Wednesday, July 24, 2024
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Compiler क्या है और इसका क्या उपयोग है?

Compiler क्या है?

Compiler क्या है-Compiler एक सॉफ्टवेयर होता है जो एक प्रोग्रामिंग भाषा से लिखे गए स्रोत कोड को मशीन कोड में बदलता है। स्रोत कोड एक मशीन कोड नहीं होता है, जिसे कंप्यूटर समझ सकता है, इसलिए कंपाइलर का उपयोग स्रोत कोड को मशीन कोड में बदलने के लिए किया जाता है।

कंपाइलर एक विशेष प्रकार का ट्रांसलेटर होता है जो स्रोत कोड को मशीन कोड में ट्रांसलेट करता है। कंपाइलर अनुवादक के विपरीत होता है, जो स्रोत कोड को एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवादित करता है।

कंपाइलर के द्वारा बनाए गए मशीन कोड को कंप्यूटर अनुवादक निष्पादित करता है जो इसे कंप्यूटर द्वारा समझे जाने वाले फॉर्म में बदलता है। यह कंपाइलर द्वारा उत्पन्न मशीन कोड समझने के लिए कंप्यूटर अनुवादक की मदद के बिना कंप्यूटर द्वारा संचालित नहीं किया जा सकता है।

Compiler किसे कहते है

Compiler को एक सॉफ्टवेयर टूल कहा जाता है जो स्रोत कोड को मशीन कोड में बदलता है। यह स्रोत कोड को अनुवादित करता है ताकि कंप्यूटर इसे समझ सके। कंपाइलर का उपयोग प्रोग्रामिंग भाषाओं में से किसी भी एक कोड को बनाने के लिए किया जाता है।

कंपाइलर को प्रोग्रामिंग के संसाधनों में एक महत्वपूर्ण संचालक माना जाता है। इसका उपयोग सिस्टम सॉफ्टवेयर, एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर, गेम, मोबाइल ऐप्स, वेब ऐप्स और अन्य सॉफ्टवेयर विकास में किया जाता है।

कंपाइलर का उपयोग प्रोग्रामिंग के लिए आवश्यक होता है क्योंकि कंप्यूटर समझने के लिए स्रोत कोड के रूप में लिखा गया कोड उसे समझने में असमर्थ होता है। कंपाइलर इस समस्या को हल करता है और स्रोत कोड को मशीन कोड में बदलता है जिससे कंप्यूटर उसे समझ सकता है।



Compliers की Major Parts क्या होते है

Analysis Phase:-Analysis phase एक software development life cycle (SDLC) का पहला चरण होता है जो एक सॉफ्टवेयर उत्पादन के लिए आवश्यक होता है। यह phase requirement gathering और विश्लेषण को सम्मिलित करता है और विकास की शुरुआत करने से पहले सॉफ्टवेयर के परिचय को जमा करता है।

इस चरण में विशेषज्ञों द्वारा संभावित उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं को आँकलना और आवश्यकताओं के संबंध में जानकारी का संग्रह करना होता है। इसके अलावा, विशेषज्ञों को विभिन्न विकल्पों का विश्लेषण करना चाहिए जो सॉफ्टवेयर की आवश्यकताओं को पूरा करते हों।

Synthesis Phase:-सिंथेसिस फेज सॉफ्टवेयर उत्पादन जीवन चक्र (SDLC) का दूसरा चरण होता है जो सॉफ्टवेयर के निर्माण या विकास के दौरान संचालन किया जाता है। इस फेज में, आवश्यकताओं और विशेषज्ञता के आधार पर एक नई सॉफ्टवेयर उत्पादन की अंतिम नकल बनाई जाती है।

इस चरण में, सॉफ्टवेयर के प्रमुख विभागों के विशेषज्ञ विभिन्न टूल और तकनीकों का उपयोग करते हुए एक संगठित तरीके से सॉफ्टवेयर को उत्पन्न करते हैं। इस चरण में, सॉफ्टवेयर विकास करने वालों को संबंधित तकनीकों के आधार पर कोड करना होता है, जिसमें वे सॉफ्टवेयर की विशेषताओं को लागू करते हैं।

Decompiler किसे कहते है

Decompiler एक ऐसा सॉफ्टवेयर होता है जो कंपाइल किया गया मशीन कोड (binary code) को उसकी मूल स्रोत कोड (source code) में रूपांतरित करता है। यह उपकरण उन विकसित करने वालों के लिए उपयोगी होता है जो अपने संग्रहीत बाइनरी कोड को वापस स्रोत कोड में परिवर्तित करना चाहते हैं।

Decompiler का उपयोग सॉफ्टवेयर अनुप्रयोगों की जांच या उनके जाँच के लिए उपयोग किया जाता है। यह उपयोगी होता है जब आप किसी अन्य कंपनी द्वारा बनाए गए बाइनरी अनुप्रयोगों को जाँचना चाहते हैं और उनकी कार्यप्रणाली को समझने की कोशिश करते हैं।

Cross-Compiler किसे कहते है

Cross-compiler एक ऐसा कंपाइलर है जो एक प्लेटफॉर्म (संस्करण, ऑपरेटिंग सिस्टम या हार्डवेयर) पर निर्मित कोड को दूसरी प्लेटफॉर्म पर कंपाइल करता है। अर्थात्, एक सिस्टम पर कंपाइल किया गया कोड, दूसरी सिस्टम पर चलाया जा सकता है।

यह कंपाइलर विभिन्न प्लेटफॉर्म के बीच सॉफ्टवेयर विकास को सुगम बनाता है। यह उपयोगी होता है जब आप एक सिस्टम पर सॉफ्टवेयर विकसित करते हैं, जो दूसरे सिस्टम पर उपयोग के लिए होता है।

Prgramming Language किसे कहते है

Programming language (प्रोग्रामिंग भाषा) एक संगणक के निर्देशों का एक सेट होता है जिससे एक कंप्यूटर प्रोग्राम बनाया जाता है। यह भाषा इंसानों द्वारा लिखी जाती है और कंप्यूटर द्वारा समझी जाती है। इसे संगणक से संबंधित अपनी संरचना और निर्देशों की अधिकतम संभावित स्पष्टता और आसानी के लिए तैयार किया जाता है।

कंप्यूटर प्रोग्राम को लिखने के लिए, एक प्रोग्रामर को एक प्रोग्रामिंग भाषा का उपयोग करना होता है। उन्हें प्रोग्राम के सार्थक नाम, वेरिएबल, और कमांडों को लिखने के लिए इस भाषा का उपयोग करना पड़ता है।

प्रोग्रामिंग भाषाएं कई प्रकार की होती हैं, जिनमें से कुछ पॉपुलर भाषाएं हैं, जैसे C++, Java, Python, JavaScript, PHP, Ruby, Swift और Objective-C। हर भाषा का उद्देश्य एक ही होता है – कंप्यूटर प्रोग्राम लिखने के लिए एक स्टैंडर्ड तरीका प्रदान करना, जो कंप्यूटर को निर्देश देने के लिए संभव होता है।

Compilerका क्या उपयोग है

  • कम्पाइलर (Compiler) का उपयोग प्रोग्रामिंग भाषाओं से लिखी गई कंप्यूटर कोड को मशीन कोड में ट्रांसलेट (translate) करने के लिए किया जाता है। इसका मतलब होता है कि कंपाइलर उस प्रोग्राम को जिसे प्रोग्रामर ने प्रोग्रामिंग भाषा में लिखा है को मशीन के लिए समझने में मदद करता है।
  • कंपाइलर का उपयोग बहुत से एप्लिकेशनों, सिस्टम्स और सॉफ्टवेयर के विकास में किया जाता है। कम्पाइलर के द्वारा लिखे गए कोड को मशीन कोड में ट्रांसलेट किया जाता है जो कंप्यूटर द्वारा समझे जाने वाले कोड होता है। यह मशीन कोड कंप्यूटर द्वारा सीधे निष्पादित किया जा सकता है।

Compiler के अलग अलग Phases क्या है

कंपाइलर विभिन्न फेजों में कोड को ट्रांसलेट (translate) करता है। इन फेजों में कंपाइलर कोड को भाषा के संरचना और नियमों के आधार पर विश्लेषण (analysis) और संश्लेषण (synthesis) करता है। इसके बाद इसे मशीन कोड में ट्रांसलेट किया जाता है।

कंपाइलर के फोलोइंग फेज होते हैं:

  • लेक्सिकल विश्लेषण (Lexical Analysis)
  • संयुक्त विश्लेषण (Syntax Analysis)
  • सेमांटिक विश्लेषण (Semantic Analysis)
  • इंटरमीडिएट कोड जनरेशन (Intermediate Code Generation)
  • इंटरमीडिएट कोड के उत्पादन का विश्लेषण (Intermediate Code Optimization)
  • मशीन कोड जनरेशन (Code Generation)
  • मशीन कोड के उत्पादन का विश्लेषण (Code Optimization)
    ये फेज एक दूसरे से सम्बंधित होते हैं और एक से दूसरे में जाते हुए कंपाइलर कोड के समस्त विवरणों को संसाधित करते हैं ताकि यह मशीन कोड में ट्रांसलेट करने के लिए तैयार हो सके।

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