्यान देना शुरू कर दिया।

Bimbisara का विवाह

Bimbisara ने 500 से भी अधिक रानियों से विवाह किया था।Bimbisara Kaun The इतिहास के द्वारा केवल यह पता चला की में तीन रानियों के बारे में यानि की पहली हर्यक वंश के संस्थापक Bimbisara ने कौशल के राजा प्रसेनजीत की बहन से विवाह किया था, जिसका नाम रानी कोशाला देवी था।

Acharya Chanakya Kaun The | Chanakya Biography in hindi

दूसरा विवाह इन्होंने रानी चेलना से किया जो कि वैशाली के राजा चेतक की पुत्री थी। वहीं राजा Bimbisara ने पंजाब प्रांत के मृदु देश की राजकुमारी क्षेमा से भी विवाह किया था।

जैन साहित्य के द्वारा यह पता चला है की राजा Bimbisara के एक और विवाह का प्रमाण मिलता है जो उन्होंने राजकुमारी गणिका आम्रपाली के साथ किया था।

महावग्ग के अनुसार Bimbisara ने तक़रीबन 500 राजकुमारियों से विवाह किया था। इतने लोगो से विवाह करने के पीछे यह रहस्य था की उन्हें साम्राज्य का विस्तार करना था अपने साम्राज्य के विस्तार के लिए अलग-अलग राजा अलग-अलग तरह की रणनीति का इस्तेमाल करते हैं वैसे ही राजा बिंबिसार ने बड़े-बड़े राजवंशों में विवाह करके अपने साम्राज्य का विस्तार किया था।

Bimbisara की प्रशासनिक व्यवस्था

इनके शासनकाल में प्रजा सुखी और खुशहाल थे। Bimbisara प्रजा का पुरा ख्याल रखते थे साथ ही उनके प्रशासन में शामिल कर्मचारियों पर भी उनकी विशेष नजर रहती थी। Bimbisara के प्रशासन में जो उच्च अधिकारी होते थे उन्हें राजभट्ट के नाम से जाना जाता था। और Bimbisara के कार्य को अलग अलग बाटा गया था। जिसके बारे में आपको निचे बताया है

इन अधिकारियों को चार श्रेणियों में विभाजित किया हुआ था जिनमें

  • सम्बन्थक ( जो सामान्य प्रशासनिक कार्यों को देखते थे 
  • सेनानायक (सेना से संबंधित सभी कार्यों की देखरेख इनकी निगरानी में होता था
  • वोहारिक (न्यायपालिका से संबंधित कार्य इनके द्वारा किए जाते थे
  • महामात्त ( राज्य में होने वाले उत्पादन पर लगान वसूलने का काम इनके द्वारा किया जाता था).
  • एक छोटे से छोटे व्यक्ति की बात को सुना जाता था और समस्या का समाधान किया जाता था। यही वजह रही कि बिंबिसार के राज में मगध साम्राज्य ने निरंतर विस्तार किया और लोगों का विश्वास भी जीता।

Bimbisara द्वारा साम्राज्य विस्तार (Expansion of the Empire by Bimbisara)

544 ईसा पूर्व नागवंश की उपशाखा के रूप में जाने जाना वाला इस क्षत्रिय हर्यक वंश का उदय हुआ था। बिंबिसार को मगध साम्राज्य का संस्थापक माना जाता थे

Bimbisara कि साम्राज्य विस्तार की रणनीति सबसे अलग थी। Bimbisara की रणनीति के अनुसार इनका साम्राज्य विस्तार भी हुआ और किसी से भेदभाव  भी नहीं हुआ।

मगध के राजा Bimbisara ने आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले राजा-महाराजाओं की राजकुमारियों से शादी की, बदले में उन्हें कुछ क्षेत्र भी मिला और सम्मान भी मिला। इस तरह धीरे-धीरे बिंबिसार द्वारा साम्राज्य का विस्तार किया गया।

राजा Bimbisara बौद्ध धर्म को मानते थे। Bimbisara Kaun The Bimbisara Story In Hindi  और बौद्ध धर्म के प्रचार या प्रसार में Bimbisara ने कोई कमी नहीं रखी। ऐसा कहा जाता है कि बिंबिसार ने सन्यासी गौतम बुद्ध का पहला दर्शन पांडव पर्वत के नीचे किया, साथ ही उन्हें अपने राजभवन में भी बुलाया गया था। Bimbisara Kaun The Bimbisara Story In Hindi

इतिहास के द्वारा यह पता चला की गौतम बुद्ध ने इनका निमंत्रण स्वीकार नहीं किया और अपनी राह पर चलते रहे। निमंत्रण अस्वीकार करने पर राजा बिंबिसार Bimbisara Story In Hindi उदास नहीं हुए उन्होंने गौतम बुद्ध को उद्देश्य प्राप्ति के लिए शुभकामनाएं दी और उद्देश्य प्राप्ति के बाद राजगीर (हर्यक वंश की राजधानी) आने का निमंत्रण दिया।

Bimbisara की उपलब्धियों की विवेचना (Achievements of Bimbisara)

1. Bimbisara ने हर्यक वंश की स्थापना की, राजगीर को राजधानी बनाया और मगध साम्राज्य का विकास और विस्तार का श्रेय उन्हें जाता है।

2. इतिहास में राजा Bimbisara ऐसे राजा थे जिन्होंने साम्राज्य विस्तार और प्रजा की सुख समृद्धि के लिए कार्य किया। इसी क्रम में उन्होंने अपनी प्रशासनिक व्यवस्था को इस तरह से संगठित किया Bimbisara Kaun The Bimbisara Story In Hindi  

एक छोटे से छोटे व्यक्ति को न्याय मिल सके और उसकी खुशी का ध्यान रखा जा सके। यह Bimbisara की उपलब्धियों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

3. Bimbisara की उपलब्धियों में तीसरी सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि उन्होंने आसपास के राजा महाराजाओं से संबंध स्थापित करते हुए साम्राज्य विस्तार किया। जिससे ना सिर्फ राज्य का विस्तार हुआ बल्कि आपसी प्रेम भी बढ़ा।

4. गौतम बुद्ध से प्रभावित होकर बिंबिसार ने बौद्ध धर्म के प्रचार एवं प्रसार में अपने जीवन के अमूल्य 30 वर्ष लगा दिए यह भी Bimbisara की मुख्य उपलब्धि रही है।

5. Bimbisara के राज्य को भारतवर्ष के स्वर्णिम काल के रूप में देखा जाता है जो कि Bimbisara के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी।

Bimbisara की मृत्यु कैसे हुई (How did Bimbisara die?)

तो अब बौद्ध ग्रंथ विनयपिटक के अनुसार अपने कार्यकाल के दौरान भी बिंबिसार Bimbisara Story In Hindi ने उनके पुत्र अजातशत्रु को हर्यक वंश का युवराज घोषित कर दिया था।

इतिहास के द्वारा पता चलता है की जल्द ही राज्य की कमान हासिल करने के लिए युवराज अजातशत्रु ने उनके पिता Bimbisara Bimbisara Story In Hindi का अंत कर दिया। ऐसा कहा जाता है कि सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) के चचेरे भाई देवदत्त ने Bimbisara के खिलाफ षड्यंत्र रचा और युवराज अजातशत्रु को उकसाया, देवदत्त के बहकावे में आकर अजातशत्रु ने बिंबिसार की हत्या कर दी। Bimbisara Kaun The Bimbisara Story In Hindi

इसके अनुसार Bimbisara के पुत्र अजातशत्रु ने जल्द से जल्द राज्य हथियाने के लिए अपने पिता बिंबिसार को कैद खाने में डाल दिया जहां पर उनकी देखरेख Bimbisara की पत्नी चेलना ने की। Bimbisara Kaun The Bimbisara Story In Hindi

बिंबिसार (Bimbisara Story In Hindi) को भी उनके पुत्र अजातशत्रु से बहुत प्रेम था। जब यह बात अजातशत्रु को पता चली कि उनके पिता उनसे बहुत प्रेम करते हैं और उन्हें पहले ही युवराज नियुक्त कर चुके हैं, तब अजातशत्रु ने लोहे का डंडा हाथ में लिया और Bimbisara की बेड़ियां काटने के लिए कैद खाने में गया। यह दृश्य देखकर जब Bimbisara (Bimbisara Story In Hindi को किसी अनहोनी घटना की आशंका हुई तो उन्होंने जहर खा लिया और इस तरह उनकी मृत्यु हो गई।

इतिहास में Bimbisara की मृत्यु को लेकर एक और घटना का जिक्र मिलता है जिसके अनुसार उनके पुत्र अजातशत्रु ने उन्हें कैद खाने में कई दिनों तक भूखा प्यासा रखा जिससे उनकी मृत्यु हो गई।

बिम्बिसार के पुत्र का नाम

  • Ajatashatru
  • Jīvaka

बिम्बिसार के पिता का नाम

Bhat

बिम्बिसार की पत्नी का नाम

चेलना

हर्यक वंश के बाद कौन सा वंश आया

शिशुनाग वंश

बिम्बिसार का दूसरा नाम क्या था

श्रेणिक

4 1 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments