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Satvahan Kaun The – सातवाहन राजवंश : इतिहास, उत्पत्ति, साम्राज्य और गिरावट

Satvahan Kaun The दोस्तों आपको जानकार हैरानी होगी की ये ऐसे शासक थे जो आजके आंध्र प्रदेश में राज करते थे  सातवाहन साम्राज्य के संस्थापक ,सातवाहन वंश के अंतिम शासक कौन थे ,सातवाहन वंश की राजधानी ,सातवाहनवंश की संस्कृति, सातवाहन वंश,सातवाहन वंश का पतन

सातवाहन दक्षिण भारत में गोदावरी और कृष्णा नदी के मध्य राज्य करते थे।


सातवाहन वंश, प्राचीन भारत राजवंश है।


सातवाहन वंश की स्थापना 230 से 60 ईसा पूर्व के बीच राजा सीमुक ने की थी।


इसलिए उन्हें आंध्र कहते है। जबकि वायु पुराण के अनुसार भी सातवाहन आंध्र थे।


परन्तु सातवाहनों के किसी भी अभिलेख में इस बात का चर्चा ही नहीं होती कि वे आंध्र थे। जो क्षत्रिय थे।


सातवाहनों की उत्पत्ति तथा मूल निवास स्थान के विषय में विद्वानों में मतभेद है । पुराणों थे इस वंश के संस्थापक सिमुक को ‘आन्ध्र-भृत्य’ तथा ‘आन्ध्रजातीय’ कहा गया है, जबकि अपने अभिलेखों में इस वंश के राजाओं ने अपने को सातवाहन ही कहा है ।प्राचीन काल में कृष्णा तथा गोदावरी नदियों के बीच का तेलगुभाषी प्रदेश आन्द्रप्रदेश कहा जाता था ।

ऐतरेय ब्राह्मण में यहाँ के निवासियों को ‘अनार्य’ कहा गया है । उसके अनुसार विश्वामित्र के पुत्रों ने गोदावरी तथा कृष्णा के मध्य स्थित प्रदेश में जाकर आर्येतर जातियों के साध विवाह किया । इस संबंध के फलस्वरूप ‘आन्ध्र’ उत्पन्न हुए ।

महाभारत में आन्ध्रों को म्लेच्छ तथा मनुस्मृति में वर्णसंकर एवं अंत्यज कहा गया है । इस आधार पर कुछ विद्वान सातवाहनों को अनार्य अर्थात् निम्नवर्ण का बताते हैं । किन्तु लेखों में उसके विपरीत सातवाहनों को सर्वत्र उच्चवर्ण का ही बताया गया है ।

 





जबकि सातवाहन राजाओं के नाम वैदिक कालीन ऋषि, ब्राह्मण, गौतम और वशिष्ठ पर भी आधारित हैं। इसलिए ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि सातवाहन ब्राह्मण ही होंगे।परन्तु कुछ विद्वानों ने यह सहमति है, कि सातवाहन आर्य थे। इस प्रकार से अब यह प्रमाणित हो जाता है, कि सातवाहन ब्राह्मण जाति से थे। कुछ विद्वान जैसे आयंगर कहते हैं,

Satvahan Kaun The – सातवाहन राजवंश : इतिहास, उत्पत्ति, साम्राज्य और गिरावट

सातवाहन वंश का उत्पत्ति कण्व वंश के उत्थान के बाद हुआ था। जिसकी स्थापना सातवाहन शासक सिमुक ने की थी। सातवाहन राजवंश भारत का एक पुराना राजवंश है। जिस राजवंश में कई वीर राजा महाराजाओं ने जन्म लिया है। सातवाहन राजवंश की स्थापना 60 ईसवी पूर्व में सिमुक ने दक्षिण भारत में की थी। जिनका शासन कृष्णा और गोदावरी नदियों के मध्य था। इसलिए इन राजाओं को आंध्र भी कहा गया है। सातवाहन शासकों की राजधानी प्रतिष्ठान या पैठन हुआ करती थी। जबकि वायु पुराण में भी सातवाहन शासकों की चर्चा देखने को मिलती है।

सातवाहन अनायोचित थे। क्योंकि उन्होंने कहा है, कि कई सातवाहन ऐसे राजा हैं, जिनके नाम अनायोचित हैं जैसे की सिमुक, हाल, पुलमावी और यह भी तथ्य दिया कि अनार्यो के जैसे ही सातवाहन राजाओं ने अपनी माता के नाम पर अपना नाम रखा था जैसे कि गौतमीपुत्र,वशिष्टिपुत्र किंतु बहुत से विद्वानों ने इस तर्क का विभाजित किया है। Satvahan Kaun The गोपालाचार्य और भांडारकर जैसे विद्वानों ने सातवाहनों ने आर्य बताया और कहा सातवाहन ब्राह्मण नहीं थे इन विद्वानों ने बताया है, कि नासिक अभिलेख गौतमीपुत्र शातकर्णी का था उसमें उसकी तुलना राम, अर्जुन जैसे महान क्षत्रियों से बताई गई है,

सातवाहन वंश का इतिहास

  • पुराण सातवाहनों को ‘आन्ध्रभृत्य’ तथा ‘आन्ध्रजातीय’ कहते हैं
  • गौतमीपुत्र शातकर्णी मृत्यु हुई ->  तब उसका पुत्र वशिष्टिपुत्र  -> पुलमावी शासक बना वशिष्टिपुत्र पुलमावी भी एक वीर योद्धा था।
  • उसने संपूर्ण आंध्रप्रदेश पर विजय प्राप्त करके सातवाहनों के अधीन कर दिया था।
  • वशिष्टिपुत्र ने महाक्षत्रप रूद्रदामन की कन्या से शादी की थी।
  • शातकर्णी प्रथम सातवाहन वंश का सबसे शक्तिशाली First King था।
  • शतकर्णी प्रथम के दो पुत्र थे जिनका नाम था शक्तिश्री और वेदश्री जब शातकर्णी प्रथम की मृत्यु हुई तब यह दोनों पुत्र सिंहासन के योग्य नहीं थे वे अल्पायु थे।
  • इस प्रकार से सातवाहन वंश का भविष्य अंधकारमय हो गया।
  • शातकर्णी प्रथम के बारे में जानकारी सांची अभिलेख, नानाघाट अभिलेख, हाथीगुंफा अभिलेख से प्राप्त होती है।  इसके शासनकाल में प्रजा बहुत ही प्रसन्न रहती थी, कियोकि इसने प्रजा के हित में कई महान कार्य किये।
  • “गौतमीपुत्र शातकर्णी” गौतमीपुत्र शातकर्णी सातवाहन वंश का 23 वा शासक माना जाता है। जिसने सातवाहन वंश का फिर से पुनरुद्धार किया गौतमीपुत्र शातकर्णी एक योग, कुशल और दूरदर्शितापूर्ण सम्राट था
  • गौतमीपुत्र शातकर्णी ने कई राजाओं को पराजित किया और गुजरात, सौराष्ट्र, मालवा, बरार आदि कई क्षेत्रो पर अधिकार कर लिया था। नासिक अभिलेख गौतमीपुत्र शातकर्णी की विजयों का उल्लेख है।
    हाथीगुंफा और नानाघाट अभिलेख से यह ज्ञात होता है, कि सातवाहन राजाओं ने 27 ईसवी पूर्व से अपना शासन शुरू किया था।
  • सातवाहन शासक सिमुक ने ही कण्ड वंश की बची हुई शक्ति को खत्म कर दिया और सातवाहन वंश की स्थापना की। सिमुक के बाद उसका छोटा भाई कृष्ण शासक बना

सातवाहन वंश के शासक

सातवाहन वंश में कुल 9 राजा ही हुए, जिनके नाम निम्नलिखित हैं:-

  1. सिमुक – सिमुक (235 ई. पू. – 212 ई. पू.) सातवाहन वंश का संस्थापक था तथा उसने 235 ई. पू. से लेकर 212ई.पू. तक लगभग 23 वर्षों तक शासन किया। 
  2. कृष्ण – छोटा भाई कान्हा (कृष्ण) राजगद्दी पर बैठा। अपने 18 वर्षों के कार्यकाल में कान्हा ने साम्राज्य विसतार की नीति को अपनाया। नासिक के शिलालेख से यह पता चलता है कि कान्हा के समय में सातवाहन साम्राज्य पश्चिम में नासिक तक फैल गया था।
  3. सातकर्णि – कृष्ण के बाद उसका भतीजा (सिमुक का पुत्र) प्रतिष्ठान के राजसिंहासन पर पदासीन हुआ। उसने सातवाहन राज्य का बहुत विस्तार किया। शिलालेखों में उसे ‘दक्षिणापथ‘ और ‘अप्रतिहतचक्र‘ विशेषणों से संभोधित किया गया है। अपने राज्य का विस्तार कर इस प्रतापी राजा ने राजसूय यज्ञ किया, और दो बार अश्वमेध यज्ञ का अनुष्ठान किया था, क्योंकि सातकर्णी का शासनकाल मौर्य वंश के ह्रास काल में था, 
  4. गौतमीपुत्र सातकर्णि – लगभग आधी शताब्दी की उठापटक तथा शक शासकों के हाथों मानमर्दन के बाद गौतमी पुत्र श्री शातकर्णी के नेतृत्व में अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को पुर्नस्थापित कर लिया। गौतमी पुत्र श्री शातकर्णी सातवाहन (सेंगर वंश) वंश का सबसे महान शासक था जिसने लगभग 25 वर्षों तक शासन
  5. वासिष्ठीपुत्र पुलुमावी – वशिष्ठिपुत्र पलुमवी एक सातवाहन सम्राट बने जो सातवाहन सम्राट गौतमीपुत्र शातकर्णी का पुत्र था। गौतमपुत्र सातकर्णी के बाद वर्ष 132 इसवी में वह शनिवाहन का राजा बना अपने शासनकाल के दौरान, क्षत्रप ने नर्मदा की भूमि उत्तर और उत्तरी कोंकण में ले ली।
  6. वशिष्ठिपुत्र सातकर्णि –  वशिष्ठिपुत्र सातकर्णि सातवाहन वंश के राजा थे जिन्होंने द्वितीय शताब्दी में दख्खन क्षेत्र पर शासन किया। वे वशिष्ठिपुत्र श्री पुलमावी के भाई थे जो महान सातवाहन विजेता गौतमीपुत्र सतकामी के पुत्र थे।
  7. शिवस्कंद सातकर्णि 
  8. यज्ञश्री शातकर्णी
  9. विजय

सातवाहन इतिहास का अन्ध-युग

पुराणों में शातकर्णि प्रथम तथा गौतमीपुत्र शातकर्णि के बीच शासन करने वाले राजाओं की संख्या 10 से 19 तक बताई गयी है ।

इनमें केवल तीन राजाओं के विषय में हम दूसरे स्रोतों से भी जानते है:

(i) आपीलक,

(ii) कुन्तल शातकर्णि तथा

(iii) हाल ।

आपीलक का एक तांबे का सिक्का मध्य प्रदेश से प्राप्त है । कुन्तल शातकर्णि संभवतः कुन्तल प्रदेश का शासक था जिसका उल्लेख वात्स्यायन के कामसूत्र में हुआ है । हाल के विषय में हमें भारतीय साहित्य से भी सूचना मिलती है । यदि प्रारम्भिक सातवाहन राजाओं के युद्ध में शातकर्णि प्रथम सबसे महान् था, तो शान्ति में हाल महानतम था । वह स्वयं बहुत बड़ा कवि तथा कवियों एवं विद्वानों का आश्रयदाता था ।

‘गाथासप्तशती’ नामक प्राकृत भाषा में उसने एक मुक्तक काव्य-ग्रन्थ की रचना की थी । उसकी राज्य सभा में ‘बृहत्कथा’ के रचयिता गुणाढ्य तथा कातन्त्र नामक संस्कृत व्याकरण के लेखक शर्ववर्मन् निवास करते थे । कुछ विद्वानों का विचार है कि उपर्युक्त तीनों नरेश सातवाहनों की मूल शाखा से सम्बन्धित नहीं थे ।

ऐसा प्रतीत होता है कि इसी समय (प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व के मध्य में) पश्चिमी भारत पर शकों का आक्रमण हुआ । शकों ने महाराष्ट्र, मालवा, काठियावाड़ आदि प्रदेशों को सातवाहनों से जीत लिया । पश्चिमी भारत में शकों की क्षहरात शाखा की स्थापना हुई ।

शकों की विजयी के फलस्वरूप सातवाहनों का महाराष्ट्र तथा उसके निकटवर्ती क्षेत्रों में अधिकार समाप्त हो गया और उन्हें अपना मूलस्थान छोड़कर दक्षिण की ओर खिसकना पड़ा । संभव है इस समय सातवाहनों ने शकों की अधीनता भी स्वीकार कर ली हो । इस प्रकार शातकर्णि प्रथम से लेकर गौतमीपुत्र शातकर्णि के उदय के पूर्व तक का लगभग एक शताब्दी का काल सातवाहनों के ह्रास का काल है ।

 

सातवाहन वंश का प्रशासन

प्रशासनिक दशा

शासन को चलाने के लिए भाण्डागारिक (कोषाध्यक्ष), रज्जुक (राजस्व विभाग प्रमुख का प्रमुख), पनियघरक (नगरों में जलपूर्ति का प्रबन्ध करने वाला मुख्य अधिकारी),सातवाहन प्रशासन राजतंत्रात्मक प्रकार का था। राजा राज्य का सबसे बड़ा अधिकारी होता था।. तथा सैनाओं का प्रमुख भी। राजा की मृत्यु होने पर उसका पुत्र या पुत्र अल्पायु होने पर राजा का भाई राजा बनाया जाता था। Satvahan Kaun The राजा को विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर परामर्श देने के लिए अमात्य नामक अधिकारी होते थे। स्थानीय शासन के अधिकारी सामंत होते थे।महारठी’ तथा ‘महाभोज बड़े सामंत थे जिन्हे उच्च अधिकार प्राप्त होते थे। सातवाहन साम्राज्य कई विभागों जिन्हे आहार कहते थे में बंटा था।एक आहार एक केंद्रीय नगर तथा कई गांवों से मिलकर बनता था।

जिसके मुखिया को आमात्य कहा जाता था। जबकि गाँव के मुखिया को ग्रामिक कहते थे। कर्मान्तिक (भवनों के निर्माण की देख-रेख करने वाला मुख्य अधिकारी), सेनापति आदि की नियुक्ति होती थी।

सांस्कृतिक और धार्मिक सामाजिक दशा

कुम्भकार, लोहार, चर्मकार, यांत्रिक स्वर्णकार धनिक आदि कई व्यवसायी सातवाहन साम्राज्य में थे। Satvahan Kaun The सातवाहन साम्राज्य में वर्ण व्यवस्था प्रचलित थी। सातवाहन काल में आर्थिक पक्ष भी अधिक मजबूत था। किसान भूमि के स्वामी होते थे। तथा कृषि उन्नत तरीके से की जाती थी। सातवाहन प्रशासन में लगभग 70 व्यवसायों का उल्लेख मिलता है।

इंद्र सूर्य चंद्र वासुदेव आदि पूजे जाने वाले देवता थे।समाज ब्रह्मण, क्षत्रिय वैश्व, शूद्र में विभक्त था। व्यवसाय के आधार पर अन्य छोटी मोटी जातियाँ भी उपस्थित थी। बौद्ध धर्म की उत्पत्ति का समय तथा कर्मकांड की प्रधानता थी। कई यज्ञ अश्वमेघ, राजसूय का चलन था। स्तूप, बोधिवृक्ष, बुद्ध के चरणचिह्नों, प्रसिद्ध स्थान के साथ ही त्रिशूल, धर्मचक्र, बुद्ध तथा अन्य महात्माओं के अवशेष भी अमिताभ थे।

सातवाहन वंश का अंतिम शासक

सातवाहन वंश का परम प्रतापी और शूरवीर अंतिम शासक यज्ञश्री शातकर्णी था। जिसने शकों पर विजय प्राप्त की थी। Satvahan Kaun The तथा संपूर्ण आंध्र प्रदेश पर अपना अधिकार जमा लिया था सातवाहन वंश के अंतिम शासको की दुर्बलता और आयोग्यता का फायदा उठाते हुए पल्लव वंश तथा इक्षवाकु वंश ने दक्षिण भारत पर अधिकार करना शुरू कर दिया तथा सातवाहन वंश सदा के लिए नष्ट हो गया। किंतु यज्ञश्री शातकर्णी के बाद होने वाले सातवाहन शासक सहनशीलता और योग्यताहीन साबित हुए।

सातवाहन वंश के Important Points : 
  • सातवाहन शासक सवाल एक बहुत बड़ा कवि था जिसने प्राकृत भाषा में गाथा सप्तशती की रचना की।
  • भडोच बंदरगाह सातवाहन शासकों का प्रमुख व्यापारिक बंदरगाह था।
  • सातवाहन वंश के शासकों ने आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र तथा कर्नाटक के मुख्य सभी क्षेत्रों पर शासन किया था।
  • सातवाहन वंश की राजधानी पैठन जब की राजकीय भाषा लिपि ब्राह्मी थी।
  • गौतमीपुत्र शातकर्णी ने पार्थियनो तथा शकों को पराजित कर खोई हुई प्रतिष्ठा फिरसे प्राप्त की थी।
  • शातकर्णी शासक ने सबसे पहले राजसूय और अश्वमेघ यज्ञ करवाया था, तथा उसे दक्षिणापति की उपाधि प्राप्त थी। वाशिष्टिपुत्र ने अमरावती के बौद्ध स्तूप का पुनरुधार करवाया था।

सातवाहन वंश की राजधानी कौन सी है?

प्रतिष्ठान सातवाहन वंश की राजधानी रही, यह महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में है। सातवाहन साम्राज्य की राजकीय भाषा प्राकृत व लिपि ब्राह्मी थी।

सातवाहन वंश की राजधानी कहा थी?

अमरावली में आंध्र गोदावरी और कृष्णा नदियों की घाटी में सिमुक नामक व्यक्ति ने तक़रीबन 60 ई पू में सातवाहन वंश की नींव डाली थी। Satvahan Kaun The यह राजवंश आंध्र वंश और सातवाहन वंश दोनों नामों से प्रसिद्ध है। सिमुक का राज्यकाल तक़रीबन 60 ई. पू से 37 ई पू तक माना जाता है।







उसके तत्पश्चात्उसका भाई कृष्ण और कृष्ण के तत्पश्चात् उसका पुत्र शातकर्णि प्रथम शासक बना। तीसरा शासक शातिकर्णि प्रथम ही सातवाहन वंश की शक्ति एवं सत्ता का मूल संस्थापक माना जाता है। Satvahan Kaun The इस वंश के सभी शासक हिंदू धर्म के कट्टर अनुयायी थे। सातवाहनों ने ही सर्वप्रथम ब्राह्मणों को भूमि अनुदान देने की प्रथा आरंभ की (अग्रहार)। सातवाहनों की पहली राजधानी गोदावरी नदी के तट पर प्रतिष्ठान (आधुनिक पैठन) नामक नगरी थी। कालांतर में सातवाहन शासकों ने अपनी राजधानी अमरावली बनाई।

Q. सातवाहनों की राजधानी कौनसी थी ?

Ans – प्रतिष्ठान सातवाहन वंश की राजधानी रही , यह महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में है। सातवाहन साम्राज्य की राजकीय भाषा प्राकृत व लिपि ब्राह्मी थी।

Q. सातवाहन वंश के बाद कौन सा वंश आया

Ans – इसे सुनेंरोकेंशुंग राजवंश – शुंग वंश की नींव रखने वाला इस वंश का प्रथम राजा पुष्यमित्र शुंग था।

शुंग के बारे में अधिक जानकारी हम आगे आने वाले पोस्ट्स में बताएंगे उम्मीद है आपको ये वाला पोस्ट अच्छा लगा है और अगर ऐसा है तो इसे आगे लोगो से शेयर करे और अपने स्टेटस में जरूर लगाए धन्यवाद

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Adarsh
Adarsh
24 days ago

its good

Adarsh
Adarsh
24 days ago

best

Hema
Hema
23 days ago

Best