Saturday, March 2, 2024
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नात शरीफ हिंदी में Naat Sharif Likhi Hui

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नात शरीफ हिंदी में Naat Sharif Likhi Hui- नात शरीफ एक ऐसी कला है जिसमें हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की तारीफ की जाती है। नात शरीफ को कव्वाली के रूप में भी जाना जाता है। नात शरीफ को गाकर या सुनकर इंसान को अल्लाह के करीब आने में मदद मिलती है।

नात शरीफ का मतलब

नात शरीफ हिंदी में Naat Sharif Likhi Hui- नात शरीफ की कई किस्में होती हैं। कुछ नात शरीफ हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के जन्म, जीवन, और उनकी शिक्षाओं के बारे में होती हैं। कुछ नात शरीफ हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की शान में होती हैं।

Naat Sharif Likhi Hui- नात शरीफ को अक्सर धार्मिक समारोहों में गाया जाता है। नात शरीफ को सुनने और गाने से इंसान को शांति और सुकून मिलता है। नात शरीफ हिंदी में

हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की नात शरीफ

सबसे पहले सलाम ब करे मुहम्मद पेदुनिया भर में सबसे बड़े सजदे पेपहले नबी पहले रसूलहजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम


वो हैं नूर पैदा करने वालेवो हैं जन्नत के दातावो हैं इस्लाम के सच्चे पैगंबरहजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम


उनके पैदा होने से ही दुनिया में खुशियाँ आईंउनके पैदा होने से ही इंसानों को राहत मिलीवो हैं दुनिया के सबसे बड़े नबीहजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम


उनके पैगंबर होने का सबूत हैकुरआन और हदीसवो हैं इस्लाम के सबसे बड़े पुजारीहजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम


उनकी शान में गाई जाती हैनातें और कव्वालीवो हैं दुनिया के सबसे प्यारे इंसानहजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम


हम सबको चाहिए किउनकी शान में नाते गाएऔर उनके बताए रास्ते पर चलेंहजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम


अल्लाह से दुआ हैकि हमें हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की शान में नाते गाने की तौफीक देऔर हमें उनके बताए रास्ते पर चलने की हिदायत देहजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह हु अकबर


हस्बी रब्बी जल्लल्लाह | तेरे सदके में आका सारे जहान को दीन मिला

हस्बी रब्बी जल्लल्लाह, मा फ़ी क़ल्बी गै़रुल्लाह
नूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला-इलाहा-इल्लल्लाह


तेरे सदक़े में, आक़ा ! सारे जहाँ को दीन मिला
बे-दीनों ने कलमा पढ़ा, ला-इलाहा-इल्लल्लाह


सिम्त-ए-नबी बू-जहल गया, आक़ा से उस ने ये कहा
गर हो नबी बतलाओ ज़रा, मेरी मुट्ठी में है क्या ?
आक़ा का फ़रमान हुआ और फ़ज़्ल-ए-रहमान हुआ
मुट्ठी से पत्थर बोला, ला-इलाहा-इल्लल्लाह


हस्बी रब्बी जल्लल्लाह, मा फ़ी क़ल्बी गै़रुल्लाह
नूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला-इलाहा-इल्लल्लाह


अपनी बहन से बोले ‘उमर, ये तो बता क्या करती थी ?
मेरे आने से पहले क्या चुपके चुपके पढ़ती थी ?
बहन ने जब क़ुर’आन पढ़ा, सुन के कलाम-ए-पाक-ए-ख़ुदा
दिल ये ‘उमर का बोल उठा, ला-इलाहा-इल्लल्लाह


हस्बी रब्बी जल्लल्लाह, मा फ़ी क़ल्बी गै़रुल्लाह
नूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला-इलाहा-इल्लल्लाह


वो जो बिलाल-ए-हब्शी है, सरवर-ए-दीं का प्यारा है
दुनिया के हर ‘आशिक़ की आँखों का वो तारा है
ज़ुल्म हुए कितने उस पर, सीने पर रखा पत्थर
फिर भी लब पर जारी था, ला-इलाहा-इल्लल्लाह


हस्बी रब्बी जल्लल्लाह, मा फ़ी क़ल्बी गै़रुल्लाह
नूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला-इलाहा-इल्लल्लाह


मेरे नबी के ग़ुलामों का रुत्बा बड़ा है, शान बड़ी
चाहे ग़ौस-ए-आ’ज़म हों या कि दाता हजवेरी
याद नहीं तुम्हें वो मंज़र ! ख़्वाजा ने जब ख़ुद चल कर
नव्वे लाख़ को पढ़वाया, ला-इलाहा-इल्लल्लाह


हस्बी रब्बी जल्लल्लाह, मा फ़ी क़ल्बी गै़रुल्लाह
नूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला-इलाहा-इल्लल्लाह


मेरे मौला ! मेरे ख़ुदा ! तू ही ख़ालिक़-ए-अर्ज़-ओ-समा
तू ही मालिक-ए-रोज़-ए-जज़ा, मैं हूँ सरापा जुर्म-ओ-ख़ता
फिर भी तुझ से है ये दु’आ, वक़्त-ए-नज़ा’ जब आए मेरा
लब पे हो बस एक सदा, ला-इलाहा-इल्लल्लाह


हस्बी रब्बी जल्लल्लाह, मा फ़ी क़ल्बी गै़रुल्लाह
नूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला-इलाहा-इल्लल्लाह





दुनिया के इंसान कई शिर्क-ओ-बिद’अत करते थे
रब के थे बंदे फिर भी बुत की ‘इबादत करते थे
बुत-ख़ानें हैं थर्राए, मेरे नबी हैं जब आए
कहने लगी मख़्लूक़-ए-ख़ुदा, ला-इलाहा-इल्लल्लाह


हस्बी रब्बी जल्लल्लाह, मा फ़ी क़ल्बी गै़रुल्लाह
नूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला-इलाहा-इल्लल्लाह


कलमा रहमत वाला है, कलमा बरकत वाला है
कलमे की बरकत से ही हर इक घर में उजाला है
उस की क़िस्मत खुलती है, उस को जन्नत मिलती है
मरते दम जिस ने भी पढ़ा ला-इलाहा-इल्लल्लाह


हस्बी रब्बी जल्लल्लाह, मा फ़ी क़ल्बी गै़रुल्लाह
नूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला-इलाहा-इल्लल्लाह


सिब्त-ए-नबी है सज्दे में, तीरों की बौछारें हैं
और यज़ीदी लश्कर के हाथों में तलवारें हैं
कर्ब-ओ-बला में जब के था, तेरे नवासे का सज्दा
सारा ज़माना बोल उठा, ला-इलाहा-इल्लल्लाह


हस्बी रब्बी जल्लल्लाह, मा फ़ी क़ल्बी गै़रुल्लाह
नूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला-इलाहा-इल्लल्लाह


गुलशन कलमा पढ़ते हैं, चिड़िया कAll Usersलमा पढ़ती है
दुनिया की मख़्लूक़ सभी ज़िक्र ख़ुदा का करती है
कहते सभी हैं जिन्न-ओ-बशर, कहता शजर है कहता हजर
कहता है पत्ता पत्ता, ला-इलाहा-इल्लल्लाह


हस्बी रब्बी जल्लल्लाह, मा फ़ी क़ल्बी गै़रुल्लाह
नूर-ए-मुहम्मद सल्लल्लाह, ला-इलाहा-इल्लल्लाह


जश्न ए आमद ए रसूल अल्लाह ही अल्लाह बीबी आमिना के फूल अल्लाह ही अल्लाह नात लिखी हुई

जश्न-ए-आमद-ए-रसूल, अल्लाह ही अल्लाह !
बीबी आमिना के फूल, अल्लाह ही अल्लाह !


अल्लाह ही अल्लाह ! बोलो ! अल्लाह ही अल्लाह !
अल्लाह ही अल्लाह ! बोलो ! अल्लाह ही अल्लाह !


जश्न-ए-आमद-ए-रसूल, अल्लाह ही अल्लाह !
बीबी आमिना के फूल, अल्लाह ही अल्लाह !


जब कि सरकार तशरीफ़ लाने लगे
हूर-ओ-ग़िल्माँ भी ख़ुशियाँ मनाने लगे
हर तरफ़ नूर की रौशनी छा गई
मुस्तफ़ा क्या मिले ज़िंदगी मिल गई
ऐ हलीमा ! तेरी गोद में आ गए
दोनों ‘आलम के रसूल, अल्लाह ही अल्लाह !


अल्लाह ही अल्लाह ! बोलो ! अल्लाह ही अल्लाह !
अल्लाह ही अल्लाह ! बोलो ! अल्लाह ही अल्लाह !


जश्न-ए-आमद-ए-रसूल, अल्लाह ही अल्लाह !
बीबी आमिना के फूल, अल्लाह ही अल्लाह !


चेहरा-ए-मुस्तफ़ा जब दिखाया गया
झुक गए तारे और चाँद शर्मा गया
आमिना देख कर मुस्कुराने लगीं
हव्वा, मरियम भी ख़ुशियाँ मनाने लगीं
आमिना बीबी सब से ये कहने लगीं
दु’आ हो गई क़ुबूल, अल्लाह ही अल्लाह !


अल्लाह ही अल्लाह ! बोलो ! अल्लाह ही अल्लाह !
अल्लाह ही अल्लाह ! बोलो ! अल्लाह ही अल्लाह !


जश्न-ए-आमद-ए-रसूल, अल्लाह ही अल्लाह !
बीबी आमिना के फूल, अल्लाह ही अल्लाह !


शादियाने ख़ुशी के बजाए गए
शादी के नग़्मे सब को सुनाए गए
हर तरफ़ शोर-ए-सल्ले-‘अला हो गया
आज पैदा हबीब-ए-ख़ुदा हो गया
फिर तो जिब्रील ने भी ये ए’लाँ किया
ये ख़ुदा के हैं रसूल, अल्लाह ही अल्लाह !


अल्लाह ही अल्लाह ! बोलो ! अल्लाह ही अल्लाह !
अल्लाह ही अल्लाह ! बोलो ! अल्लाह ही अल्लाह !


जश्न-ए-आमद-ए-रसूल, अल्लाह ही अल्लाह !
बीबी आमिना के फूल, अल्लाह ही अल्लाह !


उन का साया ज़मीं पर न पाया गया
नूर से नूर देखो जुदा न हुआ
हम को, ‘आबिद ! नबी पर बड़ा नाज़ है
क्या भला मेरे आक़ा का अंदाज़ है
जिस ने रुख़ पर मली वो ज़िया पा गया
अर्ज़-ए-तयबा ! तेरी धूल, अल्लाह ही अल्लाह !


अल्लाह ही अल्लाह ! बोलो ! अल्लाह ही अल्लाह !
अल्लाह ही अल्लाह ! बोलो ! अल्लाह ही अल्लाह !


जश्न-ए-आमद-ए-रसूल, अल्लाह ही अल्लाह !
बीबी आमिना के फूल, अल्लाह ही अल्लाह !


उन का साया ज़मीं पर न पाया गया
नूर से नूर देखो जुदा न हुआ
हम को, ‘आबिद ! नबी पर बड़ा नाज़ है
क्या भला मेरे आक़ा का अंदाज़ है
जिस ने रुख़ पर मली वो शिफ़ा पा गया
ख़ाक-ए-तयबा ! तेरी धूल, अल्लाह ही अल्लाह !


अल्लाह ही अल्लाह ! बोलो ! अल्लाह ही अल्लाह !
अल्लाह ही अल्लाह ! बोलो ! अल्लाह ही अल्लाह !


जश्न-ए-आमद-ए-रसूल, अल्लाह ही अल्लाह !
बीबी आमिना के फूल, अल्लाह ही अल्लाह !





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