Saturday, March 2, 2024
HomeकहानियाँSurah Ikhlas Tarjuma In Hindi-सूरह इखलास पढ़ने वालों को सबसे बड़ी खुशी...

Surah Ikhlas Tarjuma In Hindi-सूरह इखलास पढ़ने वालों को सबसे बड़ी खुशी मिलती है

Surah Ikhlas Tarjuma In Hindi- सूरह इखलास पढ़ने वालों को सबसे बड़ी खुशी मिलती है-  सूरह इखलास की पहली आयत में कहा गया है कि अल्लाह एक है। वह एकमात्र ईश्वर है। वह किसी से पैदा नहीं हुआ है और न ही किसी ने उसे पैदा किया है। सूरह इखलास की दूसरी आयत में कहा गया है कि अल्लाह निराश्रित है। उसे किसी की आवश्यकता नहीं है। वह सब कुछ स्वयं रखता है। सूरह इखलास की तीसरी आयत में कहा गया है कि अल्लाह ने किसी को जन्म नहीं दिया है और न ही उसे किसी ने जन्म दिया है।

Surah Ikhlas Tarjuma In Hindi- सूरह इखलास की चौथी आयत में कहा गया है कि अल्लाह के समान कोई नहीं है। सूरह इखलास एक बहुत ही महत्वपूर्ण सूरा है। यह इस्लाम के पाँचस्तंभों में से एक, कलमा-ए-शहीदी का एक हिस्सा है। सूरह इखलास को रोजाना कई बार पढ़ा जा सकता है। इसे सुबह-शाम, नमाज़ के बाद, और अन्य अवसरों पर पढ़ा जा सकता है।

सूरह इखलास के पाठ करने से अल्लाह की एकता पर विश्वास मजबूत होता है। यह सूरा पापों को दूर करती है और अल्लाह की कृपा प्राप्त करने में मदद करती है। यह सूरा मृत्यु के बाद के जीवन में सफलता प्राप्त करने में भी मदद करती है।

सूरह इखलास का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह एक बहुत ही सरल सूरा है। इसे आसानी से समझा जा सकता है। यह सूरा सभी मुसलमानों के लिए एक महत्वपूर्ण शिक्षा प्रदान करती है।

सूरह इखलास की पहली आयत

Surah Ikhlas Tarjuma In Hindi-  सूरह इखलास की पहली आयत में कहा गया है कि “वह अल्लाह एक है”। यह आयत अल्लाह की एकता का मूल सिद्धांत है। अल्लाह एक है, उसके कोई भागीदार नहीं हैं। वह सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञानी, सर्वव्यापी है।

सूरह इखलास की दूसरी आयत

Surah Ikhlas Tarjuma In Hindi-  सूरह इखलास की दूसरी आयत में कहा गया है कि “अल्लाह निराश्रित है”। यह आयत अल्लाह की आत्मनिर्भरता को दर्शाती है। अल्लाह किसी पर निर्भर नहीं है। वह स्वयं सब कुछ पैदा करने और चलाने में सक्षम है।

सूरह इखलास की तीसरी और चौथी आयत

Surah Ikhlas Tarjuma In Hindi-  सूरह इखलास की तीसरी और चौथी आयत में कहा गया है कि “न उसने किसी को जन्म दिया और न उसको किसी ने जन्म दिया” और “और उसकी किसी के बराबर कोई नहीं है”। ये आयतें अल्लाह की एकता और सर्वश्रेष्ठता को स्पष्ट करती हैं। अल्लाह ने किसी को जन्म नहीं दिया और न ही किसी ने उसे जन्म दिया। वह सर्वश्रेष्ठ है और उसकी किसी के बराबर कोई नहीं है।

सूरह इखलास एक बहुत ही महत्वपूर्ण सूरा है। यह सूरा अल्लाह की एकता और सर्वश्रेष्ठता को सिखाती है। इस सूरा का पाठ करने से अल्लाह की कृपा प्राप्त होती है और पापों से मुक्ति मिलती है।

Surah Ikhlas In Urdu 

شروع اللہ کے نام سے جو بڑا مہربان نہایت رحم والا ہے

﴿۱﴾ کہو کہ وہ (ذات پاک جس کا نام) الله (ہے) ایک ہے

﴿۲﴾ معبود برحق جو بےنیاز ہے

﴿۳﴾ نہ کسی کا باپ ہے اور نہ کسی کا بیٹا

﴿۴﴾ اور کوئی اس کا ہمسر نہیں

सूरह इखलास का हिंदी अनुवाद

  • अल्लाह के नाम से जो दयालु, कृपाशील है
  • कहिए, वह अल्लाह एक है
  • अल्लाह निराश्रित है
  • न उसने किसी को जन्म दिया
  • और न उसको किसी ने जन्म दिया
  • और उसकी किसी के बराबर कोई नहीं है

सूरह इखलास की विशेषताएं

  • यह सूरा बहुत ही छोटा है, लेकिन इसमें अल्लाह की एकता का गहन अर्थ निहित है।
  • यह सूरा कुरान की सबसे महत्वपूर्ण सूराओं में से एक है।
  • यह सूरा इस्लाम के पाँचस्तंभों में से एक, कलमा-ए-शहीदी का एक हिस्सा है।

सूरह इखलास के लाभ

  • इस सूरा का पाठ करने से अल्लाह की एकता पर विश्वास मजबूत होता है।
  • यह सूरा पापों को दूर करती है और अल्लाह की कृपा प्राप्त करने में मदद करती है।
  • यह सूरा मृत्यु के बाद के जीवन में सफलता प्राप्त करने में मदद करती है।

Soorah Ikhlaas की फ़ज़ीलत

  • इस सूरा का पाठ करने से अल्लाह की एकता पर विश्वास मजबूत होता है। सूरह इखलास में अल्लाह की एकता का स्पष्ट वर्णन किया गया है। इस सूरा का पाठ करने से मुसलमानों में अल्लाह की एकता का विश्वास और अधिक बढ़ता है।
  • यह सूरा पापों को दूर करती है और अल्लाह की कृपा प्राप्त करने में मदद करती है। हदीसों में आया है कि जो व्यक्ति सुबह-शाम 10 बार सूरह इखलास पढ़ता है, उसके सारे पाप माफ़ हो जाते हैं। यह सूरा अल्लाह की कृपा प्राप्त करने में भी मदद करती है।
  • यह सूरा मृत्यु के बाद के जीवन में सफलता प्राप्त करने में मदद करती है। हदीसों में आया है कि जो व्यक्ति मृत्यु के समय सूरह इखलास पढ़ता है, वह अल्लाह की कृपा से जन्नत में प्रवेश कर जाता है।

सूरह इखलास को रोजाना कई बार पढ़ा जा सकता है। इसे सुबह-शाम, नमाज़ के बाद, और अन्य अवसरों पर पढ़ा जा सकता है।

  • सुबह-शाम: सुबह-शाम सूरह इखलास पढ़ने से अल्लाह की कृपा प्राप्त होती है और सारे पाप माफ़ हो जाते हैं।
  • नमाज के बाद: नमाज़ के बाद सूरह इखलास पढ़ने से नमाज़ का सवाब कई गुना बढ़ जाता है।
  • जागने के बाद: जागने के बाद सूरह इखलास पढ़ने से अल्लाह की कृपा से पूरे दिन की ज़िंदगी अच्छी तरह गुज़रती है।
  • सोने से पहले: सोने से पहले सूरह इखलास पढ़ने से अल्लाह की कृपा से रात की नींद अच्छी होती है और बुरे सपने नहीं आते हैं।
  • मुसीबत के समय: मुसीबत के समय सूरह इखलास पढ़ने से अल्लाह की कृपा से मुसीबत दूर हो जाती है।

पानी के गिलास पर 10 बार सुरह इखलास पढ़ने के फायदे

  • जब पानी पर सूरह इखलास पढ़ी जाती है, तो उसमें अल्लाह की बारकात और शक्ति आ जाती है। इस पानी को पीने से व्यक्ति के शरीर और मन को कई लाभ होते हैं।
  •  जब पानी पर सूरह इखलास पढ़ी जाती है, तो उस पानी में अल्लाह की एकता का संदेश समाहित हो जाता है। इस पानी को पीने से व्यक्ति का ईमान मजबूत होता है और वह अल्लाह के प्रति अपनी आस्था में बढ़ोतरी महसूस करता है।
  • जब पानी पर सूरह इखलास पढ़ी जाती है, तो उस पानी में पापों से मुक्ति का संदेश समाहित हो जाता है। इस पानी को पीने से व्यक्ति के गुनाह माफ हो जाते हैं और वह अल्लाह की दया और अनुकंपा प्राप्त करता है।
  • जब पानी पर सूरह इखलास पढ़ी जाती है, तो उस पानी में दुआओं की कबूलता का संदेश समाहित हो जाता है। इस पानी को पीने से व्यक्ति की सभी दुआएं अल्लाह के द्वारा कबूल की जाती हैं।
  • जब पानी पर सूरह इखलास पढ़ी जाती है, तो उस पानी में कठिन परिस्थितियों में सुधार का संदेश समाहित हो जाता है। इस पानी को पीने से व्यक्ति की कठिन परिस्थितियां सुधर जाती हैं और वह सुख-समृद्धि प्राप्त करता है।

सूरह इखलास हिंदी में- Surah Ikhlas In Hindi 

अऊज़ुबिल्लाही मिनश सैतानिर्रजीम

बिस्मिल्लाह हिर्रहमा निर्रहीम

1. कुल हुवल लाहू अहद।

2. अल्लाहुस समद।

3. लम यलिद वलम यूलद।

4. वलम यकूल लहू कुफुवन अहद।

सूरह इखलास पढ़ने वाले लोगों के लिए दो सबसे बड़ी खुशखबरी हैं, एक दुनिया और दूसरी आख़िरत में

सूरह इखलास में अल्लाह की एकता और अद्वैतता का वर्णन किया गया है। इसे बार-बार पढ़ने से व्यक्ति का ईमान मजबूत होता है और वह अल्लाह के प्रति अपनी आस्था में बढ़ोतरी महसूस करता है।

सूरह इखलास को पापों से मुक्ति का भी एक साधन माना जाता है। इसे नियमित रूप से पढ़ने से व्यक्ति के सभी गुनाह माफ हो जाते हैं और वह अल्लाह की दया और अनुकंपा प्राप्त करता है।

सूरह इखलास को नियमित रूप से पढ़ने वाले व्यक्ति को अल्लाह जन्नत में प्रवेश देगा। सूरह इखलास को नियमित रूप से पढ़ने वाले व्यक्ति को अल्लाह अपने घर में ज़ियारत करेगा।  सूरह इखलास को नियमित रूप से पढ़ने वाले व्यक्ति अल्लाह की शरण में होगा और उसे किसी भी तरह का डर या भय नहीं होगा।

 

RELATED ARTICLES
5 1 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments

Most Popular